नई शिक्षा नीति से क्या होगा बदलाव, समझिए एकेटीयू के कुलपति प्रो. विनय पाठक से

New Education Policy 2020 नई शिक्षा नीति 2020 में स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा में किये गये बदलाव सधे हुए और सकारात्मक परिवर्तन के संकेत हैं। लागू होने के साथ ही विद्यार्थियों पर दबाव कम होगा। पढ़ाई का नया तरीका स्टूडेंट्स को प्रेरित करेगा। प्रैक्टिकल पर जोर दिया जाना महत्वपूर्ण फैसलों में से एक है। स्कूल से निकलते हुए जब हमारे विद्यार्थी कॉलेज पहुंचेंगे तो उनके सोचने-समझने के स्तर में गुणात्मक सुधार आ चुका होगा। इसका लाभ शोध और नवाचारों में भी मिलेगा। ये बात डॉ एपीजे अब्दुल कलाम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय पाठक ने नई शिक्षा को लेकर कही। उन्होंने कहा कि देश में शिक्षा से जुड़े संस्थान आपसे प्रतिस्पर्धा में जुटेंगे। क्योंकि इस नीति के तहत केंद्र सरकार ने अपने बेहतरीन संस्थानों के दरवाजे पूरी दुनिया के लिए और दुनिया के बेहतरीन संस्थानों के दरवाजे भारत के लिए खोलने की प्रतिबद्धता जता दी है।
2035 तक सकल नामांकन दर होगा 50 फीसदी
नई नीति के मुताबिक 2040 तक, सभी उच्च शिक्षा संस्थान का उद्देश्य बहु-विषयक संस्थान बनना होगा, जिनमें से प्रत्येक का लक्ष्य तीन हजार या उससे अधिक छात्र होंगे। 2030 तक, हर जिले में या उसके आसपास कम से कम एक बड़ी बहु-विषयक शैक्षिक संस्था होगी। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात को बढ़ाना होगा, जिसमें 2035 तक व्यावसायिक शिक्षा को 26.3% से बढ़ाकर 50% किया जाना भी शामिल है| एकल-स्ट्रीम उच्च शिक्षा संस्थानों को बहु-विषयक बनना होगा| उच्च शिक्षा में 2035 तक सकल नामांकन दर 50 फीसदी पहुंचाए जाने का फैसला आगे चलकर मील का पत्थर साबित होने वाला है।
एकेटीयू ने उठाये जरूरी कदम
उच्च शिक्षा में मल्टीपल इंट्री और एग्जिट का विकल्प स्टूडेंट्स को राहत देगा। कॉलेजों के एक्रेडिटेशन के आधार पर ऑटोनॉमी मेंटरिंग के लिए राष्ट्रीय मिशन की बात भी की गयी है, जो बहुत महत्वपूर्ण है। डॉ एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय ने इस दिशा में जरूरी कदम उठा लिए हैं। हम अपने सम्बद्ध संस्थानों को ऑटोनोमी यानी स्वायत्ता देने के प्रबल पक्षधर हैं। इस दिशा में हमने नियम कानून में जरूरी मंजूरी ले ली है| जल्दी ही इसके परिणाम देखने को मिलने लगेंगे। नयी शिक्षा नीति में तकनीकी को बढ़ावा देने की बात आज की जरूरत है| हिन्दी और अंग्रेजी भाषाओं के अलावा आठ क्षेत्रीय भाषाओं में भी ई-कोर्स होगा। वर्चुअल लैब कार्यक्रम को आगे बढाए जाने का फैसला भी बेहद महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
 रिसर्च फाउंडेशन से मिलेगा नवाचार को बढ़ावा
नेशनल एजुकेशन टेक्नॉलोजी फोरम और नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना से अनुसंधान एवं नवाचार पर फोकस बढ़ेगा| एक नियामक संस्था की स्थापना भी महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक है| भारतीय उच्चतर शिक्षा आयोग की स्थापना पूरे उच्च शिक्षा के लिए एक छतरी निकाय के रूप में काम करती दिखेगी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कला और मानविकी के साथ समग्र और बहु-विषयक शिक्षा की ओर बढ़ेंगे। कला और मानविकी के छात्र अधिक विज्ञान सीखने का लक्ष्य रखेंगे। भाषा, साहित्य, संगीत, दर्शन, कला, नृत्य, रंगमंच, शिक्षा, गणित, सांख्यिकी, शुद्ध और अनुप्रयुक्त विज्ञान, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, खेल, अनुवाद और व्याख्या आदि विभागों को सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में स्थापित करने का फैसला नई पीढ़ी को सीखने-समझने का और अधिक अवसर देगा।
स्नातक डिग्री के कई विकल्प युवाओं को करेंगे आकर्षित
स्नातक की डिग्री कई विकल्पों के साथ उपलब्ध कराना युवाओं को आकर्षित करेगा| अभी अपने देश में तीन और चार वर्ष के स्नातक कोर्सेज हैं| अब स्टूडेंट्स को कई विकल्प मिलेंगे| जैसे- दो वर्ष अध्ययन के बाद डिप्लोमा या तीन साल के कार्यक्रम के बाद स्नातक की डिग्री सहित एक डिसिप्लिन या क्षेत्र में एक और वर्ष पढ़ने वाले को एक और प्रमाण पत्र। इस तरह चार वर्षीय बहु-विषयक बैचलर प्रोग्राम स्टूडेंट्स को अपनी ओर और आकर्षित करेंगे।
मॉडल विश्वविद्यालय एक महात्तपूर्ण फैसला
आईटीआई और आईआईएम आदि के साथ समग्र और बहु-विषयक शिक्षा के लिए मॉडल सार्वजनिक विश्वविद्यालयों की स्थापना का फैसला नई शिक्षा नीति का महत्वपूर्ण फैसला है| उच्च प्रदर्शन करने वाले भारतीय विश्वविद्यालयों को अन्य देशों में परिसर स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किये जाने और दुनिया के शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों में से चयनित विश्वविद्यालयों को भारत आने की सुविधा दिए जाने का फैसला एक प्रतिस्पर्धी माहौल तैयार करेगा
दसवीं और बारहवीं में निर्णय से छात्रों को मिलेगी राहत
10वीं और 12वीं के कोर्स को आठ सेमेस्टर में बांटना अच्छा फैसला है। बच्चे जिस सेमेस्टर में खुद को तैयार पाएं उसकी परीक्षा दें। छात्र हर समेस्टर में किसी एक विषय में भी बोर्ड परीक्षा दे सकेगे। सेकेंड्री स्कूल के दौरान हर बच्चे को गणित और विज्ञान में दो समेस्टर, इतिहास, विश्व इतिहास, भारत का ज्ञान, नीति शात्र अर्थ शास्त्री, भूगोल आदि में एक समेस्टर में बोर्ड परीक्षा देनी होगी. इसके अलावा हर छात्र को तीन बेसिक भाषा की बोर्ड परीक्षा देनी होगी। हर छात्र को कम से कम 24 विषयों में बोर्ड परीक्षा में बैठना होगा। ये परीक्षाएं स्कूलों की सालाना परीक्षाओं की जगह होगी ताकि बच्चों पर ज्यादा बोझ न पड़े। केन्द्रीय कैबिनेट की मंजूरी के साथ ही नई शिक्षा नीति का जो ड्राफ्ट हम सबके सामने आया है, वह उम्मीदों से भरा हुआ है। हमारे देश में ऐसी नीति की जरूरत थी। हमारा देश युवाओं का है| यहां शिक्षा के बहुआयामी स्वरुप की जरूरत थी, जो यह नीति पूरी करेगी, ऐसा हम सबको भरोसा है।

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