उन्नाव रेप केसः कोर्ट का निर्णय आते ही फूट फूटकर रोया कुलदीप सिंह सेंगर, कटघरे में सीबीआई, कोर्ट ने कहा हम पीडि़ता की व्यथा को समझते हैं

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न्यूज डेस्क। यूपी से लेकर देश भर में चर्चा में आये उन्नाव रेपकांड की पीडि़ता न्याय मिलने की अब पूरी उम्मीद हो चुकी है। सोमवार को बीजेपी से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को कोर्ट ने सजा सुना दी है। संेगर को दोषी करार दिया गया है। सजा का ऐलान होते ही आरोपी कुलदीप सिंह फूट-फूटकर रोया, इस संबंध में जानकारी देते हुए एक वकील ने बताया कि कुलदीप सिंह पर आरोप सिद्ध हो चुके हैं ऐसे में कोर्ट ने सेंगर को वहीं कोर्ट ने सीबीआई को भी फटकार लगाई है । कोर्ट ने कहा कि पीडि़ता ने अपनी और परिवार की जान बचाने के लिए इस केस को देर से रजिस्टर कराया गया। कोर्ट ने कहा कि हम पीडि़ता की मन की व्यथा को समझते हैं। कोर्ट ने कहा कि गैंगरेप वाले केस में सीबीआई ने एक साल चार्जशीट दाखिल करने में क्यों लगाया?
तीस हजारी अदालत ने माना है रेप आरोप को माना सही
आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को पीडि़ता से दुष्कर्म के मामले में दोषी करार दिया है। अदालत ने सामूहिक दुष्कर्म पीडि़ता को नाबालिग माना है, ऐसे में कुलदीप सिंह की पोक्सो एक्ट के तहत मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि इसमें कठोर सजा का प्रावधान है। वहीं, कुलदीप सिंह सेंगर के वकील तनवीर अहमद मीर ने अदालत में कहा कि आज ही सजा पर बहस हो। इस पर अदालत ने सजा पर बहस के लिए मंगलवार का दिन तय किया है।
शशि सिंह बरी
इस मामले में महिला आरोपित शशि सिंह बरी कर दिया गया है। कोर्ट फैसला सुनाते हुए साक्ष्यो के आधार पर सेंगर को दोषी माना है। वहीं महिला आरोपी शशि सिंह के जैसे ही बरी होने का फैसला दिया गया है वह भी रोने लगी।
बीते 9 अगस्त को तय हुए थे आरोप
तीस हजारी कोर्ट में बीते पांच अगस्त को इस मामले की सुनवाई शुरू हुई थी और 9 अगस्त को दोनों आरोपितों पर आरोप तय किए गए थे। करीब 5 माह तक इस कांड से जुड़े सभी मामलों को लगातार तीस हजारी अदालत में सुना जा रहा है। यह पहला मामला है, जिसमे अदालत का फैसला आया है।
ये हैं सेंगर पर आरोप
-4 जून, 2017 को नौकरी देने के नाम पर कुलदीप सेंगर ने पीडि़ता से रेप किया
-गहरी साजिश करते हुए पीडि़ता को नौकरी दिलाने का वादा किया
-आवाज उठाने पर पीडि़ता के परिजनों को नुकसान पहुंचाने की धमकी भी दी थी
तीन नामजद समेत हैं 6 आरोपी, जिसमें शशि ंिसंह बरी
आरोपो के मुताबिक पीडि़ता को किडनैप कर सामूहिक दुष्कर्म की वारदात भी हुई थी, जिसमें तीन नामजद समेत छह आरोपित हैं। पीडि़ता के पिता के खिलाफ 3 अप्रैल 2018 को शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था और पुलिस हिरासत में अत्यधिक पिटाई के कारण उनकी मौत हो गई थी। 28 जुलाई को चाचा से मिलकर वापस लौटने के दौरान रायबरेली में पीडि़ता की कार को एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी। घटना के समय कार में पीडि़ता की चाची, मौसी व वकील भी थे। इस घटना में उसकी चाची व मौसी की मौत हो गई थी, जबकि पीडि़ता व उसके वकील गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से लखनऊ से दिल्ली लाकर घायलों को एम्स में भर्ती कराया गया था, जहां कई दिनों तक इलाज चला था। सुप्रीम कोर्ट ने ही उन्नाव कांड से जुड़े सभी मामलों को उत्तर प्रदेश से दिल्ली की तीस हजारी अदालत में स्थानांतरित किया था।

पांच अगस्त से लगातार हो रही थी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मामले की सुनवाई लखनऊ से दिल्ली स्थानांतरित की गई थी। सत्र न्यायाधीश धर्मेश शर्मा की अदालत 5 अगस्त से प्रतिदिन मामले की सुनवाई कर रही है। अदालत ने बाल यौन अपराध संरक्षण (पॉक्सो) की धारा 3 व 4 (नाबालिग से दुष्कर्म) और भादंसं की धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र), 363 (अपहरण), 366 (अपहरण एवं महिला पर विवाह के लिए दबाव डालना), 376 (दुष्कर्म) की प्रासंगिक धाराओं के तहत आरोप तय किए थे।

पीडि़ता के पिता की पुलिस पिटाई से हुई थी मौत
यह मामला उस समय सुर्खियों में आया था जब पीडि़ता और उसकी मां ने मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के आवास के बाहर आत्मदाह करने की कोशिश की थी। पीडि़ता के पिता के खिलाफ 3 अप्रैल 2018 को शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था और पुलिस हिरासत में अत्यधिक पिटाई के कारण उसकी मौत हो गई थी।
28 जुलाई को सड़क हादसे में हत्या की रची गयी साजिश
28 जुलाई को चाचा से मिलकर वापस लौटने के दौरान रायबरेली में पीडि़ता, उसकी चाची, मौसी व वकील की कार को एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी। इसमें चाची और मौसी की मौत हो गई थी, जबकि पीडि़ता व उसके वकील घायल हो गए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से लखनऊ से दिल्ली लाकर घायलों को एम्स में भर्ती कराया गया था, जहां कई दिन तक इलाज चला।

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