जाते-जाते खंड ​शिक्षा अधिकारियों का नियुक्ति फंसा गये Dr. प्रभात कुमार

उप्र लोकसेवा आयोग में जुलाई 2019 में अध्यक्ष पद नियुक्त हुए डा. प्रभात कुमार की अगुवाई में महज 21 माह के कार्यकाल में रिकार्ड 22 हजार 876 भर्तियां ताबड़तोड़ की गईं। लेकिन नव नियुक्त 38 खंड शिक्षा अधिकारियों का नियुक्ति पत्र वह फंसा गये हैं। दरअसल मामला ये है कि 309 खंड ​शिक्षा अधिकारियों के सफल होने का परिणाम घो​षित किया गया था, जिनके प्रमाण पत्रों की जांच के लिए इसी साल 8 फरवरी से 10 फरवरी तक समय तय किया गया था, कुछ अभ्यर्थी उस समय प्रमाण पत्र नहीं जमा कर पाये, इसके बाद अभ्यर्थियों को 30 दिनों का समय दिया गया, पर एक माह के पूर्व ही 271 को नियुक्ति पत्र दे दिया गया, और 38 अभ्यर्थियों को औपबंधिक घोषित कर दिया गया। जबकि सभी अभ्यर्थियों की ओर से अपने प्रमाण पत्र जमा किए जा चुके हैं। फिर भी दो माह होने को है इन अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया है। ऐस में अभ्यर्थी मानसिक तनाव महसूस कर रहे हैं।

दिया जा सकता था नियुक्ति पत्र
बताया जा रहा है रहा है लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष पद से डॉ प्रभात कुमार 17 अप्रैल को रिटायर हुए हैं। ऐसे में अभ्यर्थियों के सभी प्रमाण पत्र जमा हो चुके थे तो बीच में एक दिन बुलाकर नियुक्ति पत्र दिया जा सकता था। लेकिन अब नया अध्यक्ष आने के बाद क्या होगा इस पर अभी कुछ तय नहीं है। कुल मिलाकर अभ्यर्थी परेशान है।

प्रभात कुमार के कार्यकाल में सूचनाएं सभी समी समय से दी गयी
हालांकि एक फैक्ट यह भी है कि इनके कार्यकाल में ही कोई दिन रहा हो, जब परीक्षा या फिर परिणाम से संबंधित सूचना वेबसाइट पर जारी न हुई हो। एक भर्ती पूरा होने से पहले ही दूसरे का कार्यक्रम तय होता रहा, यह क्रम कोविड-19 के कठिन दौर में भी नहीं थमा। संस्थान ने जून 2015 से 2019 तक चार साल में सिर्फ 17,316 अभ्यर्थियों का ही चयन किया था।

इससे पहले होती थी परीक्षाओं में लेट लतीफी
प्रदेश में योगी सरकार बनने के समय यूपीपीएससी में डा. अनिरुद्ध सिंह यादव अध्यक्ष थे। उनका कार्यकाल पूरा होने पर दो जुलाई 2019 को तेजतर्रार आइएएस रहे डा. प्रभात कुमार को कमान सौंपी गई। डा. कुमार ने विपरीत हालात में कामकाज संभाला। परीक्षाओं की लेटलतीफी इस कदर थी कि 2017 की पीसीएस परीक्षा तक नहीं हुई थी। इसे देखते हुए सभी भर्तियों को पटरी पर लाने के लिए विस्तृत परीक्षा कैलेंडर तैयार कराया गया। तय समय में परीक्षा और अनुमान से पहले परिणाम देने का सिलसिला अंत तक जारी रहा।