बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोड़ता है जीडी गोयनका स्कूल, दस वर्ष पूरे होने पर उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने की प्रशंसा

राजधानी Lucknow में स्थापित जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल (GD Goenka Public School) किसी परिचय का मोहताज नहीं। नींव रखने के वर्ष से लेकर आज तक , स्कूल ने शिक्षा के क्षेत्र में कई कीर्तिमान स्थापित किए  और सिर्फ लखनऊ शहर में  नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में शिक्षा के जगत में अपना नाम बनाया। क्योंकि ये विद्यालय भारतीय संस्कृति से बच्चों को जोड़ता है। ये बात उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा  ने शनिवार को कही। डॉ शर्मा विद्यालय के दस वर्ष पूरे होने पर आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। सुशांत गोल्फ सिटी, शहीद पथ स्थित ‘ द सेट्रम ‘ क्लब में आयोजित कार्यक्रम के दौरान डॉ शर्मा ने स्कूल के चेयरमैन सर्वेश गोएल को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने इस सफलता का पूरा श्रेय श्री गोयल की सोच, विचारधारा और  उनकी कर्मठता को दिया। उन्होंने कहा कि आज जी डी गोयंका एक ऐसे स्कूल के रूप में जाना जाता है जहां छात्रों का सर्वागीण विकास होता है और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्रदान करने के साथ अपने देश की संस्कृति से भी जोड़ कर रखा है। पिछले 7 वर्षों से जी डी गोयनका स्कूल शहर के सर्वोच्च सीबीएसई स्कूल के स्थान पर कायम है। इन दस वर्षों की अवधि में जीडी गोयंका स्कूल ने शिक्षा के उच्च स्तर, छात्रों पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान देने के लिए और उनके संपूर्ण विकास के लिए मंच प्रदान करने के लिए अभिभावकों का विश्वास जीता है। वर्तमान में जीडी गोयनका स्कूल लखनऊ का सबसे प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित स्कूल है।

शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कार दे रहा स्कूल

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जीडी गोयनका स्कूल शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को अच्छे संस्कार भी दे रहा है। इस अवसर पर डॉ शर्मा ने स्कूल के चेयरमैन सर्वेश गोएल को बधाई भी दी। उन्होंने कहा इस सफलता का पूरा श्रेय श्री गोयल की सोच, विचारधारा और  उनकी कर्मठता को जाता है। उन्होंने कहा कि आज जी डी गोयनका एक ऐसे स्कूल के रूप में जाना जाता है जहां छात्रों का सर्वागीण विकास होता है। यह स्कूल विद्यार्थियों को अच्छा नागरिक भी बना रहा है जो की अपने माता – पिता,  अपने शिक्षकों और अपने देश का भी सम्मान करेंगे।

नई शिक्षा नीति से होगा सर्वांगीण विकास

इस अवसर पर डॉ शर्मा ने नई शिक्षा नीति पर भी चर्चा करते हुए कहा कि उप मुख्यमंत्री ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष जोर दिया गया है। ऐसी रोजगार परक शिक्षा पर फोकस किया गया है जिससे बच्चे पढ़ते पढ़ते रोजगार पा सकें। बच्चों में प्रारंभ से ही नैतिकता का विकास किया जाना जरूरी है और इसमें परिवार और स्कूल का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता है।  उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में रोजगार परक शिक्षा, शोध, प्रोफेशनल कोर्सेज, टीचर्स के प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया गया है।

बिल्डिंग से ज्यादा शिक्षा में गुणवत्ता जरूरी

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में बिल्डिंग से ज्यादा शिक्षक गुणवत्ता को अहमियत देनी होगी यदि एक शिक्षक की गुणवत्ता में कमी होगी तो हजारों विद्यार्थियों का भविष्य खराब हो जाएगा। इसके साथ ही शिक्षकों को नियमित रूप से प्रशिक्षण भी दिलाये जाने की आवश्यकता है। शिक्षक अनवरत सीखने की ललक होनी चाहिए।

विश्वविद्यालयों में दिया जा रहा है संस्कृत शोध पर जोर

उप मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि आज लखनऊ सहित पूरे प्रदेश में तेजी से आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। प्रदेश में तेजी से युवाओं को रोजगार प्रदान किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि आज विश्व के कई बड़े विश्वविद्यालय प्रदेश में अपने संस्थान खोलने की योजना बना रहे हैं। दुनिया के बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों में संस्कृत पर शोध किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जहां पहले माध्यमिक शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षाएं महीनों तक चलती थीं वहीं आज हाईस्कूल की बोर्ड परीक्षा 12 दिनों में जबकी इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा 15 दिनों में संपादित कराई जा रही हैं।

विद्यालय की सफलता के लिए प्रिसिपल की चेयरमैन ने की सराहाना

इस  खुशी और सफलता के मिलेजुले अवसर पर स्कूल के चेयरमैन सर्वेश गोएल ने जी डी गोयंका स्कूल से जुड़े सभी लोगों, टीचर्स और स्कूल की प्रिंसिपल रवीना पांडे जी की सराहना करते हुए स्कूल की इस सफलता के लिए सभी का धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने स्कूल की नींव रखी तो उनका एक ही उद्देश्य था की छात्रों को ऐसी शिक्षा दी जाए जहां उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सके, साथ उन्हें पारिवारिक मूल्यों से भी जोड़ा जा सके। उनके शब्दों में उनका मकसद स्कूल में छात्रों की संख्या बढ़ाना कभी नहीं था, अपितु उन्होंने हमेशा अपनी संस्कृति और संस्कारों को ऊपर रखते हुए छात्रों की शिक्षा पर जोर दिया। श्री गोयल के अनुसार एक छात्र अपने पूरे जीवन के लगभग 10000 लोगों से मिलता है, उन्हें प्रभावित करता है, इसलिए स्कूल की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है की वह अपने छात्रों को संपूर्ण विकास की दिशा में ले जाए| इस उपलब्धि की खुशी मनाते हुए उन्होंने कहा की स्कूल आगे भी ऐसे ही शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करता रहेगा।