सम्मान पाकर खुश हुए शिक्षक,सीएम ने कहा महिला शिक्षक नियमित स्कूल जायें तो सुधरेगी बेसिक शिक्षा

-शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर 49 शिक्षक हुए सम्मानित
लखनऊ। शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेसिक शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार से से सम्मानित किया। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठïान में आयोजित सम्मान समारोह में 49 शिक्षकों को सम्मानित किया गया। बेसिक शिक्षा विभाग ने राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए 49 शिक्षक चयनित किये थे। इस दौरान शिक्षकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत ढाई वर्षों में बेसिक शिक्षा परिषद ने कई कार्य किये हैं उसके लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सम्मानित भी किया है। उन्होंने कहा शिक्षक समाज में रीढ़ की हड्डïी की तरह होते हैं। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि एक शिक्षक के रूप में हमें समाज को कुछ देने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है तो इस जीवन को धन्य मानना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब हमारी सरकार आई तो कहा गया कि बेसिक शिक्षा बहुत ज्यादा खर्च किया जा रहा है। तो हमने कहा कि इससे शिक्षा का विकास होगा और तभी आपरेशन कायाकल्प की शुरूआत की गई। जिसके बाद स्कूलों में बहुत कुछ बदल चुका है और धीरे-धीरे और भी बदलाव किए जाते रहेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल चलो अभियान को शुभारम्भ 2017 में किया गया था। इस दौरान इस अभियान ने अच्छा किया। स्कूलों में छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ी है। बहुत से देश की इतनी जनसंख्या नहीं होगी, जितनी विद्यालयों में विद्यार्थियों की होगी। इससे पहले बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले समय में हमारा प्रयास होगा कि आने वाले समय में प्रत्येक जिले से कम से कम एक शिक्षक को राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित किया जाए।
चुटीले अंदाज में महिला शिक्षकों सीएम ने दी नसीहत
मुख्यमंत्री ने इस दौरान चुटकी लेते हुए कहा कि बेसिक शिक्षा का स्तर सुधर जायेगा, यदि महिला शिक्षक नियमित विद्यालय जायेंगी। मुख्यमंत्री के मुंह से ये बात निकलते ही पूरा हाल ठहाके से गूंज उठा। इस दौरान मुख्यमंत्री भी मुस्कराहट भरे अंदाज में शिक्षकों को नसीहत देते हुए कहा कि मुझे उम्मीद है कि अगली बार सम्मानित होने वाले शिक्षकों में महिलाओं की संख्या अधिक होगी। हालांकि इस बार सम्मान पाने वालें में पुरूष शिक्षक ज्यादा हैं29 हैं जबकि महिला शिक्षक 20 हैं।
सरकारी योजना को बनाना होगा जनान्दोलन
मुख्यमंत्री ने कहा कि कहा कि हमें कोशिश करना होगा सरकारी योजना सिर्फ योजना न बनकर जनान्दोलन बने तभी अपेक्षित सफलता मिलेगी। यदि कोई बच्चा स्कूल जाने से वंचित रह जाता है तो यह समाज का दुर्भाग्य है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल अक्षर ज्ञान नहीं है। हम बच्चों को ऐसे व्यावहारिक ज्ञान से परिपूर्ण करें जिससे वे जीवन में चुनौतियों का समाना कर सकें।
शिक्षकों को मिला 25 हजार रूपए और दो साल का सेवा विस्तार
पुरस्कार व सम्मान पाने वाले शिक्षकों को दो साल का सेवा विस्तार भी दिया जायेगा। इसके साथ ही पुरस्कार स्वरूप 25 हजार रुपये भी दिए गये। मुख्यमंत्री ने पांच सितंबर 2017 को शिक्षक दिवस समारोह में प्रदेश के हर जिले से परिषदीय विद्यालयों के एक-एक शिक्षक को राज्य अध्यापक पुरस्कार से नवाजने का एलान किया था। पिछले साल तो बेसिक शिक्षा विभाग ऐसा नहीं कर पाया, लेकिन इस बार उसने प्रदेश के हर जिलों के शिक्षकों से आवेदन मांगे थे। पुरस्कार के लिए जिलों से संस्तुत किये गए शिक्षकों का राज्य स्तरीय समिति ने साक्षात्कार किया था। राज्य स्तरीय समिति के अनुमोदन के आधार पर शासन ने 49 शिक्षकों को पुरस्कार के लिए चयनित किया गया। इन शिक्षकों को पुरस्कार स्वरूप 25 हजार रुपये प्रदान किये गए। इन शिक्षकों को दो साल का सेवा विस्तार भी मिलेगा।
अपना विद्यालय यदि खुद से साफ कर रहे हैं तो कोई बुराई नहीं
इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शिक्षक व बच्चे खुद से विद्यालय को स्वच्छ रखते हैं तो इसमें कोई बुराई नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को ये समझना होगा कि वह वह उनकी कर्म स्थली है उससे उनके परिवार का पेट पलता है, ऐसे में जिस तरह से हम अपने घर को स्वच्छ रखते हैं यदि विद्यालय भी स्वच्छ रखेंगे तो उसमें कोई हर्ज नहंी है। उन्होंने इस कार्य में बच्चे भी सहयोग करते हैं तो भी कोई बुराई नहीं है।
अपनी सांसद निधि से स्कूलों को दिए फर्नीचर
उन्होंने कहा कि मैंने अपनी पहली सांसद निधि से गोरखपुर में स्कूलों को फर्नीचर दिया था। कोई भी जनप्रतिनिधि एक सोलर पैनल, स्मार्ट क्लास या कम्प्यूटर के लिए मना नहीं करेंगे। अपने स्कूल को ऐसा बनाइए कि गांव का गौरव बढ़े। स्कूल एक घंटा पहले जाइए और ग्राम प्रधान व अन्य लोगों के साथ बैठ कर रणनीति बनाइए।
जनगणना पर बोलते हुए सीएम हुए भावुक
उन्होंने भावुक होकर कहा कि आज जब शिक्षक कहता है कि उसे जनगणना से अलग किया जाए तो दुख होता है। आपसे बेहतर इसे कोई नहीं कर सकता। आप घर-घर जकर संपर्क करेंगे तो शासन की योजनाओं की जानकारी दे सकते हैं, आवास, राशन, स्कॉलरशिप समेत कई चीजों की जानकारी देंगे तो आपका सम्मान बढेगा क्योंकि आप उसकी मदद कर रहे हैं। आप भारत के गुरुकुल की परम्परा आगे बढ़ाएंगे। वहीं शिक्षक नेताओं को उन्होंने नसीहत दी कि यदि आप घर-घर नहीं जाएंगे तो कल को चुनाव कैसे लड़ेंगे।
अधिकारियों से समझा कैसे होता शासन का काम
मुख्यमंत्री ने अपना उदाहरण देकर समझाया कि अगर बीटीसी-टीईटी करके शिक्षक बन गए तो यही जिंदगी का लक्ष्य नहीं है। जब मैं मुख्यमंत्री बना तो प्रधानमंत्री व राष्ट्रीय अध्यक्ष से जाकर पूछा कि मुझे सरकार चलाने का अनुभव नहीं है तो जो-जो उन्होंने बताया उसे नोट किया। फिर लखनऊ आकर अफसरों से मिला और समझा कि शासन का काम कैसे होता है। आप भी देश-दुनिया और सरकार की योजनाओं की जानकारी सुबह की प्रार्थना सभा में दें। इससे बच्चों की जानकारी बढ़ेगी और आपका ज्ञान।
शिक्षक ट्रेड यूनियन का हिस्सा नहीं
उन्होंने शिक्षकों को नसीहत दी कि वह ट्रेड यूनियन की तरह सडक़ पर आने की चेतावनी मत दें। उन्हें कोई समस्या है तो सरकार उन तक आएगी। शिक्षकों को अपना खोया सम्मान पाने के लिए प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि जब मंदिर की सफाई खुद कर सकते हैं तो स्कूलों की साफ सफाई भी मिल कर करें। कार्यक्रम के दौरान राज्यमंत्री गुलाब देवी, मोहसिन रजा और अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार मौजूद रहीं। इसका सीधा प्रसारण पूरे प्रदेश में किया गया और कार्यक्रम स्थल के बाहर और प्रदेश के हर जिले में शिक्षकों ने मिल कर मुख्यमंत्री का भाषण सुना।
सीएम ने की अधिकारियों की तारीफ
विशेष सचिव व मिड डे मील के निदेशक विजय किरण आनंद की तारीफ करते हुए कहा कि वे हमारे ऐसे अफसर हैं जो रात 12 बजे भी ड्यूटी भी रहते हैं और सुबह 4 बजे भी। कुम्भ के सफल आयोजन के बाद जब हमने उन्हें मुंहमांगी पोस्टिंग देनी चाही तो उन्होंने बेसिक शिक्षा को चुना। वहीं बेसिक शिक्षा निदेशक सर्वेन्द्र विक्रम बहादुर सिंह को भी माध्यमिक वाले मांगते हैं लेकिन मैं इन्हें बेसिक शिक्षा में ही रखना चाहता हूं। मैं चाहता हूं कि अपने अफसरों की तरह आप भी मिसाल बने।
अगले साल हर जिले से एक शिक्षक को मिलेगा सम्मान
लख्शनऊ। इस बार राज्य अध्यापक पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों की संख्या 49 हो गयी है लेकिन अगले साल इस संख्या में बढ़ोत्तरी हो जायेगी। हर जिले से एक शिक्षक को सम्मानित किया जायेगा, ऐसे ें यह संख्या 75 हो जायेगी। ये घोषणा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठïान में राज्य अध्यापक सम्मान समारोह व प्रेरणा ऐप लांचिंग के दौरान कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी तक 17 शिक्षको पुरस्कार मिला था, लेकिन एक कोशिश के बाद ये संख्या बढ़ी है। वहीं बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री डा. सतीश द्विवेदी ने कहा कि शिक्षक अपनी प्रतिभा को खुद दिखा सके इसकी भी व्यवस्था की जायेगी साथ ही शिक्षक प्रेरणा ऐप पर अपनी ओर से किये गये नवाचार को विवरण भी दे सकेंगे। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्य करने वाले शिक्षकों का बेसिक शिक्षा अधिकारी तो चयन करते ही हैं लेकिन शिक्षक अपनी प्रतिभा खुद से भी दिखा सकेंगे।

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