ये है सीतापुर का प्रशासन, न्याय मांगती महिला को बताया जाता है विक्षिप्त, पुलिस मारती है धक्के

लखनऊ। लखनऊ से महज 8० किलोमीटर की दूरी पर सीतापुर में ऐसा प्रशासन चल रहा है कि न्याय मांगती महिला को ही अधिकारी विक्षिप्त बताते हैं और पुलिस पीड़ित महिला को धक्के मारती हुई घसीट कर जीप में ले जाती है।
घटना मंगलवार की है ये महिला तालगांव थाना क्ष्ोत्र की रहने वाली है। पीड़ित महिला एक प्रार्थना पत्र लेकर सीधे डीएम साहिबा डा. सारिका मोहन से मिलने का प्रयास कर रही थी। तो महिला कांस्टबेल को ये बात न गवांर गुजरी और फिर महिला कांस्टबेल सीमा ने सारी हदे पार करते हुए धक्के मारते हुए उसे जीप में घसीट कर बैठाया और बहादुरी दिखाते हुए पीड़ित महिला को महिला थाने में ले जाकर बैठा दिया। हालांकि इस बारे में कुछ प्रशासनिक अधिकारियों का ये भी कहना है कि महिला विक्षिप्त है।
तालगांव के बेदौरा गांव की अनारकली काफी समय से आये दिन अपनी समस्या को लेकर कलेक्ट्रेट आती रहती हैं। मंगलवार को एक बार फिर जब वह डीएम से मिलने के लिए पहुंची तो चैंबर के बाहर मौजूद महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें डीएम से मिलने नहीं दिया। इस पर अनारकली ने विरोध किया तो महिला कांस्टबेल ने उन्हें धक्के मारकर घसीटते हुए जीप में बैठा दिया और इस दौरान भी अनारकली चीखती चिल्लाती रही लेकिन किसी ने उनपर ध्यान नहीं दिया। हैरानी की बात ये है उस जिले में ये सब होता रहा जहां की डीएम खुद महिला और और उन्हें इसकी पहले भनक तक नहीं लगी।
डीएम ने माना की पुलिस का रवैया गलत
इस बारे में जब डीएम डॉ. सारिका मोहन से बात की गयी तो उन्होंने पुलिस के व्यवहार को गलत बताया और जानकारी दी कि इसके लिए महिला कांस्टबेल को सस्पेंड कर दिया गया है। उन्होंने ये भी कहा कि सिटी मजिस्ट्रेट द्बारा आरक्षियों को बार-बार पीड़िता को कलेक्ट्रेट से बाहर भगाने का निर्देश देना गलत है। आरक्षियों पर कार्रवाई के लिए हमने एसपी से बात की है।
एसपी ने कहा पति की शिकायत लेकर आती है महिला
एसपी आनंद कुलकर्णी से जब इस बारे में बात की गयी तो उन्होंने कहा कि ये महिला पति की शिकायत लेकर अक्सर आती है। ये कई बार आ चुकी है जांच में कुछ नहीं पाया जाता है फिर भी कभी थाने तो कभी कलेक्ट्रेट के चक्कर लगाती रहती है। उन्होंने भी माना कि पीड़िता के साथ महिला कांस्टबेल ने गलत व्यवहार किया है।

सवाल जो हैरान कर देते हैं।
-जहां की डीएम खुद महिला है वहां पर पीड़िता से ऐसी बदसलूकी क्यो?
-डीएम से मिलने का अधिकार हर एक नागरिक को है, फिर महिला से उस दिन डीएम क्यों नहीं मिली?
-एक महिला कांस्टबेल ने जिस तरह से धक्के मारकर पीडिता को जीप में बैठाया क्या ये सही था?
-पीडित की आखिर कौन सी समस्या है जो उसे बार-बार कलेक्ट्रेट आने की जरूरत पड़ती है और उस जिम्मेदार हुक्मरानों ने जांच क्यों नही की।
-सीतापुर मीडिया खबरों के मुताबिक प्रशासनिक अधिकारी महिला को विक्षिप्त क्यों बोल रहे है?
-क्या एक विक्षिप्त ये समझ सकती है कि वह पीड़ित है उसकी शिकायत हमें जिले के डीएम या एसपी से करनी चाहिए।

सवाल कुछ भी हैं लेकिन देश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महिलाओं के सम्मान की बात करते हैं लेकिन सीतापुर में जो पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की तस्वीर सामने निकलकर आयी है वह पूरे सिस्टम की पोल खोलने के लिए काफी है।

आरोपी महिला पुलिस कर्मी को किया गया सस्पेंड
इस बारे में एसपी आंनद कुलकर्णी ने जानकारी देते हुए बताया कि इसके लिए जिम्मेदार महिला पुलिस कर्मी सीमा को सस्पेंड कर दिया गया है। इस बाबत डीएम ने इस पर जवाब मांगा था उन्हें जवाब भी भेज दिया गया है। उन्होंने कहा मामले की जांच भी करायी जा रही है।

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