उन्नाव की बांगरमऊ की सीट खाली, रेप के आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर की रद्द हुई सदस्यता, तिहाड़ में बंद हैं सेंगर

न्यूज डेस्क। उन्नाव के बांगरमऊ से विधायक रहे कुलदीप सिंह सेंगर की विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गयी है। रेप के आरोप में आजीवन सजा काट रहे सेंगर अब वहां से विधायक नहीं हैं, ऐसे में अब दोबारा चुनाव कराये जाने की तैयारी हो सकती है। सचिवालय की ओर से इस संबंध में अधिसूचना भी जारी हो चुकी है। रेप का आरोप लगने के बाद भाजपा ने उन्हे पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया था।
20 दिसंबर से ही रद्द मानी जायेगी सदस्यता
सेंगर की सदस्यता 20 दिसंबर से ही रद् मानी जायेगी। इसी दिन सेंगर को सजा सुनायी गयी थी। विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे की ओर से जारी की गई अधिसूचना में सेंगर की सदस्यता उस दिन से ही समाप्त की गई है, जिस दिन उसे सजा सुनाई गई थी। अधिसूचना के मुताबिक 20 दिसंबर 2019 से उन्नाव जिले की बांगरमऊ विधानसभा सीट को रिक्त घोषित किया गया है।
इन आरोपों में सजा काट रहा है कुलदीप सेंगर
-धारा 120 बी (आपराधिक साजिश)
– 363 (अपहरण),
-366 (शादी के लिए मजबूर करने के लिए एक महिला का अपहरण या उत्पीडन)
– 376 (बलात्कार और अन्य संबंधित धाराओं) और पाक्सो के तहत दोषी पाया गया।

2017 से पीड़िता कर रही थी संघर्ष
कुलदीप सिंह सेंगर उन्नाव में 2017 के दुष्कर्म प्रकरण में दोषी हैं और मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। पीड़िता ने 4 जून 2017 को सेंगर पर दुष्कर्म का आरोप लगाकर लखनऊ में सीएम आवास के सामने आत्मदाह का प्रयास किया था। भाजपा के निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को जनवरी में दिल्ली उच्च न्यायालय से इस सजा केमामले में कोई राहत नहीं मिली। कोर्ट ने एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म के मामले में उसे सुनायी गयी आजीवन कारावास की सजा को निलंबित करने से इनकार कर दिया था।
दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं सेंगर
दोष सिद्धि और सजा के खिलाफ सेंगर की याचिका पर अदालत ने पीड़िता से जवाब भी मांगा है। उन्नाव केस के आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर फिलहाल तो दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद है। तीस हजारी कोर्ट ने इस मामले में अगस्त में ही आरोप तय कर दिया था। उन्नाव के चर्चित किडनैपिंग और गैंगरेप केस में 20 दिसंबर को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने विधायक पर 25 लाख रुपए जुर्माना भी लगाया गया है, जिसमें से 10 लाख पीड़िता को बतौर मुआवजा देने होंगे, जबकि 15 लाख रुपए अभियोजन पक्ष को मिलेंगे।

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