देश भर में जल्द सुधरेगी सरकारी शिक्षा व्यवस्था सरकार उठाने जा रही है ऐसा कदम

लखनऊ। देश भर में सरकारी शिक्षा का स्तर बदलने जा रहा है। साथ ही सरकारी स्कूलों में अच्छी शिक्षा के प्रति अभिभावकों का विश्वास जगे इसके लिए केन्द्र सरकार एक महात्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। ऐसे में अब एक बार ये उम्मीद की जा सकती है कि गरीब अभिभावकों को काफी हद तक राहत मिल जायेगी।
दरअसल सर्व शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान का अब एक में विलय करने की तैयारी की जा रही है। ताकि दोनो ही मिलकर मजबूत शिक्षा व्यवस्था की ओर अपना कदम बढ़ा सके। इस बात की जानकारी केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव अनिल स्वरूप ने शनिवार को योजना भवन में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अफसरों को यह दी है।
प्राइमरी और जूनियर का एक होगा प्रधानाध्यापक
सर्व शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के साथ विलय होने पर प्राइमरी और जूनियर विद्यालययों में एक प्रधानाध्यापक तैनात होगा। जो कि कक्षा एक से 8 तक की जिम्मेदारी संभालेगा। यही नहीं प्राइमरी के शिक्षक भी एक साथ ही पढ़ायेंगे। यहां तक इनकी कक्षाएं भी एक साथ संचालित होंगी। शिक्षकों का उपस्थिति रजिस्टर भी एक किया जायेगा। ऐसा माना जा रहा है कि इस व्यवस्था से शिक्षक अपनी जिम्मेदारी अच्छे से निभायेंगे।
निजी स्कूलों पर नकेल कसे सरकार
दरअसल मानव संसाधन विकास मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव अनिल स्वरूप राजधानी में स्कूल शिक्षा के कायाकल्प के लिए राज्य सरकार को पिछले साल सुझाये गए रोडमैप पर अब तक हुए अमल की समीक्षा करने आये थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि यदि एक ही परिसर में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं तो उन्हें दो अलग इकाइयों की बजाय एक मानते हुए उनकी प्रशासनिक व्यवस्था का भी एकीकरण किया जाए। दोनों का एक ही प्रधानाध्यापक हो। उन्होंने का कहा कि सरकार निजी स्कूलों की मनमानी पर भी रोक लगाये।
सचिव ने जब जतायी नराजगी तो शिक्षा विभाग के अफसरों ने दी ये सफाई
बैठक के दौरान केंद्रीय सचिव ने सरकारी के साथ निजी स्कूलों के छात्रों और शिक्षकों के आधार नामांकन की खराब स्थिति पर अपनी नाराजगी जाहिर की। जिसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने उन्हें बताया कि निजी स्कूल अपने छात्रों और शिक्षकों के आधार नामांकन का डाटा साझा नहीं करते हैं। इस पर उन्होंने शिक्षा विभाग को निजी स्कूलों के खिलाफ निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा-18 के तहत कार्यवाही करते हुए उनकी मान्यता रद करने का निर्देश दिया।
जिले स्तर पर नहीं होनी चाहिए शिक्षकों की नियुक्ति
उन्होंने कहा बेसिक शिक्षा परिषद के अधिकारियों को सुझाव देते हुए कहा कि परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती जिले स्तर पर नहीं होनी चाहिए। बल्कि उनकी तैनाती स्कूल में रिक्त स्थान के हिसाब से होनी चाहिए। सचिव ने ये भी कहा कि सरप्लस शिक्षकों की समस्या से निपटने के लिए कदम जल्द उठाना चाहिए।

68,5०० शिक्षकों की नियुक्ति ये अपनाये प्रक्रिया
सचिव ने अधिकारियों को सुझाव दिया कि 68,5०० सहायक अध्यापकों की जो भरती होने जा रही है। उनकी नियुक्ति जिले स्तर पर नहीं होनी चाहिए। बल्कि प्रदेश भर में जिन स्कूलों में पद खाली पड़े हैं उनको नियुक्ति उसी हिसाब से मिलनी चाहिए। इसके लिए अधिकारियों को विश्ोष तौर पर ध्यान देना होगा।
तबादला से पहले देख्ों कर्नाटक मॉडल
सचिव ने ये भी कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों का समायोजन और तबादले को कर्नाटक मॉडल को देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि तबादले के लिए हरियाणा मॉडल भी अपनाया गया है। शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया को हाईकोर्ट ने स्थगित कर दिया है। इस पर उन्होंने शिक्षकों के तबादले को कर्नाटक में प्रचलित व्यवस्था का अध्यनन करने की सलाह दी।
जहां निजी कॉलेज ज्यादा हो यहां इन सर्विस पर हो ट्रेनिंग
सचिव ने डॉयट स्तर पर शिक्षकों की होने वाली ट्रेनिंग को लेकर भी सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि जहां निजी कॉलेजों की संख्य ज्यादा है वहां वहां सिर्फ इन सर्विस ट्रेनिग दी जानी चाहिए। सचिव ने कहा कि जिन जिलों में निजी बीटीसी कॉलेजों की भरमार है, वहां के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) को प्री-सर्विस ट्रेनिग देने की बजाय सिर्फ सेवारत शिक्षकों को ही प्रशिक्षण देना चाहिए। इससे शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलेगी।

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