भाग-3-सामर्थ्य के बिना आपका विकास संभव नहीं -एमसी विमल

समाज में किसी भी वर्ग को आगे बढने के लिए सामर्थ्य की जरूरत होती है। इसी तरह से छुआछूत का शिकार अछूत वर्ग को भी ये समझना होगा उनका सामर्थ्य कितना है ? सामर्थ्य धन, बल और शिक्षा के स्तर को भी देखना होगा। इसी तरह से हमने जो अभी तक सिरीज दी है उसमें हमने जाति और छुआछूत पर प्रकाश डाला है। अब हम सामर्थ्य को लेकर बात कर रहे हैं। जिसका एक बडा उदहारण भी पेश कर रहे हैं। ये उदाहरण बाबा साहेब अंबेडकर की पुस्तक मुक्ति कौन पथे ( हमारी मुक्ति का मार्ग क्या है) से लिया गया है  हालांकि ये विचार बाबा साहब अंबेडकर ने 1935 में दिए थे तब से अबके विचारों कितना बदलाव आया है ये देखने वाली बात है।

 भाग 2- छुआछूत की समस्या ही वर्ग कलह है-एमसी विमल-February 3, 2018

           भाग 1- जाति व्यवस्था के भीतर रहकर निपष्क्षता से व्यवहार की कोई गुंजाइश नही-27 jan,2018

अब इसके आगे की प्रस्तुति

                                          आपका ही छल क्यों होता है।

  • सामर्थ्य आपको किस प्रकार से प्राप्त होगा यही सचमुच महात्वपूर्ण प्रश्न है और इस पर आपको गंभीरता से विचार करना होगा
  • आप लोगों की लाचार अवस्था के कारण ही लोग आप पर जुल्म और अन्याय करते हैं-बाबा साहब अंबेडकर

आपकी दशा का वास्ताविक वर्णन जो मैने प्रस्तुत किया है, यदि वह सच है, तब उससे निकलने वाले निष्कर्ष को आप सभी को स्वीकार करना होगा। और यह है कि यदि आप, अपने सामर्थ्य पर निर्भर रहेंगे तो इस अत्याचार का प्रतिकार नहीं कर सकते। आपमें सामर्थ्य का आभाव होने के कारण ही आप पर अन्याय अत्याचार होता आया है, इसमें मुझे कोई संदेह नहीं है।

इस क्षेत्र में केवल आप ही अल्पसंख्या में हो ऐसी बात नहीं है। आपकी तरह ही मुसलमान भी अल्पसंख्या में हैं। जिस तरह म्हार मांग जाति के लोगों के दो चार मकान गांव में होते हैं, उसी तरह मुसलमानों के भी एक दो मकान गांव में होते हैं परंतु उन मुसलमानों को कोई छेडता नहीं है। लेकिन आप लोगों पर अत्याचार होता रहता है, इसकी क्या वजह है ? मुसलमानों के दो मकान होने पर भी उन्हें गांव का कोई भी आदमी छेडता नहीं। परंतु आपकी जाति के दस मकान होने पर भी, गांव के लोग आप लोगों का हर तरह से परेशान करते हैं, ऐसा क्यों होता ? ये प्रश्न बहुत ही महात्वपूर्ण और उसकी खोज आप लोगों को अच्छी तरह से करनी चाहिए । मेरी दृष्टि से इस प्रश्न का एक ही उत्तर है, वह यह है कि दो मुसलमानों के मकान के सरंक्षण में संपूर्ण भारत के मुसलमानों के शक्ति तथा सामर्थ्य है, ये बात हिन्दू लोग अच्छी तरह से जानते हैं, और इसलिए उन दो मुसलमानों के मकानों से छेडखानी करने की कोई भी हिन्दू हिम्मत जुटा नहीं पाता है। उन दो मुसलमानों के मकानों को यदि कोई नुकसान या ठेस पहुंचती है तो पंजाब से लेकर तमिलनाडू तक का मुसलमान अपनी संपूर्ण शक्ति से उन पीडित मुसलानों की रक्षा के लिए जुट जायेगा, इस तरह का आत्म विश्वास उनमें होने के कारण वे मुसलमान अपने मकानों में निर्भयता से जीवन यापन करते है। लेकिन आपके विषय में हिन्दू लोगों को मालूम है कि आपकी कोई भी सहायता नहीं करेगा। आप लोगों के लिए कोई भी दौडकर सहायता के लिए नहीं आयेगा, आपको पैसे की भी कोई सहायता नहीं करेगा। और अधिकारी वर्ग की भी आपको सहायता नहीं मिल पायेगी। तहसीलदार, पुलिस आदि उन्हीं लोगों की होने के कारण छूत अछूतों के संघर्षमय व जाति विशेष के पक्षधर हो जाते हैं, वह अधिकारी अपने कर्तव्य का पालन नहीं करते हैं, इस बात का पक्का विश्वास उन्हें होता है। आप लोगों की लाचार अवस्था के कारण ही हिन्दू लोग आप पर जुल्म और अन्याय करते हैं।
यहां तक का मैने जो भी स्पष्टीकरण दिया है उससे दो बातें साफ हो जाती है उनमें से एक बात ये है कि बगैर सामथ्र्य के आपके इस अन्याय अत्याचार का प्रतिकार नहीं कर सकते। दूसरी बात ये है कि आज प्रतिकार करने हेतू आवश्यक सामथ्र्य आपके पास नहीं हैं। इन दोनो बातों के स्पष्ट हो जाने से तीसरी बात अपने आपमें स्पष्ट होती है कि आपको आवश्यक सामथ्र्य कहीं बाहर से प्राप्त करना होगा। ये सामर्थ्य आपको किस प्रकार से प्राप्त होगा यही सचमुच महात्वपूर्ण प्रश्न है और इस पर आपको गंभीरता से विचार करना होगा।
बाहर से सामर्थ्य प्राप्त करना चाहिए

आज भी यह देश जातिभेद और धर्मभेद की चपेट में है। ऐसा दिखता है कि इस देश में दुःख दरिद्रता और कलेश के विषय में किसी को भी खेद नहीं है, और यदि होगा भी तो वह उनके निवारण हेतु कोई भी प्रयास करते नहीं। लेकिन अपने धर्म बन्धुओ पर अथवा जातियों पर कोई दुख सकंट की घडी आती है तब उनपर किसी तरह का अत्याचार हुआ तब वह लोग उन्हें हर प्रकार से सहायता देते हैं। यह नैतिकता की दृष्टि से कितना भी बुरा हो परंतु वह जारी है। इसे हमें नहीं भुलाना चाहिए। जिस किसी गांव में अछूत लोगों पर हिन्दुओं द्वारा अत्याचार किया जाता है, उस गांव में अन्य धर्मों के लोग नहीं बसते, ऐसी बात नहीं है। अछूतों पर हो रहा अत्याचार अन्यायकारी है, यह बात उनके मन को ठेस नहीं पहुंचाती, ऐसी भी बात नहीं है। लेकिन अछूतों पर अन्याय हो रहा है, यह जानते हुए भी वह उनकी सहायता के लिए उठ खडे नही होते। इसकी कौन सी वजह है ? आप लोग हमारी सहायता क्यों नहीं करते ? यदि ऐसा प्रश्न हम उनसे करें तो वह कहते हैं कि, आप लोगों के आपसी विवाद में हम क्यों पडे ? यदि आप हमारे धर्म को मानने वालों में से होते तो हम आपकी सहायता जरूर करते। इस तरह का उत्तर वह आपको देते हैं। इससे यह बात आपको स्पष्ट हो जायेगी कि अन्य किसी समाज से नाते रिश्ते जोडे बगैर अन्य धर्म में सम्मिलत हुए बगैर आप लोगों को बाहरी सामर्थ्य प्राप्त नहीं हो सकती। इसका सीधा स्पष्ट आसय यह है कि आप लोगों को धर्म परिवर्तन कर किसी अन्य समाज में शामिल होना होगा। उसके बगैर आप लोगों को उस समाज का सामर्थ्य प्राप्त नहीं मिलेगा, और जबतक आपके पास सामथ्र्य नहीं है, तबतक आपको और आपकी आने वाली पीढी की आज की लाचारी की स्थिति में ही जीना होगा।
क्रमश…………………………….

लेखक एमसी विमल द्बारा बाबा साहब डा. भीमराव अंबेडकर के भाषण मुक्ति कौन पथे से लिया गया है।

नोट- हमारा किसी भी वर्ग विशेष को ठेस पहुचाने का मकसद नहीं है। हमारा प्रयास भारत की एकता और अखंडता बनी रहे, के लिए ही एक छोटा सा प्रयास है।

 

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