भूखे पेट और गरीबी ने उसे इतना तोड़ दिया है कि उसने मांग ली इच्‍छा मृत्यु

  • इलाज में सबकुछ गंवा चुके दिव्यांग सोनू का सहारा बना रोटी-कपड़ा बैंक फाउंडेशन

लखनऊ। गंभीर बीमारी के इलाज में एक पैर और एक हाथ सहित अपना सबकुछ गंवा चुके उन्नाव के बैगांव निवासी सोनू शुक्ला की मदद को रोटी कपड़ा फाउंडेशन ने हाथ बढ़ाया है। दाने-दाने का मोहताज सोनू और उसके परिवार की स्थित अत्यंत ही दयनीय हो चली है। बच्चों के भूखे पेट और गरीबी ने उसे इतनी बुरी तरह से तोड़ दिया है कि उसने बीते अक्तूबर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से इच्छा मृत्यु की गुहार लगाई डाली। भूख से बिलखते कलेजे के टुकड़ों का जीवन बचाने उसने बच्चों को इलाहाबाद के एक संस्थान में भेज दिया। जहां किस्मत ने एक बार फिर उसे छला। संस्थान में बच्चों की दुर्दशाा होने पर उन्हें वापस बुला लिया। चंद सालों पहले तक सोनू का परिवार सुखी और संपन्न था। विधवा मां, पत्नी सुनीता व तीन बच्चे, अर्चित नौ वर्ष, आर्यन छह वर्ष और निष्छल तीन वर्ष के साथ जीवन आराम से बसर हो रहा था। रोजगार के रूप में ािरडी में सोनू की पूजा सामाग्री और प्रसाद की जमी हुई दुकान थी। चार गाड़ियां थी। अचानक ही सोनू पर विपत्ति का पहाड़ टूटा, उसको पता चला कि वह आर्टरी थ्रम्बोसिस नामक असाध्य बीमारी के चपेट में है। बीमारी के चलते डाक्टरों ने सोनू का एक पैर काट दिया। इलाज में धीरे-धीरे सारे संसाधन खर्च हो गए। सोनू को अपने पैतृक गांव वापस आना पड़ा। बीमारी ने घर की एक-एक चीजंे बाजार में बिकवा डालीं पर बीमारी बढती ही गई। स्थिति यहां तक पहुची कि डाक्टरों ने सोनू के दूसरे पैर को भी काटने के लिए बोला है। कानपुर में सोनू का इलाज कर रहे डाक्टर नीरज को यह देखकर धक्का लगा कि सोनू और उसका परिवार पिछले तीन दिनों से भूखा है। डा. नीरज ने लखनऊ की संस्था रोटी-कपड़ा बैंक फाउंडेान के बारे में अखबारों में पढè रख था। उन्होनें संस्था संस्थापक संपर्क कर सोनू के बारे में बताया। जानकारी मिलते ही आशुतोष चौबे, संस्था की अध्यक्षा शोभा ठाकुर और सदस्य पुष्पा शर्मा सोनू की मदद को निकल पड़े।

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