सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योग को बढ़ावा देगा ये बजट, AR News Times से बातचीत में प्रोफेसरों ने दी बजट को लेकर ये प्रतिक्रियाएं

योगी सरकार ने अपना अंतिम और पांचवा बजट सोमवार को पेश किया। इस बजट को  किसानों और आमजनों के साथ सूक्ष्म और लघु उद्योग के लिए काफी बेहतर बताया जा रहा है। इसी बीच अर्थशास्त्र के  प्रोफेसरों  ने अभी अपनी प्रतिक्रिया दी है।

पांचवे बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए (Professor MK Agarwal of Lucknow University Economics Department) लखनऊ विश्वविद्यालय अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर एमके अग्रवाल कहते हैं कि प्रदेश के आर्थिक विकास के दृष्टिकोण से यह संतोष की बात है कि योगी सरकार का यह पांचवा व इस कार्यकाल का अंतिम बजट तो कोरोना से संक्रमित और यही अगले साल होने वाले चुनाव से प्रभावित हो गया। इस बजट का आकर भी बढ़ा दिया गया है। इस बजट की रणनीतियों से स्पष्ट है कि यह पहले के बजटों के अनुरूप ही विकास के लक्ष्य की ओर बढ़ता हुआ प्रतीत होता है। इस बजट में पूंजीगत पारिदृश्य को काफी बड़ा आकार दिया गया है। यह कुल बजट का लगभग 30 प्रतिशत है जबकि ध्यान देने वाला महात्वपूर्ण बिंदू है इससे विकास का अधार विस्तृत करने में सहायता मिलेगी। मोदी सरकार के अनुरूप योगी सरकार की भी रणनीति अवस्थापना सुविधाओं का तीव्र व व्यापक विकास करना है। यह बात सड़कों के विकास, बिजली के वितरण, सिचाई सुविधाओं का विकास, वायु यात्रा को सुगम बनाना, यातायात का विकास इत्यादि शामिल है। बड़े उद्योगों के विकास, सूक्ष्म व लघु उद्योगों पर भी फोकस भी इस बजट की विशेषताओं में शामिल है। लेकिन इसमें थोड़ा और प्रयास बेहतर रणनीति की आवश्यकता है।

आत्मनिर्भर प्रदेश के लक्ष्य को साधने का प्रयास-डॉ भारती पाण्डे

                  इस बार के बजट के बारे में  जेनपीजी कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग की अध्यक्ष व प्रोफेसर डॉ भारती पाण्डेय ने कहा (Dr. Bharti Pandey Chairman, Department of Economics Jn P. G. College) लखनऊ प्रदेश सरकार के 2021-22 का बजट किसान, महिला सशक्तिकरण, युवा, ग्राम्य विकास, शिक्षा, औद्योगिक विकास एवं अवस्थापना सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग पर बल देकर “आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश” के लक्ष्य को साधने का प्रयास किया गया है। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति अभी भी मापदंडों के अनुरूप नहीं है। परंतु इस बजट में सरकार ने स्वास्थ्य बजट को कमतर स्तर पर रखा। जबकि केन्द्र सरकार का बजट “हेल्थ बजट” ही था। प्रदेश के किसानों की आय को दोगुना करने पर सरकार ने निश्चित ही अपना ध्यान केंद्रित किया है। आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना संचालित की जाएगी, इसके लिए सरकार ने 100 करोड़ रुपए बजट में आवंटित किए हैं। किसानों को मुफ्त पानी की सुविधा और रियायती दरों पर किसानों को फसली ऋण उपलब्ध कराए जाने के लिए बजट में समुचित व्यवस्था की गई है। इसी क्रम में कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए पर्याप्त सिंचाई सुविधाओं की उपलब्धता नितांत आवश्यक है। सरकार ने विभिन्न नहर परियोजनाओं के लिए धनराशि आवंटित की है। भारत गांवों का देश है, प्रदेश के गांवों को विकसित करने और वहां सभी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के लिए सरकार ने बजट में व्यवस्था की है। जैसे “प्रधानमंत्री ग्रामीण योजना” एवं “मुख्यमंत्री आवास योजना- ग्रामीण” के लिए क्रमशः 7000 करोड़ रुपए एवं 369 करोड़ रुपए प्रस्तावित हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत 33 करोड़ मानव दिवस-रोजगार सृजन के लिए भी धनराशि आवंटित की गई है। “आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश” के लिए प्रदेश के कृषि विकास को बढ़ावा देना ही होगा। इसके लिए सरकार ने कृषि विकास की दर को 5.1 प्रतिशत पर लक्षित किया है।