UPCOKA-इंस्पेक्टर करेगा विवेचना, एडीजी देंगे चार्जशीट की मंजूरी, नेता अफसरों का टूटेगा गठजोड़

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लखनऊ। गुरुवार को विपक्ष की ओर से हंगामे की बीच जब यूपीकोका विधेयक पास किया गया तो उस समय सीएम योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष को भरोसा भी दिलाया। सीएम योगी ने कहा कि यूपी में बढ़ते अपराध को लेकर कई बार कोर्ट भी टिप्पणी कर चुका है। कानून व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लग रहा था। अपराधी आसानी से छूट जाते थ्ो इससे आम जनता का विश्वास कानून के प्रति कमजोर हो रहा था। जिसके चलते यूपीकोका जैसे कानून की सख्त जरूरत थी। सीएम ने ये भी कहा कि हम यूपीकोका का दुरुपयोग नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा यूपीकोका के तहत उसी पर कार्रवाई होगी जो वाकई में इसके हकदार होंगे वह फिर कोई भी हो। उन्होंने कहा कि इस कानून के लागू होने के बाद अफसरो और नेताओं की बीच गठजोड़ तो टूटेगा साथ माफियाओं गुंडों की राजनिकि शरण भी मिलना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि यूपीकोका का दुरुपयोग न होने पाये इसके लिए सिर्फ थाने स्तर से ही मामला नहीं निपटेगा यूपीकोका के तहत इंस्पेक्टर विवेचना जरूर करेगा लेकिन कोर्ट में जो चार्जशीट लगनी है उसकी मंजूरी एडीजी को करनी होगी।
आईजी डीआईजी और कमिश्नर अनुमति केे बाद ही दर्ज होगी रिपोर्ट
लखनऊ। यूपीकोका के तहत किसी पर फर्जी तरह से एफआईआर न दर्ज हो इसके लिए भी उच्च अधिकारियों की इसमेें सहमति अनिवार्य की गयी है। आम जनता के लिए भी ये मैसेज देने की कोशिश की आम जनों पर इसका गलत दुरुपयोग न होने पाये इसके लिए रेंज के आईजी और डीआईजी तथा कमिश्नर की अनुमति अनिवार्य होगी। तभी थाने में रिपोर्ट दर्ज हो सकेगी। उसके बाद विवेचना करने के बाद इंस्पेक्टर को अपने उच्च अधिकारियों को पूरे तथ्यों के साथ जानकारी भी देनी होगी।
महाराष्ट्र और कर्नाटक में लागू है यूपीकोका जैसा कानून
हालांकि आपको को बता दे कि यूपीकोका जैसा कानून महारष्ट्र औार कर्नाटक जैसे राज्यों में पहले से लागू है। यहां की सरकारों का शुरू से मानना है कि ऐसे कानून होना जरूरी है। सरकारे ये भी मानती हैं बड़े अपराधियों के लिए यूपीकोका जैसा कानून जरूरी है। हालांकि कर्नाटक में प्रावधान है कि जिसने 1० साल के भीतर अपराध किया हो, वह कर्नाटक कोका के दायरे में आएगा, यूपीकोका में पांच साल के अपराध की सीमा रखी गई है।

अपराधी नहीं हो सकेंगे हावी पुलिस का भी बढ़ेगा मनोबल
सीएम ने कहा कि अपराधी अब अपनी राजीनित पहुंच के नाम पर अधिकारियों पर अपनी धौंस नहीं जमा सकेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश स्थिति ये हो गयी थी पुलिस का भी मनोबल गिर रहा था। अब पुलिस बल का मनोबल भी बढ़ेगा और अपराधी भी राइट टाइम रहेंगे। महसूस हुआ कि प्रदेश में संगठित अपराध को रोकने के लिए कुछ और प्रावधान की जरूरत है। जिसके बाद यूपीकोका को लाने का प्रयास किया गया।
पेट्रोलिंग में पता चला कि हो रही इस तरह की वारदातें
सीएम ने कहा कि आम जन शासन से विकास के साथ सुरक्षा चाहता है। हमने पुलिस अधिकारियों को पेट्रोलिग करने को कहा। हमने पाया कि कई शरारतन वारदातें हो रही हैं। पुलिस पर हमले हो रहे थे। पुलिस का कार्य करने का तरीका बदला।

यूपीकोका में मृत्यूदंड तक है प्रावधान
सीएम योगी ने बताया कि यूपीकोका में मृत्यदंड तक जैसी सजा दिलाने का प्रावधान है। ऐसे में अब अपाराधियों की ख्ौर नहीं होगी। उन्होंने कहा कि अपराधी अगर दोबारा अपराध करता है तो उसकी सजा के लिए उम्रकैद और मृत्यदंड जैसी सजा होना निश्चित है।

बचाव के लिए होंगे तीन स्तर के प्राधिकरण
-जिला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता में
-प्रदेश स्तर पर प्रमुख सचिव गृह स्तर पर
-सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता प्राधिकरण

सत्ता परिवर्तन के बाद अपराध रोकने के लिए पुलिस ने भी कोशिश-सीएम
-8०० से ज्यादा मुठभेड़ हुईं
-2००० से ज्यादा गिरफ्तारी हुईं।
– एनएसए, गैंगस्टर एक्ट भी लगाए गए
– 25 अपराधी मुठभ्ोड़ में मारे गए।
-पुलिस अधीक्षक के कार्यालय में भी एफआईआर काउंटर खुलवाए।
-27०० से ज्यादा अपराधियों ने अदालतों में समर्पण किया
– एंटी रोमियो स्क्वायड बनाया गया।
-7,95,०77 स्थानों पर 3०22 पर कार्रवाई हुई
-9 लाख 67 हजार से ज्यादा लोगों को चेतावनी 
-प्रदेश में आतंकवाद से निपटने के लिए एटीएस को और मजबूत किया गया।
-228 अपराधियों को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया।
-सीएम ने कहा 2०16 की तुलना में 2०17 में अपराध कम हुए हैं।

इस तरह के अपराधों में होगा यूपीकोका इस्तेमाल 
– घूसखोरी करना या घूस देना 
-प्रलोभन या लालच के सहारे अपराध को अंजाम देना 
-संगठित अपराध के सिंडिकेट के सदस्य के रूप में काम करना
– हिंसा का सहारा लेना
-दबाव की धमकी देना
-आर्थिक लाभ के लाभ के लिए गलत कार्य करना 
– बगावत को बढ़ावा देना 
-अवैध साधनों से अवैध क्रिया कलापों को जारी रखना
-आतंक फैलाने की साजिश करना
– बलपूर्वक या हिंसा द्वारा सरकार के खिलाफ आंदोलन करना 
-किसी के जीवन या संपत्ति को नुकसान पहुंचाना 
– धमकी देकर फिरौती की मांग करना 
-फिरौती के लिए अगवा करना 
-किसी टेंडर में भागीदार बनने से किसी को रोकना
– सुपारी लेकर हत्या करना
-जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा करना
– जाली दस्तावेज तैयार कराना
– बाजारों से अवैध वसूली करना
-अवैध खनन करना 
– हवाला कारोबार में शामिल होना 
– मानव तश्करी में शामिल होना 
– नकली दवाओं का कारोबार करना 
-अवैध शराब की बिक्री करते पकडे जाना

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