माफी से नहीं MSP से होगा किसानों का भला, लखनऊ में किसान महापंचायत में बोले भाकियू नेता राकेश टिकैत

— मृत 750 किसानों को मिले शहीद का दर्जा, आश्रितों को सरकार दे मदद
— केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा को बर्खास्त कर की जाये गिरफ्तारी

लखनऊ। किसान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भावनात्मक बातों पर विश्ववास करने वाला नही हैं, इसलिए माफी से नहीं ​न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी की गारंटी से किसान का भलाह होगा। ये बात कहते हुए सोमवार को भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत केन्द्र व प्रदेश सरकार पर जमकर बरसे।​ टिकैत ईकोगार्डन पार्क में आयोजित किसान महापंचायत को संबोधित करने के लिए पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि नये कृषि कानून पर सरकार को अपनी भाषा में समझाने में एक साल लग गए। अब प्रधानमंत्री को ये समझ आया कि कृषि कानून किसान, मजदूर व दुकानदार विरोधी हैं। टिकैत ने कहा कि सरकार ने किसानों को बांटने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि इस कानून को लेकर केंद्र सरकार झूठ बोल रही है कि कमेटी बना रहे हैं, जबकि 2011 में मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उनकी अध्यक्षता में गठित कमेटी ने तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार को रिपोर्ट सौंपी थी कि किसानों के लिए एमएसपी लागू करें। ये रिपोर्ट पीएमओ में रखी है उसे ही लागू कर दें, नई कमेटी की कोई जरूरत नहीं है।

किसानों से मोदी ने बोला झूठ
टिकैत ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री बनने से पहले किसानों से वादा किया था कि स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू किया जायेगा, लेकिन उस पर अमल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि पहले तीन क्विंटल गेहूं बेचने पर तीन तोला सोना मिलता था, अब किसान तीन क्विंटल तीन तोला सोना मांग रहा है। दो करोड़ नौकरियों का वादा किया और काम प्राइवेट कंपनियों को दिया जा रहा है, देश प्राइवेट मंडी बनता जा रहा है।

अजय मिश्रा की बर्खास्तगी के साथ हो गिरफ्तारी
टिकैत ने कहा सरकार ने संघर्ष विराम की घोषणा की है,इस घोषणा पर उन्हें विश्व​वास नही है। उन्होंने कहा कि सिर्फ तीन कानूनों की वापसी भर से बात नहीं बनेगी, आंदोलन चरणवार जारी रहेगा। गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र को बर्खास्त करके गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने कहा कि पता चला है कि अजय मिश्र शुगर मिल का उद्घाटन कर रहे हैं यदि ऐसा हुआ तो किसानों का गन्ना मिल पर नहीं डीएम के दफ्तर में पहुंचेगा।

बातचीत से सबक निकले सरकार नहीं तो सिखायेंगे सबक
टिकैत ने कहा कि सरकार बातचीत से समाधान निकाल लें वरना चुनाव में सबक सिखाएंगे। भारतीय किसान सभा के नेता अतुल अंजान ने कहा कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं, लागत का लाभकारी मूल्य चाहिए। महापंचायत में पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों के बड़ी संख्या में किसान पहुंचे थे।

हंकार में हैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
योगेंद्र यादव ने कहा कि वह तो बहुत पहले से कह रहे थे कि कृषि कानून मर चुके हैं, अब उन्हें डेथ सर्टिफिकेट चाहिए। पीएम ने उसकी भी घोषणा कर दी है। यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री को अहंकार की बीमारी लगी है, जनता एक साल से दवाई कर रही थी लेकिन उसका असर नहीं हुआ। पश्चिम बंगाल चुनाव ने छोटा इंजेक्शन दिया और यूपी विधानसभा चुनाव में बड़ा इंजेक्शन लगाने से पहले ही बड़ा असर हो गया है। ये जीत किसानों की है, 70 साल में पहली बार उनकी मांगे मानी गई।

मोर्चा की प्रदेश कमेटी के सदस्य व भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष हरिनाम सि‍ंह वर्मा कहते हैं कि कृषि कानून वापसी चुनावी जुमला भर है। उन्होंने कहा कि कृषि कानून संसद से पास हुए थे तो संसद से ही वापस होने चाहिए। इसके लिए टेलीविजन पर बयानबाजी करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक एमएसपी पर कानून बनाकर इसे लागू नहीं किया जाएगा, तब तक किसान मानने वाले नहीं है। किसान पंचायत में बिजली, डीजल, महंगाई आदि पर बात होगी। पंचायत में किसान नेता दर्शन पाल सि‍ंह, जोगेंद्र सि‍ंह आदि आएंगे।

संयुक्त मोर्चा की ये हैं मांगे
उत्पादन की व्यापक लागत के आधार पर एमएसपी को सभी कृषि उपज के लिए किसानों का कानूनी अधिकार बनाने, लखीमपुर खीरी घटना के संबंध में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा को बर्खास्त करने और उनकी गिरफ्तारी के अलावा किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और आंदोलन के दौरान जान गंवाने वालों के लिए स्मारक का निर्माण शामिल है।

सरकार कह दे हमें बात नहीं करनी, लौट जायेंगे
राकेश टिकैत ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि कृषि कानूनों को निरस्त किये जाने की घोषणा के बाद सरकार किसानों से बात नहीं करना चाहती है। सरकार को यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि उसने कानूनों को निरस्त कर दिया है और वह हमसे बात करना नहीं चाहती है, हम अपने घरों को लौटना शुरू कर देंगे।

उधर सरकार भी जुटी प्रयास में
वहीं दूसरी ओर सूत्रों का कहना है​ कि तीन कृषि कानूनों को रद्द करने से संबंधित विधेयकों को मंजूरी दिए जाने पर बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा विचार किए जाने की संभावना है ताकि उन्हें संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पेश किया जा सके।

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