लंबी खिच सकती है शिक्षक भर्ती प्रक्रिया, सुप्रीम कोर्ट की शरण में पहुंचा मामला

न्यूज डेस्क। यूपी में 29334 सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया का मामला अब लंबा खिच सकता है! क्योंकि मामला अब सुप्रीम कोर्ट चला गया है। बेसिक शिक्षा परिषद के उच्च प्राथमिक स्कूलों में विज्ञान और गणित विषय के 29334 सहायक अध्यापकों की नियुक्ति होनी है। इस नियुक्ति में रिक्त तकरीबन दो हजार पदों पर भर्ती के लिए हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ प्रदेश सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में 15 मई को एसएलपी दायर की है। विज्ञान व गणित विषय के शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया लगभग छह साल पहले जुलाई 2013 में शुरू हुई थी। जनवरी-फरवरी 2015 तक सात राउंड की काउंसिलिंग के बाद 26115 अभ्यर्थियों का चयन हुआ था लेकिन कानूनी अड़चन के कारण सितंबर-अक्तूबर 2015 में ज्वाइनिंग दी जा सकी। उसके बाद टीईटी में 82 अंक के आधार पर सफल अभ्यर्थियों की आठवें राउंड की काउंसिलिंग कराई गई और जनवरी-फरवरी 2016 में नियुक्ति पत्र दिया गया। इस बीच पूर्व में काउंसिलिंग करा चुके लेकिन ज्वाइनिंग नहीं करने वाले अभ्यर्थियों को नवंबर 2016 में नियुक्ति का अंतिम अवसर दिया गया। उनकी प्रक्रिया चल रही थी की प्रदेश की नवनिर्वाचित सरकार ने 23 मार्च 2017 को मौखिक आदेश से भर्ती रोक दी। इसके खिलाफ नीरज कुमार पांडेय समेत अन्य अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं कर दी।
हाईकोर्ट ने मौखिक आदेश को दरकिनार करते हुए रिक्त पदों के सापेक्ष दो महीने में भर्ती का आदेश दिया लेकिन सरकार ने उसे नहीं माना। सरकार ने हाईकोर्ट में ही स्पेशल अपील और पुर्नविचार याचिकाएं दायर की लेकिन दोनों खारिज हो गई। इसके बाद अभ्यर्थियों ने अवमानना याचिका कर दी। इससे बचने के लिए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की है। सरकार का कहना है कि उच्च प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापकों की सीधी भर्ती पर पूरी तरह से रोक लगाई जा चुकी है, इसलिए नियुक्ति देना संभव नहीं है।

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