नकारा हैं सरकारी अफसर, बिना अनुमति कैसे बज रहे लाउड स्पीकर-हाईकोर्ट

लखनऊ। बिना अनुमति धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर कैसे बज रहे हैं। क्या जिम्मेदार अधिकारियों को लाउडस्पीकर सुनाई नहीं देते हैं। ये सख्त टिप्पणी बुधवार को हाईकोर्ट ने सरकारी अफसरों पर सवाल उठाते हुए की। कोर्ट ने कहा कि इस तरह से होना अधिकारियों का नकारापन साबित करता है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि क्या जगह-जगह ऐसे स्थानों पर लगे लाउडस्पीकरों को लगाने के लिए लिखित में संबंधित अधिकारी की अनुमति ली गई है। यदि अनुमति नहीं ली गई तो ऐसे लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। कोर्ट ने ये भी पूछा कि ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए कोई मशीनरी बनी है कि नही।
प्रमुख सचिव गृह व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड चेयरमैन दे जानकारी
कोर्ट ने पूछा है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए क्या किया जा रहा है। साथ ही कहा कि ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए क्या किया जा रहा है। इस बारे में प्रमुख सचिव व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन को इस बारे में बताना होगा। यदिन जानकारी नहीं दी जाती है तो कोर्ट ने कहा कि दोनो ही अफसर अगली सुनवाई तक व्यक्तिगत रूप से हाजिर रहेंगे। एक फरवरी को अगली सुनवाई होगी।
वकील मोती लाल की याचिका पर कोर्ट कर रहा है सुनवाई
बुधवार को इतना सख्त आदेश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और अब्दुल मोईन की बेंच ने वकील मोती लाल की याचिका पर दिया। याचिकाकर्ता वकील मोतीलाल ने सन 2००० में केन्द्र्र सरकार की ओर से ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए बनाये गये न्वॉयज पॉल्यूशन रेग्यूलेशन एंड कंट्रोल रूल्स का पालन न होने का आरोप लगाते हुए मांग की है कि इसे लागू कराया जाये।

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