नये सिग्नल सिस्टम से नहीं होंगे रेल हादसे, रेलवे ने की ये तैयारी

नई दिल्ली। रेल हादसे में हर साल भारी नुकसान उठाने के बाद अब रेलवे ने एक नया कदम उठाने की तैयारी कर ली है। रेलवे की ओर से जल्द ही नया सिग्नल सिस्टम लांच कर दिया जायेगा। इससे कोहरे व अन्य तमाम कारणों से होने वाली रेल दुर्घटनाओं से निजात मिल जायेगी। रेलवे के एक और फैसले से प्रदूषण भी कम होगा। रेलवे अगले पांच सालों में डीजल इंजनों को विदा करने जा रहा है। अक्सर उत्तर भारत में सर्दियों के वक्त काफी घना कोहरा पड़ता है। इस दौरान पटरी पर खड़ी ट्रेन को दूर से पीछे से आ रही ट्रेन के ड्राइवर को नहीं दिखती है। ऐसे में टक्कर हो जाती है। अब ट्रेनों की टक्कर न हो, इसके लिए सभी प्रमुख रूटों पर सिग्नल प्रणाली को मैन्युल तरीके से हटाकर के ऑटोमेटिक किया जा रहा है। रेलवे के अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक रेलवे अपने ट्रैक पर सेंसर प्रणाली का इस्तेमाल करने जा रही है, जिससे सिग्नल, ट्रैक सर्किट, एक्सल काउंटर और इंटरलॉकिग व पॉवर सप्लाई सिस्टम को आसानी से मॉनिटर किया जाएगा। सिस्टम सभी प्रकार के डाटा को इकठ्ठा करके एक सेंट्रल सर्वर पर भेजेगा, जिससे रियल टाइम पर परेशानी का समाधान किया जा सकेगा। फिलहाल इसका ट्रायल गाजियाबाद-हावड़ा सेक्शन के पांच खंडों पर शुरू किया जाएगा। वहीं इस बारे में रेल मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि अगले पांच सालों में डीजल इंजन पूरी तरह से इतिहास बन जाएंगे। वो सभी रूट जहां पर अभी डीजल इंजन का प्रयोग होता है उनको इलेक्ट्रीफाई कर दिया जाएगा। इससे रेलवे को सालाना 1०5०० करोड़ रुपये की बचत होगी। डीजल इंजन की जगह केवल बिजली के इंजन का ऑपरेशन के लिए प्रयोग किया जाएगा। डीजल इंजन का इस्तेमाल केवल बैकअप के लिए किया जाएगा।

 

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