जाति व्यवस्था के भीतर रहकर निपष्क्षता से व्यवहार की कोई गुंजाइश नही-एमसी विमल

आज हम 69 वीं गणतंत्र दिवस के रूप में 26 जनवरी को तिरंगा फहरा चुके हैं। लेकिन फिर भी हमारा समाज जाति के बंधन से मुक्त नहीं हो सका है। जाति एक ऐसा विष है जो छुआछूत और भेदभाव को कम नहीं होने देर रहा है। चाइना और जापान व अमेरिका की प्रगति को देखते हुए आज हमें इस जाति बंधन पर गहरा विचार करना होगा तभी हम इनकी तरह विकास की लाइन में खड़े हो सकते हैं। ये कड़वा सत्य है जिसे स्वीकार करना ही होगा। हम जैसा की वर्तमान में देख पा रहे हैं कि कभी एक फिल्म को लेकर एक जाति के लोग सड़क पर आ जाते हैं तो कभी कभी तिरंगा फहराने को लेकर दो समुदाय भिड़ जाते हैं, इसी तरह से महाराष्ट हिंसा को भी देखा जा सकता है। ऐसे मामलों के आ जाने से विकास पर ग्रहण लग जाता है। विकास के मुद्दे से भी लोग भटक कर जातपात में उलझे रहते हैं। अब समय आ गया है कि हम सब इस पर मिलकर जनहित पूरे देशहित में विचार करें। 

हम इसी कठोर सत्य को लेकर हम एक ऐसी सिरीज शुरू कर रहे हैं जिसका मकसद किसी को ठेस पहुंचाना नहीं बल्कि देशहित में एक समानता लाने की छोटी सी पहल हो सके। हमें खुशी है कि देश के प्रधानमंत्री भी जातपात के विरुद्ध हैं

बाबा साहेब अंबेडकर के इस मराठी भाषण के कुछ अंश पर आपका ध्यानाकार्षण  

बोधिसत्व बाबा साहेब अंबेडकर यह भाषण बाबा साहेब अंबेेडकर ने येवला नगर में 13 अक्टूबर 1935 को मराठी में दिया था। जिसमें अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ो की मुक्ति कैसे होगी, के बारे में विस्तार से बताया गया है। यहां हम भाषण के प्रमुख अंशों को ही प्रकाशित कर रहे है। विस्तार से पढ़ने के लिए पाठक महाराष्ट्र सरकार द्बारा प्रकाशित मराठी खंड 18 उप खंड एक के पेज नंबर 482 से पढ़े। ये भाषण स्पृश्य और अपृश्य या सर्वण और अछूत (अंनुजाति, जनजाति) में भेदभाव क्यों ? संविधान के रहते क्या ये भेदभाव अब खत्म हो गया है ? अगर नहीं तो इस भेदभाव, छुआछूत यह अस्पृश्यता से छुटकारा कैसे मिले? यही इस भाषण का निचोड़ है। आशा है कि इसे पाठक पढ़कर अवश्य लाभान्वित होंगे।

तथ्य ऐसे, जिनका उल्लेख करने से दुख होता है-बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर

सरकारी पाठशालाओं में अपने बच्चों को पढ़ायी के लिए दाखिल करने का हक जताने के कारण, सार्वजनिक और सरकारी कुओं पर, तालाब और पनघट पर पानी भरने का हक जतान्ो के कारण, बारात घोड़े पर ले जाने पर हक जताने के कारण, जुलूस और मोर्चे निकालने का, सभा और सम्मेलन करने का हक जताने के कारण स्पृश्य हिन्दुओ द्बारा अछूत दलित वर्ग को मारपीट करने की घटनाएं सुबह से शाम तक हमेशा ही होते रहने के कारण ये दृश्य सबके आंखो के सामने है। किन्तु मारपीट करने के दूसरे भी और कई कारण है, जिनका उल्लेख करने पर भारत के बाहर के लोगो को भी उसका दुख होगा। अछूतों को कीमती और अच्छे कपड़े पहनने के कारण उन्हें अपृश्य हिन्दुओं द्बारा मारपीट किए जाने के असंख्य उदाहरण दिए जा सकते हैं। अछूतों द्बारा पानी भरने के लिए, तांबा और पीतल के बर्तन इस्तेमाल करने के कारण स्पृश्य हिन्दूओ द्बारा उन्हें मारपीट किए जाने की असंख्य घटनाएं दर्ज की जा सकती है। अछूतों को भूमि खरीदने के कारण स्पृश्य हिन्दुओं द्बारा उनके घर मकान जलाये जाने की असंख्य घटनाएं बतायी जा सकती है। अछूतों को जनेऊ पहनने के कारण स्पृश्य हिन्दुओं द्बारा उन्हें मारने पीटने की असंख्य घटनाएं हैं। मरे हुए जानवर न उठाने के कारण और मरे हुए जानवर का मांस खाने से इनकार करने के कारण स्पृश्य हिन्दुओं द्बारा उन्हें मारने पीटने के अनगिनत उदाहरण दिए जा सकते हैं। हिन्दू अछूतों को अपने गांव में जूता मोजा पहनकर गांव से भीतर से जाने के कारण, रास्ते में मिले स्पृश्य हिन्दुओं को झुककर सलाम नहीं करने के कारण, शौंच के लिए तांबे का लोटा ले जाने के कारण उनपर हिन्दु स्पृश्यों द्बारा अमानवीय जुल्म सितम ढाये जाने की दर्द भरी अनगिनत कहानियां हैं। अछूतो को अपने समाज के पंचो की पक्ंित में रोटी परोसने के कारण स्पृश्य हिन्दुओं के द्बारा उनकी पंगति का ही मटिया मेट करने की भी घटनाएं हैं।
उपरोक्त प्रकार के जुल्म और सितम स्पृश्य हिन्दुओ द्बारा अछूतों पर सदियों से हो रहे हैं। अब भी इस प्रकार के जुल्म होने की अनगिनत घटनाएं हैं। स्पृश्य हिन्दुओं के द्बारा अमानवीय व्यवहार करने की घटनाएं आपके सुनने में नहीं बल्कि, देखने और स्वयं भोगने में भी आयी होगी। जहां स्पृश्य हिन्दुओं द्बारा अछूतों को मारना पीटना संभव नहीं होगा, वहां उन्होंने आपके विरुद्ध बहिष्कार के हथियार कैसे इस्त्ोमाल किया, इसका भी आप लोगो को अच्छा खासा अनुभव होगा। स्पृश्य हिन्दु इस बात की पूरी कोशिश करते हैं , कि अछूतों को मजदूरी न मिलने पाये। आपके पशुओं को जंगल के भीतर से नहीं ले जाने दिया जाता, गांव में अछूतों को नहीं जाने दिया जाता। इस तरह स्पृश्य हिन्दुओं ने आप के लोगों को परेशान करने की घटनाएं आप मेंसे अधिकांश लोगों को मालूम होगा ही। किन्तु इस तरह के अन्याय अपने समाज के लोगों पर क्यों होते है्? इसकी जड़ में ऐसे कौन से कारण है? ऐसा कौन सा रहस्य छुपा हुआ है इस बात को आप में से बहुत ही कम लोगो ंने समझा होगा। किन्तु मेरी दृष्टि में इस बात को समझ लेना, उसको जानना बहुत आवश्यक है।

कम्रश: …

एमसी विमल
बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर पर विचारक एवं वारिष्ठ लेखक
9415793577

नोट- सिरीज शुरू करने के साथ-साथ ऐसे जो वाक्य हो चुके हैं उनको भी रखना है जरूरी है।

 

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