लखनऊ डीआइओएस की मनमानी, सीएम का आदेश ताक पर, हो रहा फर्जी वेतन भुगतान, कालीचरण कॉलेज का मामला

लखनऊ।(रविशंकर गुप्‍ता )  सरकारें आती जाती रहेंगी लेकिन सरकारी शिक्षा का स्तर नहीं सुधरने वाला है। क्योंकि विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ऐसे हैं जो मुख्यमंत्री का आदेश भी नहीं मानते हैं और अपनी मनमानी करते रहते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि भ्रष्टाचार में डूबे सरकारी शिक्षा तंत्र की शिकायत अब किससे और कहां की जाये। ताजा मामला कालीचरण इंटर कॉलेज का है। यहां पर शिक्षकों की तैनाती है 15 और वेतन 23 शिक्षक पा रहे हैं। वेतन भुगतान कराने में डीआईओएस मुकेश कुमार सिंह अपनी मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। ये बात जब माध्यमिक शिक्षक संघ को पता चली तो उसने भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। शिक्षक संघ ने खुद पार्टी बनकर इसमें माध्यमिक शिक्षा मंत्री व डिप्टी सीएम डा. दिनेश शर्मा से शिकायत की तो वेतन रोकने के आदेश हो गये। इसके बाद शिक्षक संघ ने सारे तथ्यों के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी शिकायत की तो भी आदेश हो गये कि वेतन रोककर प्रकरण की जांच की जाये लेकिन इस आदेश को भी ठेंगा दिखा दिया गया। ऐसे में सवाल ये भी अब माध्यमिक शिक्षा विभाग में डीआईओएस बड़ा है कि सीएम और डिप्टी सीएम?

विज्ञापन में 15 शिक्षक, वेतन 23 का
माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रवक्ता आरपी मिश्रा ने जिन तथ्यों को सामने रखा है उसमें कॉलेज प्रबंधन और शिक्षा विभाग की मानमानी साफ नजर आती है। संघ के प्रवक्ता डा. आरपी मिश्रा का कहना है कि कॉलेज की ओर से शिक्षक भर्ती का विज्ञापन निकाला गया था उसमें 15 शिक्षकों की नियुक्ति का जिक्र किया गया था लेकिन बाद में 23 शिक्षकों को वेतन लिया जा रहा है। डा. मिश्रा ने बताया कि इसमें कुछ शिक्षक ऐसे हैं जो कि कभी कॉलेज नहीं जाते हैं लेकिन वेतन पूरा ले रहे हैं।

भर्ती के लिए 2०16 में निकाला गया था विज्ञापन
कॉल्ोज प्रबंधन की ओर से शिक्षक भर्ती के लिए 2०16 में विज्ञापन निकाला गया था। ये विज्ञापन हिन्दी दैनिक हिन्दुस्तान में 4 अक्टूबर 2०16 को प्रकाशित कराया गया। जबकि टाइम्स ऑफ इंडिया में 7 अक्टूबर 2०16 को प्रकाशित कराया गया। विज्ञापन के मुताबिक अनुज मिश्रा, रुक्मिणी, तुषार कांत राय, रितिका धवन रत्नेश ओझा, संगीता सिंह, सुशील कुमार सिंह, आलोक कुमार श्रीवास्तव, प्रशांत यादव, आशुतोष सिंह, योगेन्द्र प्रताप, सरीना खान, संदीप कुमार, अजय कुमार, विमलेश कुमार वर्मा का शिक्षक पद पर चयन किया गया। इस चयन प्रक्रिया में प्रो एपी सिंह अध्यक्ष, डा. आरके टंडन प्रबंधक, डा. महेन्द्र नाथ राय प्रधानाचार्य, चन्द्र गुप्ता सदस्य चयन समिति, विनोद कुमार शामिल थ्ो।

तत्कालीन डीआईओएस और प्रधानाचार्य की सांठगांठ से हुई नियुक्ति
माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रवक्ता डा. आरपी मिश्रा ने बताया कि ये सभी नियुक्तियं मानकों को ताक पर रख कर की गयी थी। इसमें तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक और प्रधानचार्य की मिली भगत सारा ख्ोल हुआ था। डा. मिश्रा ने बताया कि शिकायत दर्ज कराने पर पहले तो शिक्षकों को वेतन रोका गया लेकिन बाद में इसे जारी कर दिया गया। वेतन जारी होने के बाद डिप्टी सीएम डा. दिनेश शर्मा को शिकायती पत्र भ्ोजा गया था। लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ।

                  इस तरह चला कार्रवाई का क्रम,
-9 जनवरी को डिप्टी सीएम डा. दिनेश शर्मा को पत्र दिया गया
-16 जनवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र दिया गया
-22 जनवरी को डिप्टी सीएम ने कार्रवाई के आदेश दिए
-24 जनवरी को सीएम योगी मुख्य सचिव की ओर से कार्रवाई के आदेश
-कार्रवाई का आदेश अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव माध्यमिक को मिला
-27 जनवरी को अपर मुख्य सचिव ने डायरेक्टर माध्यमिक को आदेश दिया।
-29 जनवरी को अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक को भी आदेश दिया गया।
-3० जनवरी को संयुक्त शिक्षा निदेशक को आदेश मिला।
-3० जनवरी को ही संयुक्त शिक्षा निदेशक ने डीआईओएस को कार्रवाई के साथ आख्या देने को कहा।
-अब एक माह बीत जाने पर डीआईओएस अभी तक आख्या प्रस्तुत नहीं की और वेतन जारी है।

नोट- शिक्षा में भ्रष्टाचार के नाम पर ऐसी ही सिरीज आगे जारी रहेगी। इसके लिए हम जिम्मेदार अधिकारियों का भी पक्ष रखते हुए शेष अगले अंक में प्रसारित करेंगे। इसके अलावा अन्य कॉलेजों में भी शिक्षक भर्ती के नाम पर खेल हुआ है। लेकिन अधिकारी चुप हैं सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर  ऊपर से आदेश चलने के बाद नीचे की कार्रवाई को कौन प्रभावित कर रहा है।

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