आपदा में अवसर: लखनऊ में रिफाइंड व कड़वे ऑयल को बेचा जा रहा मंहगे दामों में

आमजनों के खाने पीने में चीजों में खाने वाले तेलों का भी बहुत बड़ा स्थान होता है, लखनऊ में हालात ऐसे हो गये हैं रिफाइंड ऑयल दोगुने दामों में बेचा जा रहा है। जो फाच्र्यून का रिफाइंड ऑयल कोरोना से पहले 90 से 95 रूपए प्रति लीटर मिलता था वह वह फुटकर में अब 155 से 160 रूपए लीटर में बेचा जा रहा है। इस तरह रेट तय करके बेचने वालों पर कार्रवाई भी नहीं हो रही है।
पहले ऐसी उम्मीद जताई जा रही थी कि खाद्य तेलों (Edible oil) पर आई तेजी मार्च-अप्रैल में कम हो जाएगी; मतलब होली या उसके बाद सरसों (Mustard Oil) और रिफाइंड तेल सस्ते की जगह और मंहगे होते चले जा रहे हैं। वहीं पाम ऑयल महंगे होने के बाद सरसों और रिफाइंड तेल (Refined Oil) महंगे होते जा रहे हैं। पाम ऑयल 90 से 95 रुपये लीटर तक आ गया था, वहीं अब 130 रुपये लीटर बिक रहा है।

जबकि कुछ समय पहले केन्द्र सरकार ने पाम ऑयल (Pam Oil) पर से 10 फीसद इंपोर्ट डयूटी कम कर दी थी। जब तक आम पब्लिक को पाम ऑयल के रेट कम होने का फायदा मिल पाता एक बार फिर पाम ऑयल महंगा हो गया।

ऐसे बिगड़ा सरसों और रिफाइंड तेल का खेल
राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर की मानें तो आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2 फरवरी 2021 से क्रूड पाम तेल (सीपीओ) पर मूल आयात शुल्क 15 फीसद और कृषि विकास सेस 17.50 फीसद लागू हुआ है, जिससे यह 32.50 फीसद हो गया इस पर 10 फीसद का समाज कल्याण सेस लगा जो 3.25 फीसद होता है। इसे मिलाकर कुल वास्तविक आयात शुल्क 35.75 फीसद हो जाएगा। इससे पूर्व सीपीओ पर 27.50 फीसद के मूल आयात शुल्क और इस पर 10 फीसद के सेस के साथ कुल 30.25 फीसद का सीमा शुल्क लग रहा था. 10 फीसद का समाज कल्याण सेस सभी खाद्य तेलों के आयात पर बरकरार रखा गया है जबकि कृषि विकास सेस नए सिरे से लगाया गया है।

आर.बी.डी पामोलीन पर तथा रिफाइंड पाम तेल पर कृषि विकास सेस नहीं लगा है. इन दोनों पर 45-54 फीसद का मूल आयात शुल्क और 10 फीसद का सेस पहले की तरह से लागू रहेगा। क्रूड सोयाबीन तेल पर मूल आयात शुल्क को 35 फीसद से घटाकर 15 फीसद नियत किया गया है जबकि 20 फीसद का कृषि विकास सेस लगाया गया है।

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