जानिए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और उन जजों के बारे में जिन्होंने देश को सोचने पर मजबूर कर दिया

न्यूज डेस्क। सुप्रीम कोर्ट में सब कुछ सही नहीं चल रहा है? प्रशासन ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है और इंडिया चीफ जस्टिस हमारी सुनते नहीं हैं, उनको हमने मनाने की भी कोशिश की लेकिन हमारी बात नहीं बनी तो हमें आज मीडिया का सहारा लेना पड़ा। ताकि कल को कोई हमको लेकर सवाल न उठा पाये। ऐसे कई गंभीर आरोप मीडिया के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने इंडिया चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर लगाये हैं। आगे ये मामला किस तरह से निपटेगा ये सरकार या न्यायपालिका ही तय करेगी। लेकिन इस दौरान इंडिया न्यूज टाइम्स डॉट इन आपको चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के बारे में बता रहा है। साथ उन जजों के बारे भी एक नजर जिन्होंने आरोप लगाते हुए एक तरह से शुक्रवार को पूरे भारत को हिला दिया।

नाम-चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा
-जन्म 3 अक्टूबर 1953 को हुआ था।
-14 फरवरी 196 में उड़ीसा हाईकोर्ट में वकालत शुरू की।
-इसी के बाद मध्यप्रदेश हाई कोर्ट उनका ट्रांसफर हुआ।
-2००9 के दिसंबर में पटना हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया।
-24 मई 2०1० में दिल्ली हाई कोर्ट में बतौर चीफ जस्टिस उनका ट्रांसफर हुआ।
-1० अक्टूबर 2०11 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया।

                                  इन फैसलों के दौरान रहे चर्चा में

1-मुबंई ब्लास्ट के दोषी याकूब मेमन के मामले में आजाद भारत में पहली बार सुप्रीम कोर्ट में रात भर सुनवाई चली थी। सुप्रीम कोर्ट में रात के वक्त सुनवाई करने वाली बेंच की अगुवाई जस्टिस दीपक मिश्रा ने ही की थी और दोनों पक्षों की दलील के बाद याकूब की अर्जी खारिज की गई थी और फिर तड़के उसे फांसी दी गई थी।

2-जस्टिस दीपक मिश्रा का ये भी था एक बड़ा फैसला
इन्होंने मानहानि को लेकर कानूनी प्रावधान के संवैधानिक वैधता को सही ठहराया था। ये फैसला 3 मई 2०17 का था। तब इन्होंने कहा कि विचार अभिव्यक्ति का अधिकार असीमित नहीं है।

3-सिनेमा घरो में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान शुरू कराया जाना
जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने 3० नवंबर 2०16 कहा था कि पूरे देश में सिनेमा घरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान चलाया जाए ये भी कहा था राष्ट्रगान के सम्मान में ये जरूरी है।

4-निर्भया केस में तीनों दोषियों की फंसी बरकरार रखी
बहुचर्चित निर्भया गैंग रेप केस में तीनों दोषियों की फांसी की सजा को जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने बरकरार रखा था। ये फैसला इसी साल 5 मई लिया गया था।

5-दिल्ली पुलिस को भी दिया था सख्त आदेश
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने दिल्ली पुलिस को भी एक सख्त आदेश जारी किया था। कि वह एफआईआर दर्ज करने के 24 घंटे बाद उसे वेबसाइट पर अपलोड करे।

जानिए उन जजों के बारे में जिन्होंने चीफ जस्टिस को सवालों के कटघरे में खड़ा किया।

जज नम्बर एक
नाम- जस्टिस चेलामेश्वर
जन्म-23 जून 1953 को आंध्र प्रदेश में
-1997 में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के जज बने थे।
-2००7 में गुवाहाटी हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया।
– 2०1० में वह केरल हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बने
-2० अक्टूबर 2०11 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया।

जज नंबर दो
नाम-जस्टिस रंजन गोगोई
जन्म-18 नवंबर 1954 को
– गुवाहाटी हाई कोर्ट में ही अधिकांश प्रैक्टिस की
– साल 2००1 में गुवाहाटी हाई कोर्ट में परमानेंट जज नियुक्त किया गया। -2०1० में ट्रांसफर हरियाणा हाईकोर्ट किया
-23 अप्रैल 2०12 को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया गया।

जज नम्बर 3
नाम- जस्टिस मदन भीमराव लोकुर
-4 जून 2०12 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने
-साल 1974 में दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से स्नातक किया
-गुवाहाटी और आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके हैं।

जज नम्बर चार
नाम-जस्टिस कुरियन जोसेफ
जन्म 3० नवंबर 1953
-दो बार केरल हाई कोर्ट के कार्यकारी चीफ जस्टिस रह चुके हैं।
-2०13 में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस रहे हैं।
-8 मार्च 2०13 को वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने।
अब 3० नवंबर 2०18 को सेवानिवृत्त हो जायेंगे।

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