अयोध्या विवाद-कोर्ट का मानेंगे फैसला, मुस्लिम पक्ष का वसीम रिजवी को प्रतिनिधि मानने से इनकार

लखनऊ। अयोध्या मामले में विवाद सुलझने की उम्मीद दिखायी पड़ती है उसके बाद फिर मामला उलझता जा रहा है। संतों से मुलाकात कर बातचीत के माध्यम से अयोध्या विवाद को सुलझाने के लिए आए शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी को मुस्लिम पक्ष ने दो टूक कह दिया कि कोर्ट जो फैसला करेगा उसे मानेंगे। मुस्लिम पक्ष ने वसीम रिजवी को अपना प्रतिनिधि मानने से इनकार कर दिया। मुस्लिम पक्ष ने कहा कि खुद इस मामले में संतों से बात होगी। वसीम रिजवी रविवार को अयोध्या पहुंचे थ्ो। वहां संकट मोचन हनुमानगढ़ी मंदिर के बंद कमरे में मुस्लिम पक्ष से वार्ता हो रही थी। जिसमें हिदू पक्षकार महंत धर्मदास, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी, शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी और बाबरी मस्जिद के मुद्दई इकबाल अंसारी सहित कई लोग शामिल थ्ो। बात होते होते अचानक इकबाल अंसारी नाराज हो गये। और बैठक से चले गये। वहीं वसीम रिजवी का कहना है कि अयोध्या में मंदिर ही बनना चाहिए कि जबकि मस्जिद को किसी अन्य जगह मुस्लिम बस्ती में बना देना चाहिए, लेकिन इस पर मुसलमानों के सभी वर्ग सहमत नहीं हैं।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का ये था कहना
बीते मार्च 2०17 में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर कहा था कि था कि इस मुद्दे का हल अदालत के बाहर सभी पक्ष मिलकर निकालें और अगर जरूरी होगा तो कोर्ट इसमें दखल देगा। वहीं इलहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने विवादित 2.77 एकड़ की जमीन को तीन पक्षों में बराबर बांटने का आदेश दिया था। कोर्ट के अपने फैसले में एक तिहाई हिस्सा निर्मोही अखाड़ा, एक तिहाई हिस्सा रामलला विराजमान को और एक तिहाई हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को देने की बात कही थी।

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