सेना के हथियार अपने हाथों में लेकर बच्चों ने जाना कैसी होती है सरहद पर सुरक्षा

लखनऊ। बच्चों ने सेना के हथियारों को अपने हाथों में उठाकर जाना कि सरहद पर हमारी सेना के जवान कैसे सुरक्षा करती है। बच्चों ने ये भी जाना कि बंकर में जवान किस तरह से रूकते हैं और उसमें क्या-क्या मौजूद रहता है। दरअसल बुधवार को लखनऊ छावनी स्थित रेसकोर्स मैदान में ‘अपनी सेना को जाने‘ मेले का आयोजन किया गया। इस मेले में रॉकेट दागने वाले 84 एमएम राकेट लांचर को भी हाथ से छूकर देखा। बच्चों के लिए मारक हथियारों की प्रदर्शनी आकर्षण का केन्द्र बनी हुई थी। बच्चों ने सेना के अधिकारियों और जवानों से हाथ भी मिलाया इस दौरान बच्चों ने कई सवाल भी पूछे।
किसी कहते हैं बंकर अधिकारियों ने दी जानकारी
इस मौके पर बच्चों सेना के बंकरों के बारे में विस्तार से पूछा, जिसमें सिख रेजीमेंट के जवानों और अधिकारियों ने उन्हें बंकर के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि हमेशा बाॅर्डर पर दुश्मनों की ओर से गोलाबारी का खतरा बना रहता है, इस स्थिति में छुपकर निगरानी के लिए अस्थायी घर बनाये जाते हैं उनको बंकर कहते है। इस बंकर में जवान तरह-तरह के हथियार और गोला बारूद दुश्मनों से निपटने के लिए रखते है। अधिकारियों ने बताया मिट्टी की बोरियों से इनकी दीवार बनायी जाती है।
जवान बंकर के बार बर्फ में और जंगलों में किस तरह से दुश्मनों की नजरों से छुपकर उनपर हमला करते हैं। वो पोशाकें पहने खड़े हुए थे। बच्चों ने उनके साथ सेल्फी भी ली और ये भी पूछा कि वह किस तरह से सुरक्षा में अपना सहयोग प्रदान करते हैं।
बच्चों के लिए ये हथियार बने आकर्षण का केन्द्र
-इजराइल का उपकरण एचएचटीआई
-80 मीटर से 20 किलोमीटर मारने वाला एलआरएफ
– एमपी 9 गनों की प्रदर्शनी
– 5.56 एमएम इंसास एलएमजी
-स्नाइपर, 84 एमएम राकेट लांचर

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