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लखनऊ में फर्जी शिक्षकों की जांच मतलब जान से हाथ धोना? अधिकारी भी शामिल हैं फर्जीवाड़े में-भाग 2

रविशंकर गुप्ता
लखनऊ। शिक्षा विभाग में अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी शिक्षकों की जमकर भर्ती हुई। कहीं नियुक्तियों में ख्ोल हुआ तो कहीं पर फर्जी डाक्यूमेंट के आधार पर लोगों को शिक्षक बना दिया गया है। ऐसे में सवाल यह है विभाग में जिन अधिकारियों को भ्रष्टाचार रोकना है वही भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं तो उनके खिलाफ जांच कौन करेगा? सबसे बड़ी बात ये भी है कि सरकार काोई भी हो हर सरकार में इन्हीं अधिकारियों को ही काम करना होता है। वर्षों से जमे अपने पदों पर अधिकारियों ने जमकर सिस्टम का दुरुपयोग किया है। जब कभी किसी ने आवाज भी उठायी तो जांच के नाम पर भ्रष्टाचार पर विराम लगा दिया गया है। राजधानी में एलटी ग्रेट में ही कई फर्जी नियुक्तियां हुई हैं लेकिन जांच अभी तक पूरी नहीं हो सकी। हैरानी की बात ये भी है कि जिला विद्यालय निरीक्षक डा. मुकेश कुमार सिंह ने ये तक कह दिया अगर जांच मैं कंरू भी तो मुझे जान से हाथ धोना पड़ सकता है।
वेतन रुका है लेकिन जांच अभी तक पूरी नहीं
शिक्षकों की नियुक्ति में हुए ख्ोल को लेकर पर्दाफाश हुआ तो पहले तो अधिकारियों ने गोलमोल जवाब दिया लेकिन जब कुछ मीडिया हाउसों ने इस मुदद्े को उठा दिया तो वेतन रोक दिया गया लेकिन जांच कछुए के चाल चल रही है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक इस बारे में दो टूक रटा रटाया बयान दे रहे हैं जांच जल्द ही पूरी हो जायेगी।
माध्यमिक शिक्षक संघ ने मुद्दा उठाया तो उसे दलाल बताया
माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट ने फर्जी शिक्षकों और शिक्षकों की नियुक्ति में हुए ख्ोल को जब प्रमुखता से उठाया तो उसको ही अधिकारी दलाल कह रहे हैं। हालांकि शिक्षक संघ के ऐसे तमाम आरोप हैं जिन पर सवाल अधिकारियों से पूछा जाता है तो अधिकारी बगले झांकते नजर आते हैं। शिक्षा विभाग मेें कुछ अधिकारी चाहते भी हैं कि भ्रष्टाचार उजागर होना चाहिए। लेकिन उनके उच्च अधिकारी ही मामले को दबवा देते हैं।
इन कॉलेजों का मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में फिर भी कार्रवाई नहीं
राजधानी के गिरधारी सिंह इंटर कॉल्ोज, यशोदा गल्र्स कॉलेज, खुनखुन जी गल्र्स कॉलेज, कालीचरण इंटर कॉलेज में शिक्षकों की अवैध तरह से नियुक्तियां की गयी। इसकी शिकायत भी माध्यमिक शिक्षा मंत्री व उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक हो चुकी है। लेकिन जांच के नाम पर सब शून्य है आखिर सवाल है कि आखिर जांच को कौन प्रभावित कर रहा है।
अधिकारियों के रिश्तेदारों को भी किया गया नियुक्त
माध्यमिक शिक्षा विभाग के ही एक वरिष्ठ अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि एलटी ग्रेट में जो नियुक्तियां हुईं हैं उनमें तो कुछ अधिकारियों के रिश्तेदार भी शामिल हैं। यहां तक उन्होंने कुछ सत्ताधारियों को नाम ले लिया लेकिन सवाल फिर आगे यही है कि जांच कौन करेगा?
जांच में दोषी, पहले वेतन रोका लेकिन बाद में दबाव पड़ा तो वेतन जारी
कालीचरण इंटर कॉलेज, गिरधारी सिंह इंटर कॉल्ोज, यशोदा गल्र्स कॉलेज, खुनखुन जी गल्र्स कॉलेज, में शिक्षकों की अवैध तरह से नियुक्तियां की गयी। जांच के बाद जब वेतन रोका गया उसके बाद जिला विद्यालय निरीक्षक पर ऐसा दबाव पड़ा कि फिर से वेतन जारी कर दिया गया। लेकिन जांच अभी चल रही है। सवाल है कि आखिर कौन है जो ऐसे ख्ोल करने के लिए इमानदार अधिकारियों पर दबाव बनाता है।

हम ऐसे अधिकारी हैं जिसने अभी तक अपने कार्यकाल में 188 फर्जी शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखाकर उन पर कार्रवाई कर चुके हैं। लेकिन जांच में कहीं न कहीं पर हमें प्रभावित किया जाता है लेकिन हम अपने स्तर पर हर संभव भ्रष्टाचार को रोकेंगे।
डा. मुकेश कुमार सिंह डीआईओएस लखनऊ

हम अपनी आवाज को उठाते रहेंगे। सारे तथ्य सामने हैं कार्रवाई अधिकारियो को करना है। हम शिकायत भी दर्ज करवाते रहेंगे। कॉलेजों में शिक्षकों की अवैध तरह से नियुक्तियां की गयी हैं। हमारे संगठन पर आरोप प्रत्यारोप काोई भी करे लेकिन हम दबने वाले नहीं।

डा आरपी मिश्रा प्रवक्‍ता माध्‍यमिक शिक्षक संघ

 

नोट- राजधानी में एक ऐसा कॉलेज है जिसमें शिक्षकों की नियुक्ति में ख्ोल हुआ। लेकिन तत्कालीन माध्यमिक शिक्षा निदेशक अमरनाथ वर्मा ने डीआईओएस को एक दिन पहले ही शाम को फोन करके जांच को रुकवा दिया। सवाल यह है कि जब डॉयरेक्टर ही जांच को रोकेंगे तो फिर कैसे रुकेगा भ्रष्टाचार? कौन सा था वह कॉलेज इसका खुलासा हम अगले अंक में करेंगे।

नोट- शिक्षा विभाग में किस तरह से हो रहा फर्जीवाड़ा और कैसे-कैसे होते हैं ख्ोल इस बारे में भी हम विस्तार से खुलासा करते रहेंगे। हमें किसी अधिकारी का भी रटा रटाया बयान नहीं छापना है जो हमारी इस मुहीम में जुड़ना चाहते हैं वह वह हमारी वेबसाइट पर लिख्ो नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं और उनके पास यदि भ्रष्टाचार से जुड़ा कुछ भी तथ्य है तो उसे बतायें हम उसे प्रमुखता से छापेंगे।

लखनऊ डीआइओएस की मनमानी, सीएम का आदेश ताक पर, हो रहा फर्जी वेतन भुगतान, कालीचरण कॉलेज का मामला

लखनऊ।(रविशंकर गुप्‍ता )  सरकारें आती जाती रहेंगी लेकिन सरकारी शिक्षा का स्तर नहीं सुधरने वाला है। क्योंकि विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ऐसे हैं जो मुख्यमंत्री का आदेश भी नहीं मानते हैं और अपनी मनमानी करते रहते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि भ्रष्टाचार में डूबे सरकारी शिक्षा तंत्र की शिकायत अब किससे और कहां की जाये। ताजा मामला कालीचरण इंटर कॉलेज का है। यहां पर शिक्षकों की तैनाती है 15 और वेतन 23 शिक्षक पा रहे हैं। वेतन भुगतान कराने में डीआईओएस मुकेश कुमार सिंह अपनी मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। ये बात जब माध्यमिक शिक्षक संघ को पता चली तो उसने भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। शिक्षक संघ ने खुद पार्टी बनकर इसमें माध्यमिक शिक्षा मंत्री व डिप्टी सीएम डा. दिनेश शर्मा से शिकायत की तो वेतन रोकने के आदेश हो गये। इसके बाद शिक्षक संघ ने सारे तथ्यों के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी शिकायत की तो भी आदेश हो गये कि वेतन रोककर प्रकरण की जांच की जाये लेकिन इस आदेश को भी ठेंगा दिखा दिया गया। ऐसे में सवाल ये भी अब माध्यमिक शिक्षा विभाग में डीआईओएस बड़ा है कि सीएम और डिप्टी सीएम?

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विज्ञापन में 15 शिक्षक, वेतन 23 का
माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रवक्ता आरपी मिश्रा ने जिन तथ्यों को सामने रखा है उसमें कॉलेज प्रबंधन और शिक्षा विभाग की मानमानी साफ नजर आती है। संघ के प्रवक्ता डा. आरपी मिश्रा का कहना है कि कॉलेज की ओर से शिक्षक भर्ती का विज्ञापन निकाला गया था उसमें 15 शिक्षकों की नियुक्ति का जिक्र किया गया था लेकिन बाद में 23 शिक्षकों को वेतन लिया जा रहा है। डा. मिश्रा ने बताया कि इसमें कुछ शिक्षक ऐसे हैं जो कि कभी कॉलेज नहीं जाते हैं लेकिन वेतन पूरा ले रहे हैं।

भर्ती के लिए 2०16 में निकाला गया था विज्ञापन
कॉल्ोज प्रबंधन की ओर से शिक्षक भर्ती के लिए 2०16 में विज्ञापन निकाला गया था। ये विज्ञापन हिन्दी दैनिक हिन्दुस्तान में 4 अक्टूबर 2०16 को प्रकाशित कराया गया। जबकि टाइम्स ऑफ इंडिया में 7 अक्टूबर 2०16 को प्रकाशित कराया गया। विज्ञापन के मुताबिक अनुज मिश्रा, रुक्मिणी, तुषार कांत राय, रितिका धवन रत्नेश ओझा, संगीता सिंह, सुशील कुमार सिंह, आलोक कुमार श्रीवास्तव, प्रशांत यादव, आशुतोष सिंह, योगेन्द्र प्रताप, सरीना खान, संदीप कुमार, अजय कुमार, विमलेश कुमार वर्मा का शिक्षक पद पर चयन किया गया। इस चयन प्रक्रिया में प्रो एपी सिंह अध्यक्ष, डा. आरके टंडन प्रबंधक, डा. महेन्द्र नाथ राय प्रधानाचार्य, चन्द्र गुप्ता सदस्य चयन समिति, विनोद कुमार शामिल थ्ो।

तत्कालीन डीआईओएस और प्रधानाचार्य की सांठगांठ से हुई नियुक्ति
माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रवक्ता डा. आरपी मिश्रा ने बताया कि ये सभी नियुक्तियं मानकों को ताक पर रख कर की गयी थी। इसमें तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक और प्रधानचार्य की मिली भगत सारा ख्ोल हुआ था। डा. मिश्रा ने बताया कि शिकायत दर्ज कराने पर पहले तो शिक्षकों को वेतन रोका गया लेकिन बाद में इसे जारी कर दिया गया। वेतन जारी होने के बाद डिप्टी सीएम डा. दिनेश शर्मा को शिकायती पत्र भ्ोजा गया था। लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ।

इस तरह चला कार्रवाई का क्रम, 
-9 जनवरी को डिप्टी सीएम डा. दिनेश शर्मा को पत्र दिया गया
-16 जनवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र दिया गया
-22 जनवरी को डिप्टी सीएम ने कार्रवाई के आदेश दिए
-24 जनवरी को सीएम योगी मुख्य सचिव की ओर से कार्रवाई के आदेश
-कार्रवाई का आदेश अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव माध्यमिक को मिला
-27 जनवरी को अपर मुख्य सचिव ने डायरेक्टर माध्यमिक को आदेश दिया।
-29 जनवरी को अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक को भी आदेश दिया गया।
-3० जनवरी को संयुक्त शिक्षा निदेशक को आदेश मिला।
-3० जनवरी को ही संयुक्त शिक्षा निदेशक ने डीआईओएस को कार्रवाई के साथ आख्या देने को कहा। 
-अब एक माह बीत जाने पर डीआईओएस अभी तक आख्या प्रस्तुत नहीं की और वेतन जारी है

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