हाथ न धोने के कारण लंबे समय तक अस्पताल में रहते हैं लोग-शीतल वर्मा

शीतल वर्मा असिसटेंट प्रोफेसर केजीएमयू डिपार्टमेंट ऑफ माइक्रोबॉयलॉजी

लखनऊ। एक ओर दुनिया भर में पांच मई को विश्व हाथ स्वच्छता दिवस मनाया जा रहा है। वहीं विभिन्न अध्ययनों में एक रिपोर्ट जो सामने निकल कर आयी है वह पूरी से चौका देने वाली है। अस्पतालों में अधिकांश मरीज सिर्फ हाथ न धोने के कारण लंबे समय तक अस्पताल में रहते हैं। इसबारे में जानकारी देते हुए केजीएमयू डिपार्टमेंट ऑफ माइक्रोबॉयलॉजी की असिसटेंट प्रोफेसर शीतल वर्मा कहती हैं कि अध्ययन में पाया गया है कि अस्पतालों में बहुत से ऐसे मरीज होते हैं जो सिर्फ अपने साफ हाथ न धो पाने के कारण लंबे समय तक अस्पताल में रहतें हैं। उन्होंने कहा ऐसे में मरीजों के उपचार की लागत बढ़ जाती है, विकृति, मृत्यु दर और बहु-दवा प्रतिरोधी (एमडीआर) रोगजनक संक्रमण में वृद्धि हुई है। कई अध्ययनों से पता चला है कि अधिकतर हेल्थकेयर प्रदाता अपने हाथों को पर्याप्त नहीं धोते हैं क्योंकि वे बहुत व्यस्त हैं, या पर्याप्त हाथ रगडऩे वाले हैंड सांइटिज़ेर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य देखभाल से जुड़े संक्रमण मरीजों, सरकारों, बीमा कंपनियों और नियामक निकायों से बढ़ते ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। नए आंकड़ों के मुताबिक, 25 रोगियों में से लगभग एक अस्पताल की देखभाल के दौरान स्वास्थ्य देखभाल से जुड़े संक्रमण प्राप्त करता है, जिसमें सालाना 722,000 संक्रमण शामिल होते हैं। इनमें से 75,000 रोगी अपने संक्रमण से मर जाते हैं। अधिकांश रोगाणु जो स्वास्थ्य देखभाल में गंभीर संक्रमण का कारण बनते हैं, वे लोगों के कार्यों से फैलते हैं। संक्रमण को रोकने के लिए हाथ स्वच्छता एक शानदार तरीका है। हालांकि, अध्ययनों से पता चलता है कि औसतन, हेल्थकेयर प्रदाता अपने हाथों को आधे से भी कम समय तक साफ करते हैं। यह स्वास्थ्य देखभाल से जुड़े संक्रमणों के प्रसार में योगदान देता है जो किसी भी दिन 25 अस्पताल के मरीजों में से 1 को प्रभावित करता है। प्रत्येक रोगी को संक्रमण होने का खतरा होता है जबकि उनका इलाज किसी और के लिए किया जा रहा है। यहां तक कि स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं को भी रोगियों के इलाज के दौरान संक्रमण होने का खतरा होता है।
स्वच्छता के पांच क्षणों का विशेष ध्यान देना जरूरी
हाथों की स्वच्छता के पांच क्षण हैं, रोगी संपर्क से पहले्र, असंतोष कार्य से पहले, शारीरिक द्रव एक्सपोजर के बाद, रोगी संपर्क के बाद और रोगी परिवेश के संपर्क के बाद। रोगी संपर्क रेंज के बाद हेल्थकेयर प्रदाता हाथों पर पाए गए जीव। हालांकि, प्रत्यक्ष रोगी संपर्क ही एकमात्र तरीका नहीं है हेल्थकेयर प्रदाता रोगी पर्यावरण में प्रदूषित सतहों को छूकर और नर्सों के स्टेशन पर प्रदूषित चार्ट को छूकर अपने हाथों पर बैक्टीरिया प्राप्त कर सकते हैं। मरीजों की संख्या और देखभाल की तीव्रता के आधार पर हेल्थकेयर प्रदाताओं को अपने हाथों को 12 घंटे की शिफ्ट प्रति 100 गुना साफ करने की आवश्यकता हो सकती है। अलकोहल आधारित हाथ सेनेटिजऱ हाथों को साफ करने का पसंदीदा तरीका है। साबुन और पानी का उपयोग करने से अधिक प्रभावी और कम सुखाने वाला है, और एंटीबायोटिक प्रतिरोधी सुपरबग्स नहीं बनाता है। मरीजों और उनके आगंतुक अक्सर अपने हाथों की सफाई करके खुद को बचा सकते हैं।
हाथ न धोने से हो सकती है बीमारियां
हाथ न धोने से कई गंभीर बीमारियां हमें अपनी गिरफ्त में ले सकती हैं (विशेषतौर पर बच्चों को)। इसके कारण फ्लू, स्वाइन फ्लू, सर्दी-जुकाम, उल्टी-दस्त, पेट की बीमारियां, गले में संक्रमण, श्वास नली का संक्रमण तथा कई अन्य संक्रामक बीमारियां हो सकती हैं। लेकिन इनसे बचने के लिए सिर्फ हाथ धोना ही काफी नहीं, इसके लिए सही से हाथ धोना चाहिए ताकि कीटाणु खत्म हो सकें। तो चलिये जाने की हाथ न धोना हमारे लिए किस-किस तरह से जोखिम भरा साबित हो सकता है।
सिर्फ हाथ धोना काफी नहीं
सिर्फ हाथ धोना ही काफी नहीं होता, सही तरीके से हाथ धोना और उन्हें साफ बनाए रखना भी जरूरी होता है। कई लोग हाथ धोने के नाम पर केवल अंगुलियों के पोर भिगो लेते हैं और सोचते हैं कि हाथ धुल गये हैं। हाथ तभी साफ होते हैं जब उन्हें साबुन से अच्छी प्रकार मल-मल कर दो मिनट तक धोया जाए। बार-बार गलत तरीके से हाथ धोने से जीवाणुओं की प्रतिरोधक क्षमता दोबारा विकसित होती रहती है और फिर साबुन में मौजूद जीवाणुरोधी रसायन उन पर असर नहीं कर पाते।

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