बीबीएयू के दीक्षांत में राष्ट्रपति ने मेधावियों को किया सम्मानित, लखनऊ के विषय में ताजा की यादें

लखनऊ। डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) का दीक्षांत समारोह शुक्रवार को मनाया गया। इस मौके पर कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रपति रामनाथ कोविद जी ने मेधावियों को सम्मानित करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। इस दौरान उन्होंने एक छात्रा और तीन छात्रों को अपने हाथों से गोल्ड मेडल प्रदान किया। दीक्षांत समारोह के मौके पर राष्ट्रपति की पत्नी सविता कोविद, न्यायधीश प्रमोद कोहली गवर्नर राम नाईक, प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन, यूजीसी के चेयरमैन वीएस चौहान भी मौजूद रहे।
इस मौके पर मेधावियों को प्रेरणा साथ उनका हौसला बढ़ाते हुए राष्ट्रपति राननाथ कोविंद ने कहा कि हमें अगर आगे बढ़ना है तो एक लक्ष्य का निर्धारण जरूर करना होगा। उन्होंने खुद का विकास करने के साथ-साथ बहुत तरक्की के लिए कोई सरकारी नौकरी की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने मेधावियों को उदाहरण देते हुए कहा कि व्हाट्सऐप आज के लिए सबसे बड़ा उदाहरण है जिससे ये समझा जा सकता है कि एक दिन ऐसा भी था जब व्हाट्सेप निर्माता जेन कूम को कोई फेसबुक सहित तमाम कंपनियों ने नौकरी देने से मना कर दिया था। उसके बाद जेनकूम ने एक लक्ष्य निर्धारण कर व्हाट्सऐप जैसे मैंसेजर ऐप का निर्माण किया जो कि इतने कम समय में प्रचलित सभी जगह प्रचलित है और उसकी बोली फेसबुक ने ही सबसे ऊंची बोली लगायी थी। इसलिए हमें भी सेल्फमेड बनना होगा।

बाबा साहेब के सपनों के भी आगे निकल चुकी हैं बेटियां
इस दौरान राष्ट्रपति श्री कोविंद ने यह भी कहा कि हमारी बेटियां आज बाबा साहेब के सपनों से भी आगे निकल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि बेटियां आज जिस तरह से नई नई ऊंचाईयां छू रही हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों को भी स्वरोजगार की ओर अधिक सोचना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि विज्ञान और तकनीक की दुनियां में काम करना अभी भी बहुत कुछ बाकी है।

                                                             लखनऊ की तहजीब को सीख ले सभी तो खत्म हो जायेगी देश की समस्या
लखनऊ। दीक्षांत में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने लखनऊ की आबो हवा की जमकर तारीफ की। इस दौरान उन्होंने कहा कि लखनऊ में जो पहले आप पहले आप की तहजीब है उसे अगर पूरा देश सीख ले सारी समस्या अपने आप समाप्त जायेगी। इस दौरान उन्होंने दीक्षांत में उपस्थित सभी लोगों को बधाई देते हुए कहा कि लखनऊ में आप की तहजीब उसकी लखनऊ की विरासत है। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माता बाबा साहेब का भी लखनऊ से काफी पुराना नाता रहा है। उन्होंने कहा कि यहां पर बाबा साहेब को दीक्षा प्रदान करने वाले भदंत प्रज्ञानंद ने अपना काफी समय बिताया है।
लखनऊ आकर मेैं बेहद खुश हुआ
राष्ट्रपति ने कहा कि डा. अंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समरोह में मुख्य अतिथि के रूप में आने का जिस तरह से मौका मिला उससे मुझे आपार खुशी हुई है। उन्होंने कहा कि एक समय था जब 2००2-०3 में बीबीएयू के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट का मेंबर भी रहा हूं।
बाबा साहेब और अटल बिहारी बाजपेयी को एक साथ याद करने का मिला मौका
राष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में दो सभागार बने हैं जिसमें एक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर बना है तो दूसरा डा. भीमराव अंबेडकर के नाम पर बना है। ऐसे में दोनो ही महान व्यक्तियों को एक साथ याद करने का मौका मिला ये मेरे लिए अधिक प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने जहां देश को एक नई दिशा दी वहीं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री रहते देश में अपने व्यक्तित्व की छाप छोड़ी।
राष्ट्रपति ने कहा कि सुषमा और नीलू ने छू लिया मेरा मन
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने बेटियों की कई बार तारीफ की। इस दौरान उन्होंने कहा कि बीबीएयू से ही महज 17 साल की उम्र में सुषमा वर्मा पीएचडी कर रही हैं जो एक अपने में बड़ी बात है। इसी तरह से नीलू शर्मा को टेलीविजन फॉर इनवायरमेंट की फिल्म फॉर चेंज फेलोशिप लंदन मिला है। इन दोनो बेटियों ने एक अलग छाप छोड़ी है जो कभी मन से कभी भुलायी नहीं जा सकती है।

दीक्षांत का मतलब कि समाप्त हुई किताबी पढ़ाई-राज्यपाल

लखनऊ। दीक्षांत समारोह के मौके पर उपस्थित राज्यपाल राम नईक ने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समारोह का एक महात्वपूर्ण समय होता है। उन्होंने कहा कि दीक्षांत का मतलब कि अब किताबी पढ़ाई समाप्त हो गयी है और अब जीवन की लड़ाई शुरू हुई है। उन्होंने कहा कि हमें इस जीवन की लड़ाई में इस बात का जरूर ध्यान रखना होगा कि माता पिता और गुरुजनों का हमेशा सम्मान करते रहना होगा। उन्होंने कहा माता पिता और गुरुजन ही आपको जीवन को आगे रास्ता दिखाते हैं और हौसले को बढ़ाते हैं। जिससे हमारा विकास होता है और अपने जीवन को सफल बनाने में इनका बहुत योगदान रहता है। उन्होंने यह भी कहा कि अच्छी सफलता के लिए कड़ी मेहनत की बहुत जरूरी होती है। जिसके लिए हमें निरंतर प्रसास करते रहना होगा, जो हिम्मत नहीं हारता वही जीवन में आगे बढ़ता है।
बेटियां यहां भी रही अव्वल इस बात की हमें खुशी है- राज्यपाल
राज्यपाल ने कहा कि अभी तक जहां भी विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समारोह आयोजित हुए वहां पर मेडल पर बेटियों का लड़कों की अपेक्षा अधिक कब्जा रहा है। इसी क्रम में बीबीएयू में भी बेटियां आगे हैं मुझे यह जानकर बेहद खुशी है। उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी पास हुए हैं उनमें लड़कियां ज्यादा हैं। लड़कियां पढ़ने के लिए लड़कों से ज्यादा आगे आ रही हैं। 192 पदक में लड़कों को 7० पदक मिले हैं, जबकि 122 पदक लड़कों को मिले हैं।
इनको राष्ट्रपति ने अपने हाथों से दिया गोल्ड मेडल
-ऋचा वर्मा- 2०17 बैच- एमएससी इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी- 9०.83 प्रतिशत
-मंजेश कुमार- 2०17 बैच- एमएससी एम्प्लॉयड मैथमेटिक्स- 89.38 प्रतिशत
-विकास चौरसिया- 2०16 बैच- एमएससी एम्प्लॉयड मैथमेटिक्स- 94.69 प्रतिशत
-महेंद्र- 2०16 बैच एमएससी एम्प्लॉयड मैथमेटिक्स- 89.०6 प्रतिशत
इसी तरह से कुल 21० छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल और 2 हजार छात्र-छात्राओं को डिग्रियां प्राप्त हुई।

एडीजी की पत्नी डा. रश्मि को मिली पीएचडी की उपाधि

लखनऊ। डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में आयोजित दीक्षांत समारोह के दौरान अपर पुलिस महानिदेशक डा. संजय तराडे की पत्नी रश्मि संजय तराडे को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गयी। ये उपाधि विवि के कुलपति प्रो. आरसी सोबती ने अपने हाथों से उन्हें प्रदान की है। डा. रश्मि संजय तराडे को इनफार्मेशन सांइस एंड टेक्नोलॉजी की उपाधि प्रदान की गयी है। इस मौके पर उपस्थित डा. संजय तराडे ने डिग्री मिलने के बाद अपनी पत्नी डा. रश्मि को बधाई भी दी।

कार्यक्रम में नहीं पहुंचे मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दीक्षांत समारोह के मौके पर नहीं पहुंचे। जबकि इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बीबीएयू की ओर से उन्हें भी न्योता भ्ोजा गया था। मुख्यमंत्री राष्टपति को एयरपोर्ट से लेने के बाद बौद्ध भिक्षु प्रज्ञानंद को श्रद्धाजंलि अर्पित करने तक तो साथ रहे लेकिन उसके बाद वे बीबीएयू के कार्यक्रम में नहीं शामिल हुए।

अंबेडकर भवन के उद्घाटन के दौरान फेल हुआ पर्दा
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अंबेडकर भवन का उद्घाटन भी किया। लेकिन इस दौरान रिमोट फेल हो गया जिसके बाद पर्दे को हाथ से खीचना पड़ा। तब जाकर उद्घाटन हो सका।

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