किस केस में कौन करेगा सुनवाई, चीफ जस्टिस ही तय करेंगे-SC

New Delhi। किस केस में कौन सुनवाई करेगा यह तय करने का अधिकार चीफ जस्टिस को ही होगा। लेकिन कानून से बढ़कर कोई नहीं है। यह बात सुप्रीम कोर्ट ने उस समय कही जब वह मंगलवार को जजों के नाम रिश्वतखोरी के आरोप मामले में एसआईटी से जांच किए जाने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह के आरोपों को अपमानजनक बताया। साथ ही यह भी कहा कि न्यायपालिका को जो नुकसान पहुंचना था, वह तो पहुंच चुका है अब इसकी गरिमा और प्रतिष्ठा के लिए हम सभी एकजुट होकर काम करें। जस्टिस आरके अग्रवाल की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मंगलवार को अपने फैसले में कहा कि इस तरह की याचिका से न्यायपालिका की गरिमा को नुकसान पहुंचा है और लोग बेवजह न्यायपालिका की निष्ठा को संदेह की नजर से देख रहे हैं। पीठ ने याचिकाकर्ता वकील कामिनी जायसवाल और वकील प्रशांत भूषण के प्रयासों को ‘फोरम शॉपिग’ करार दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह न्यायालय की अवमानना का मामला है, लेकिन यह उम्मीद करते हुए कि जायसवाल और भूषण भविष्य में इस तरह की याचिकाएं दायर नहीं करेंगे, पीठ ने उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने से इनकार कर दिया। दरअसल वकील कामिनी जायसवाल की याचिका में आरोप लगाया गया था कि लखनऊ के प्रसाद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज का लाइसेंस बहाल कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट के जजों के नाम पर रिश्वत ली गई थी। इस मामले में सीबीआई ने ओडिशा हाईकोर्ट के पूर्व जज इशरत मसरूर कुद्दुसी सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया था।

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