विश्वविद्यालयों को स्वतंत्रता तो होगी लेकिन मनमानी पर रहेगी निगरानी

लखनऊ। अब सभी विश्वविद्यालय स्वतंत्र रूप से काम कर सके इसके लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) उनके लिए नई योजना तैयार करने जा रहा है। लेकिन विश्वविद्यालय अपनी मनमानी न कर सके इसके लिए यूजीसी उन पर अपनी निगरानी बनाये रखेगा। ये जानकारी डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में आये यूजीसी के चेयरमैन प्रो. वीएस चौहान ने दी। इस दौरान सवांददाता रविशंकर गुप्ता ने कुछ सवालों को लेकर उनसे बातचीत भी की।

सवाल-बहुत से विश्वविद्यालयों में छात्रों की कई सारी समस्याएं रहती हैं उन पर यूजीसी किस तरह से एक्शन लेता है?
जबाब-छात्रों की समस्याओं को लेकर यूजीसी विश्वविद्यालयों पर अपनी निगरानी हमेशा बनाये रखता है। लेकिन छात्र भी चाहे तो यूजीसी की वेबसाइट पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। जिसके बाद यूजीसी संबधित विश्वविद्यालयों से रिपोर्ट मांगता है फिर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होती है।

सवाल-सर आपने कहा कि विश्वविद्यालयों को स्वतंत्रता रूप से काम करने का मौका मिलेगा। इसके लिए यूजीसी तैयारी कर रहा है। सर किस तरह की आजादी होगी?
जवाब-स्वतंत्रता का मतलब ये नहीं है कि विश्वविद्यालय अपनी मनमानी कर सकेंगे। इस पर यूजीसी निगरानी रख्ोगा। स्वतंत्रता का मतलब ये कि छात्र हित में विश्वविद्यालय अगर कोई योजना या फिर सिलेबस से संबधित कोई योजना तैयार करता है तो उसको पूरा मौका दिया जायेगा।

सवाल- सर अभी हाल ही में यूजीसी की ओर से फर्जी विश्वविद्यालयों की एक लंबी सूची जारी की गयी थी। ऐसे विश्वविद्यालयों के प्रति क्या कोई कानूनी कार्रवाई गयी है ?
जवाब- जो भी विश्वविद्यालय फर्जी हैं उनको बख्शा नहीं जा रहा है। फर्जी विश्वविद्यालय थ्ो उनके खिलाफ नोटिस जारी कर गयी थी। साथ ही उनकी सूची भी त्ौयार की गयी थी। आगे भी अभी कार्रवाई जारी रहेगी।

सवाल- यदि कोई विश्वविद्यालय सर अच्छा काम करता है तो लेकिन उसके पास बजट की समस्या है तो यूजीसी किस तरह से सहायता करेगा ?
जवाब-इंस्टीट्यूशंस ऑफ एमीनेंस योजना के तहत टॉप विश्वविद्यालयों को पांच साल में एक-एक हजार करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी। लेकिन इसके लिए पहले विश्वविद्यालय को अच्छा काम करना होगा। टॉपटेन की सूची में आने वालों को ये सहायता मिलेगी। इसके लिए अभी तक सौ विश्वविद्यालयों ने आवेदन भी किया है। अनुदान देने के बाद भी यूजीसी ऐसे विश्वविद्यालयों की निगरानी करता रहेगा।

सवाल- सर नैक से मूल्यांकन के दौरान कई बार टीम पर पक्षपात का भी आरोप लगा है। इससे निपटने के लिए क्या किया गया है?
जवाब- आरोपों की बात अलग है लेकिन अब नैक द्बारा मूल्यांकन प्रक्रिया में बदलाव कर दिया गया है। अब नैक टीम विश्वविद्यालयों का निरीक्षण करने के बाद सिर्फ 2० नंबर ही दे सकेगी। बाकी के 8० प्रतिशत विश्वविद्यालयों की ओर से जमा किए गये डाटा इंफार्मेशन रिपोर्ट के आधार पर नंबर दिए जायेंगे। अब विश्वविद्यालयों को तय करना है कि वह किस तरह काम करते हैं।

सवाल- सर जो विश्वविद्यालय अच्छा काम करते हैं या फिर सिलेबस के साथ-साथ छात्र हित में और भी कोई बदलाव करते हैं तो उसके लिए यूजीसी किस तरह साथ देगा?
जवाब-अच्छा काम करने वाले विश्वविद्यालयों के साथ यूजीसी हमेशा साथ में खड़ा है। अच्छे विश्वविद्यालयों को किस तरह से प्रमोट करना है इस पर भी यूजीसी तैयारी कर चुका है। साथ यूजीसी जो अच्छे कॉलेज हैं उन्हें स्वायत्तता प्रदान करेगा। अच्छे कॉलेजों की संख्या भी बढ़ायी जायेगी।

सवाल- सर कई बार विश्वविद्यालयों पर परीक्षा परिणाम गड़बड़ाने का आरोप लगे हैं तो कभी पढ़ाई न कराने का आरोप लगे हैं इस दशा में यूजीसी किस तरह से काम करता है?
जवाब-यूजीसी छात्र हित में एक्शन के लिए हमेशा तैयार रहता है। रही बात कोर्स पूरा न कराने और परीक्षा परिणाम में गड़बड़ी की शिकायत पर भी कार्रवाई हुई है।

क्या है विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एक नजर में
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) अपने पात्र विश्वविद्यालयों को अनुदान प्रदान करता है। ये विश्वविद्यालय शिक्षा के मापदंडों के समन्वय, निर्धारण और अनुरक्षण के लिए 1956 में संसद के अधिनियम द्बारा स्थापित एक स्वायत्त संगठन है। ये अतिरिक्त आयोग केन्द्र और राज्य सरकारों को उच्चतर शिक्षा के विकास हेतु आवश्यक उपायों पर सुझाव भी देता है। इसके अलावा विश्वविद्यालयों में अध्यापन, परीक्षाओं एवं अनुसंधान के मानकों को निर्धारित एवं अनुरक्षित करना भी है। इसके अलावा शिक्षा के न्यूनतम मानकों पर विनियम तैयार करना।

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