मुख्यमंत्री जी बाटियां बेचकर बेटियां तो ब्याह दिया अब हमारे बुढ़ापे के बारे में सोचिए

  • सीतापुर महमूदाबाद शिमरी कताई मील में काम करने वाले मजूदरों की हालत दयनीय
  • -18 साल बाद भी नहीं मिला मजूदरों को न्याय, न पीएफ मिला न मिला वेतन
  • -सन 2००० में बंद हो गयी थी मील, आईएएस विजय शंकर पाण्डेय को कोस रहे मजूदर
  • -मजूदरों का आरोप आईएएस विजय शंकर पाण्डेय की एक डील पर मील को लग गया था ग्रहण
  • -अभी तक सपा ने दो बार और बसपा ने एक बार मजूदरों को दिया है आश्वासन का लालीपॉप अब सीएम योगी से है उम्मीद

रविशंकर गुप्ता लखनऊ

लखनऊ। सीतापुर समेत उत्तर प्रदेश में कताई मीलों की दशा चाहे जो भी हो लेकिन इन मीलों में काम करने वाले मजूदरों की दिशा और दशा जरूर खराब हो चुकी है। मीलों के बंद होने के बाद मजूदर किस दशा में अपना जीवन यापन कर रहे हैं इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। मजूदरों के पीएफ से लेकर बकाया व्ोतन आजतक भुगतान नहीं हो सका और उनके हाथों से रोजगार अलग चला गया। मजदूर कभी मंत्री की चौखट चूमते हैं तो कभी मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से न्याय की गुहार लगाते हैं यहां तक प्रशासनिक अफसरों से भी न्याय की मांग करते हैं लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। मजूदरों का दर्द यह कि आज 18 साल बाद भी कभी बसपा ने तो कभी सपा ने उन्हें सिर्फ आश्वासन ही दिया है। ऐसे में अब योगी सरकार उनकी सुध लेगी और उनको उनका हक मिलेगा ऐसी उम्मीद लगाये बैंठे हैं मजदूर। ऐसे ही कुछ मजदूरों की कहानी इंडिया न्यूज टाइम्स डॉट इन ने जिम्मेदार हुक्मरानों के सामने रखने की कोशिश की है।

मील बंद होने के बाद चोखा बाटी बेचकर चला रहे परिवार का खर्चा

बिहार के शिवान जिले के रहने वाले मजूदर रामजी लाल अपनी पत्नी के साथ 1989 में सीतापुर रोजगार की खोज में आ गये थे। उस समय उन्हें महमूदाबाद शिमरी कताई मिल में मजूदरी करने का मौका मिल गया। करीब 12 साल चली नौकरी उनकी तब चली गयी जब उनको तीन हजार रुपए वेतन मिलने लगा था। सन 2००० में नौकरी जाने तक उनके चार बच्चे हो चुके थे। जिनमें दो बेटियां सबसे बड़ी हैं। उनकी शादी किसी तरह से कर्ज और चोखा बाटी से होने वाली प्राफिट से कर दी है। अब दो बेटों का भविष्य और उनके खुद की जीवन यापन की अभी एक बड़ी जिम्मेदारी उन्हें खुद निभानी है। तो रामजी लाल मुख्यमंत्री से यही अपनी फरियाद लिए बैठे हैं कि जवानी में बाटियां बेचकर बेटियां तो ब्याह दिया लेकिन अब बुढ़ापा कैसे कटेगा।
पत्नी के साथ खोलते हैं चोखा बाटी की दुकान
रामजी लाल बताते हैं चोखा बाटी की दुकान चलाने का हौसला उनकी पत्नी पुष्पा देवी ने दिया। जब मील को बंद कर दिया गया तो उनकी हिम्मत टूट गयी उन्होंने सोचा कि किस तरह से आगे परिवार को पालेंगे लेकिन पत्नी ने हिम्मत नहीं टूटने दिया। आज करीब 18 साल से चोखा बाटी बेचकर परिवार का गुजारा कर रहे हैं।
चोखा बाटी के बिजनेस से ही किया दोनो बेटियों का विवाह
रामजी लाल बताते हैं सन दो हजार में मील बंद हो गयी थी जिसके बाद चार बच्चों को पालना बहुत मुश्किल था। उन्होंने बताया कि उसमें बेटियां दोनो ही बड़ी थी जबकि बेटे छोटे थे। रामजी लाल कहते हैं बड़ी बेटी शिल्पी (35) और छोटी बेटी सपना (3०) का विवाह हमने चोखा बाटी की दुकान चलाकर ही किया। उन्होंने बताया कि पैसों को जोड़ने में उनकी पत्नी ने भी बहुत सहयोग किया।

मजदूर बंसत लाल यादव का भी दुख काोई सुन ले

कताई मील में मजूदरी करने वाले बंसत लाल यादव की भी दस्तान कुछ कम दुख भरी नहीं है। बंसत लाल बताते हैं कि 2००० में मील बंद होने के बाद दो तीन साल तक तो अपने पीएफ और बकाया वेतन लेकर कभी इस अधिकारी के चक्कर तो कभी उस अधिकारी चक्कर लगाते रहे लेकिन काोई सुनवाई नहीं हुई। अंत में कर्जा लेकर छोटी से दुकान शुरू की। जिसमें दैनिक उपयोग वाली सभी चीजों का रखकर बेचना शुरू किया उसी से किसी तरह दाल रोटी चल रहा था। मजदूर बंसत लाल कहते है फैक्ट्री में जिस तरह हम लोगों को काम मिला था उससे बड़े अरमान थ्ो लेकिन सारे अरमानों पर पानी फिर गया।

अपना बिजनेस के साथ संघर्ष जारी है

मजदूर टीम के लीडर रहे चुके बब्लू सिंह कहते हैं कि जब मील बंद हुआ तो सबकी सैलरी भी फंस गयी और पीएफ भी नहीं मिल पाया। कुछ दिनों तक उम्मीद लगाये रहे कि मील चालू होगा और काम मिलेगा लेकिन न तो मील चालू हुआ न ही काम मिला और भुखमरी के कगार पर अलग पहुंच गये। बब्लू ने बताया कि किसी तरह से खुद एक दुकान खोली जिसमें परिवार का भी सहारा मिला और किसी तरह से अब दाल रोटी चल रही है। लेकिन अधिकारियों से न्याय आज तक नहीं मिला।

मैनेजमेंट जमीन से अभी वसूल रहा लाखों रुपया
मील को जो मैनेजम्ोंट है वह मील की जमीन से अभी भी लाखो रुपए कमा रहा है। मील के मजूदरों ने बताया कि करीब 1०० बीघा जमीन है ऐसी है जिसे किराये पर ख्ोती करने के लिए दिया गया उसके एवज में मैनेजमेंट को लाखों रुपए मिलते हैं लेकिन हम लोगों को पैसा देने के लिए मैनेजमेंट के पास नहंी है। मजूदरों ने बताया कि मील के जीएम एनके त्रिपाठी और मील इंजीनियर वीके मिश्रा से जब हम लोग पैसों की बात करते हैं तो वह लोग सिर्फ टाल मटोल करते हैं।

मजूदरों को सन 2००० में मिलता था तीन हजार वेतन
मजदूरों ने बताया कि जब मिल बंद हुआ था तब हमारी सैलरी तीन हजार से लेकर साढ़े तीन हजार रुपए तक थी। हर महीने का पीएफ भी कटता था। ऐसे में आज के समय हमारी सैलरी किसी सरकारी कर्मचारी से कम नहीं होती लेकिन न तो बकाया सैलरी मिली न ही पीएफ मिल सका है।

8०० से अधिक मजूदर अब सड़क पर और उम्र हो गयी 6० वर्ष
मील में 8०० मजूदर काम करते थे जिसमें अब बहुत से ऐसे मजदूर हैं जिनकी उम्र 6० या फिर उसे अधिक भी हो चुकी है। ऐसे में मजूदरों का कहना है कि मील चाल हो या न हो लेकिन उनका बकाया पीएफ और वेतन मिल जाये तो उनको इतना मिल जायेगा कि उनके बुढ़ापे में काम आयेगा।

सन 1986-87 से काम रहे थे मजूदर
मजूदरों ने बताया कि उन्होंने मील में उनकों काम 1986-87 में मिला था। और उन्होंने सन 2००० तक काम लगातार किया। इस दौरान वेतन मिलता था लेकिन मील बंद होने के करीब 6 माह पहले से न तो वेतन दिया गया न ही उनका पुराना पीएफ मिल सका। ऐसे में मजूदरों ने जब न्याय के लिए शासन प्रशासन में गुहार लगायी तो कभी प्रदर्शन किया लेकिन काोई सुनवाई नहीं हुई।

सपा और बसपा ने भी दिया लालीपाप
मजूदर बताते हैं कि समाजवादी पार्टी की सरकार में एक बार जब मुख्यमंत्री मुलायम सिंह थ्ो तो उन्होंने आश्वासन दिया कि सब सुधर जायेगा लेकिन कुछ नहीं हुआ। यही हाल बसपा शासनकाल में भी उसमें में भी प्रार्थना पत्र लेकर आश्वासन तो दे दिया गया लेकिन हुआ कुछ भी नहीं। उसके बाद जब दोबारा सपा की सरकार बनी तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से भी गुहार लगायी लेकिन उनको कुछ राहत नहीं मिली। मजूदरों ने कहा कि अब सीएम योगी से एक उम्मीद है अगर इस सरकार में कुछ भला नहीं हुआ हो तो हम समझ लेंगे अब हमारा दुर्भाग्य ही है।

आईएएस विजय शंकर पाण्डेय की एक डील से चौपट हुई मील
मजदूर बताते हैं उस समय सभी मीलं की कमान आईएएस विजय शंकर पाण्डेय के हाथ में थी। मजदूरों ने बताया कि उन्होंने विजय शंकर पाण्डेय ने करीब 7०० करोड़ रुपयों की डील की थी। ये डील महाराष्ट्र कार्टन कार्पोरेशन से हुई थी। जब मील ये रकम नहीं चुका पाया और इस रकम के बदले माल नहीं उपलब्ध करा पाया तो महाराष्ट्र कार्टन कार्पोरेशन अपने पैसे रिकवर करने के लिए हीाईकोर्ट चला गया। जिसके बाद मील की मशीने तक नीलाम हो गयी और मील बंद हो गया और 8०० मजूदरों के घरों में चूल्हे ठंडे हो गये।

मजदूरों ने कहा ये है हमारी मांग
-बकाया वेेेतन दिया जाये
-हो सके तो मील को पुन: चालू कराया जाये
-12 साल का पीएफ भी दिया जाये
-दोषियों पर कार्रवाई भी हो
-किराये पर दी गयी जमीन से मिलने वाले पैसे मजूदरों को दिया जाये