जीवन के संघर्ष की बजाय नशे की ओर भाग रही युवा पीढ़ी

लखनऊ। आज का युवा अपने जीवन में संघर्ष की बजाय नशे की ओर तेजी से भाग रही है। जिसका रोका जाना बेहद जरूरी है। नशा मुक्त भारत का निमार्ण हम सबका दायित्व भी है। नशा एक ऐसी लत है जो सारे नतीजे खराब ही देता है। ये बात एमिटी इंटरनेशन स्कूल में आयोजित शांतिकुंज हरिद्वार गायत्री परिवार की ओर से नशा मुक्ति कार्यशाला में वरिष्ठ वक्ता केदार प्रसाद दुबे और मेजर वीके खरे ने कही। उन्होनें कहा कि, नशा किसी भी प्रकार का हो हमेशा खराब नतीजे ही देता है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी जीवन के संघर्षों से भागकर नशे की लती बन रही है जबकि नशा किसी भी समस्या का हल नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि नशा एक बीमारी है जिससे हर संभव तरीके से बचना चाहिए और अगर कोई दुर्भाग्य से इसकी चपेट में आ भी जाए तो उसे उचित सहायता देकर नशामुक्त कराना चहिए। नशा इंसान की कमजोरी को दर्शाता है और कमजोर इंसान किसी काम का नहीं होता। श्री दूबे ने छात्रों का आवाहन करते हुए नशे के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए कहा उन्होने कहा कि अगर भारत देश को विश्वगुरू के रूप में स्थापित करना है तो समाज से नशा नामक बीमारी को हमेंशा के लिए समाप्त करना होगा। श्री दूबे ने बताया कि आगामी 8 अप्रेल को अम्बेडकर मैदान लाखों लोग इक_ा होकर नशे के खिलाफ संघर्ष का ऐलान करेंगे। इस कार्यक्रम में प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ भी शामिल होगें। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह उनसे बिहार और गुजरात की ही भांति उत्तर प्रदेश को भी नशामुक्त करने की गुहार और अनुरोध करेगा।

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