कॉलेज और छात्रा की लड़ाई में शामली के डीएम पर गिरी गाज

  • -सूचना आयुक्त ने डीएम शामली पर लगाया  दस हजार जुर्माना
  • -सेंट आरसी कॉलेज ने छात्रा से 44 हजार रुपए भी लिए और अभिलेख भी नहीं दिए, डीएम ने भी कार्रवाई में बरती लापरवाही

लखनऊ। जनपद शामली में एक कॉलेज और छात्रा के बीच चल रही लड़ाई में डीएम साहब को सूचना आयुक्त की कार्रवाई का सामना करना पड़ा, और उन पर दस हजार का जुर्माना लगा दिया गया। छात्रा ने कॉलेज की मनमानी पर डीएम को प्रार्थना पत्र देकर कॉलेज प्रबंधन पर कार्रवाई की मांग की तो उसके प्रार्थना पत्र का ही दबा दिया गया। छात्रा ने जब डीएम से इस बारे में जवाब मांगा तो उसे जवाब भी नहीं दिया गया। अंत में छात्रा अपना जवाब पाने के लिए डीएम के खिलाफ आरटीआई डाल दी।

 इस तरह से शुरू हुआ मामला

मुजफ्फरनगर निवासी नेहा वर्मा ने 26 अक्टूबर 2०16 को जिलाधिकारी, शामली को एक आवेदन-पत्र देकर दिनांक 15 सितंबर 2०16 के प्रार्थना-पत्र पर हुई कार्यवाही के सम्बन्ध में पूछा था, जिसमें उन्होंने जिलाधिकारी, शामली से शिकायत की थी कि सेंट आरसी कॉलेज ऑफ एजुकेशन द्बारा मेरे मूल अभिलेख व 44 हजार रुपया जमा किया गया था जो कि कॉलेज प्रबंधन वापस नहीं कर रहा है न ही मेरा दाखिला लिया है। जबकि नेहा ने बीटीसी छात्रा के रूप में कॉलेज में एडमिशन लिया था, लेकिन परीक्षा के समय उसे एडमिट कार्ड नहीं दिया गया, जिससे वह परीक्षा भी नहीं दे पायी। नेहा ने डीएम को बताया था कि कॉलेज प्रशासन से कई बार अनुरोध किया गया, लगातार आश्वासन दिया गया कि हम दूसरे समेस्टर की परीक्षा में साथ-साथ दोनों परीक्षाएं दिलवा देंगे तथा मूल अभिलेख पूछे जाने पर बताया कि इलाहाबाद वैरीफिकेशन के लिए भेजे गये है, ऐसे में न तो डाक्यूमेंट दिया और न ही दाखिला लिया। यहां तक फीस भी 44 हजार रुपए हड़प ली। इस बारे में डीएम ने क्या कार्रवाई की जब छात्रा नेहा ने जानना चाहा तो यहां से भी उसे निराशा हाथ लगी। फिर छात्रा ने आरटीआई का सहारा लिया।

सूचना आयोग के सामाने उपस्थित हुए डीएम शामली के प्रतिनिधि

सूचना आयुक्त ने नेहा के आवेदन के बाद पूरे मामले को जब संज्ञान लिया। तो डीएम शामली रामकुमार शर्मा को तलब किया। जिसके बाद उन्हें नोटिस जारी की गयी। लेकिन फिर भी नहीं आये तो दोबारा से नोटिस जारी कर उन पर दस हजार का जुर्माना लगा दिया गया है। जिसके बाद डीएम शामली के प्रतिनिधि रामकुमार शर्मा आयोग के सामने उपस्थित हुए और पूरी सूचना भी उन्हें देनी पड़ी। डीएम ने आयोग को सामने बताया कि छात्रा नेहा को मूल अभिलेख व उसकी फीस के 44 हजार रुपए कॉलेज की ओर से वापस करवा दिए गये हैं।

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