77 वर्षीय आशाराम मरते दम तक रहेगा जेल में , सजा के बाद बोला मेरी उम्र तो देखिए, फिर बोला जैसी ऊपर वाले की मर्जी

न्यूज डेस्क। जो कभी अपने आपको भगवान कहता था और लोग उसकी पूजा करते थे उसी आशाराम को नाबालिग छात्रा के रेप केस मामले में बुधवार को उम्रकैद की सजा हो गयी। आशाराम को अब मरते दम तक जेल में ही रहना होगा। जोधपुर के एससीएसटी विशेष न्यायालय के जज मधुसूदन शर्मा ने बुधवार को आसाराम व उसकी सेविका शिल्पी उर्फ संचिता और सेवक शरदचन्द्र को सजा सुनाई। जिसमें आशाराम को उम्र कैद तो शिल्पी और शरदचन्द्र को 20-20 साल की सजा सुनायी गयी। सजा का ऐलान होते ही आशाराम भावुक होकर जज से अपील करने लगा कि मेरी उम्र का तो ख्याल कीजिए जज ने जब इस पर कोई ध्यान नहीं दिया तो उसने हाथ ऊपरकर बोला जैसी ऊपर वाले की मर्जी।
पिछले साढ़े चार साल से जेल में बंद है 77 वर्षीय आशाराम
नाबालिग से रेप केस मामले में आशाराम पिछले साढ़े चार साल से जेल की हवा खा रहा है। मौजूदा समय में उसकी उम्र 77 वर्ष हो चुकी है। बुधवार को सजा सुनाये जाने के बाद भी आशाराम ने भी अपनी 77 वर्षीय उम्र का हवाला देकर रहम की मांग की। हालांकि गिरफ्तारी के दौरान आशाराम और उसके बेटे नारायण सांई का दावा था कि उस पर लगे आरोप फर्जी है। जल्द ही दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा। एक निजी चैनल के इंटरव्यू में भी आशाराम के बेटे नारायण साई ने दावा किया था कि उसके पिता निर्दोश हैं। लेकिन उसके बाद ही रेप के आरोप में नारायण साई भी फंस गया और जेल चला गया। कई बार आशाराम पेशी के दौरान बड़़ा खुश भी दिखा था। लेकिन अब अदालत में आरोप सिद्घ होने के बाद उसने सारा फैसला ईश्वर की मर्जी पर डाल दिया है।
बवाल से बचने के लिए जेल में ही लगी अदालत
बाबा राम रहीम के बवाल से सबक लेते हुए अदालत ने जेल में ही आशाराम की सजा पर अपना फैसला बुधवार को सुनाया। राजस्थान हाईकोई के निर्देश पर जोधपुर के एससीएसटी विशेष न्यायालय के जज मधुसूदन शर्मा ने सेंट्रल जेल में अपना फैसला सुनाया। बताया जा रहा है कि बाबा राम रहीम की तरह एक और बड़ी ड्रामेबाजी न हो इसके लिए जेल में ही अदालत लगानी पड़ी।
फैसले से पहले छावनी में बदल गयी जेल
आशाराम पर फैसला सुनाने से पहले ही सेंंट्रल जेल की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गयी थी। जेल बिल्कुल छावनी जैसी लग रही थी। जज शर्मा सुबह 7:50 पर पहले जोधपुर कोर्ट परिसर स्थित अपनी एससीएसटी विशेष अदालत पहुंचे। चुंकि जोधपुर जेल में अदालत लगानी थी इसलिए उन्होंने यहां से ट्रांजिट ऑर्डर निकाले। इसके बाद 9:40 बजे वे जोधपुर जेल पहुंचे और मामले की सुनवार्ई की और अपना फैसला सुनाया।
आसाराम के जेल जाने के बाद से तीन गवाहों की हुई मौैत
आशाराम की गिरफ्तारी के बाद से अब तक इस मामले में तीन गवाहों की मौत भी हो चुकी है। इसमें सुनवाई के दौरान मुख्य गवाह कृपाल सिंहए वैद्य अमृत प्रजापति और अखिल गुप्ता पर जानलेवा हमले किए गए जिनमें उनकी मौत हो गई। इसके अलावा कई गवाह आसाराम के गुर्गों के हमले में गंभीर रूप से घायल हुएए जबकि कई ऐसे गवाह थे जो गायब हो गए और उनका आज तक लापता हैं।
आसाराम को इन आरापों में पाया गया दोषी
.धारा 376 आजीवन कारावासए 1 लाख रुपये जुर्माना।
. धारा 370 10 वर्ष कठोर कारावास, 1 लाख रुपये जुर्माना।
. धारा 342 एक वर्ष का कठोर कारावास, 1000 रुपये जुर्माना।
. धारा 506 एक वर्ष का कठोर कारावास, 1000 रुपये जुर्माना।
. जेजे एक्ट की धारा 23रू 6 माह का साधारण कारावास।
आशाराम ने जज को ही करा दिया इंतजार
जेल में लगी अदालत में जब जज शर्मा अपना सुनवाई के साथ फैसला सुनाने के लिए पहुंचे थे तो आशाराम उनके सामने पेश नहीं हुआ था। क्योंकि आशाराम उस समय पूजा पाठ में लीन था। इस कारण सुनवाई देरी भी देरी हुई। हालांकि पूजा करने के बाद जब आशाराम जज के सामने पेश हुए तो माफी भी मांगी कि वह पूजा पाठ में लीन था।

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