यूपी के विश्वविद्यालयों में विवादों के निपटारे के लिए राज्यपाल ने उठाया कदम, सीएम को भेजी रिपोर्ट, न्यायाधिकरण के गठन के निर्देश

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने बताया कि राजभवन की ओर से गठित एक कमेटी ने महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु एवं गुजरात के विश्वविद्यालयों का अध्ययन कर विभिन्न प्रशासनिक सुधारों पर अपनी रिपोर्ट तैयार की है। उन्होंने बताया कि प्रमुख सचिव जूथिका पाटणकर, ओएसडी शिक्षा राजवीर सिंह राठौड़ एवं ओएसडी आईटी सुदीप बनर्जी की एक तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी।
राज्यपाल राम नाईक ने सोमवार को राजभवन में प्रेसवार्ता में बताया कि उच्च शिक्षा में सुधारों पर राजभवन की ओर से गठित कमेटी ने सुझाव दिया है कि विश्वविद्यालयों में विवादों के निस्तारण के लिए न्यायाधिकरण का गठन किया जाए। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में आंकड़ों सहित बताया है कि 2013 में जहां कुलाधिपति कार्यालय तक उच्च शिक्षा से जुड़े 56 मुकदमे साल में आए थे वहीं 2016 में यह संख्या बढक़र 109 पहुंच गई। कमेटी की रिपोर्ट राज्यपाल राम नाईक ने सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेज दी है। राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने सरकार को रिपोर्ट इस उम्मीद से भेजी है कि शासन समयबद्ध ढंग से इन पर निर्णय करें। कुछ मामलों में अधिनियम में संशोधन की जरूरत होगी, जबकि कुछ प्रकरण अधिसूचना एवं शासनादेश के जरिए ही अमल में लाए जा सकते हैं।

यह हैं सुझाव

-विवादों के समाधान को न्यायाधिकरण बने या कुलाधिपति कार्यालय को और ताकत मिले।
– कुलपति के लिए शैक्षिक अर्हता, शोध, अनुभव का स्पष्ट प्रावधान हो।
– कुलपति के लिए बनने वाली सर्च कमेटी के सदस्यों की भी अर्हता तय हो, यथासंभव शिक्षाविद हों।
– सर्च कमेटी की प्रक्रिया एवं समय सीमा का भी प्रावधान हो।
– कुलपति पद की सेवा शर्तें एवं अनुशासनात्मक कार्यवाही की प्रक्रिया का प्रावधान हो।
– विवि में प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति का अधिकार कुलपति का हो या नियत समय के लिए कुलपति की सहमति से शासन नियुक्त करे।
विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक मसलों में शासन का हस्तक्षेप सीमित हो।
– स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षक-कर्मचारियों की सेवा शर्तें विवि अधिनियम का हिस्सा हों।
– कार्यपरिषद एवं विवि सभा में नामित जनप्रतिनिधि शिक्षा क्षेत्र से हों।
– प्रवेश से लेकर डिग्री तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन बनाई जाए।
– नैक मूल्यांकन आवश्यक और शासन से वित्तीय सहायता की अनिवार्य शर्त हो।

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