एसके शुक्ला बने लखनऊ विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति, प्रो. एसपी सिंह का कार्यकाल समाप्त

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रो. एसपी का कुलपति पद से कार्यकाल समाप्त हो चुका है ऐसे में अब कार्यवाहक कुलपति एसके शुक्ला को बनाया गया है। इस संबंध में राजभवन से पत्र भी जारी कर दिया गया है। ऐसे में एसके शुक्ला अगला कुलपति नियुक्त होने तक विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्य देखेंगे। इस बारे में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल की ओर से आदेश भी जारी कर दिया गया है। बता दे कि एसके शुक्ला मौजूदा समय में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलसचिव भी हैं। कार्यवाहक कुलपति के रूप में एसके शुक्ला का कार्यकाल 6 माह तक हो सकता है। इस बीच यदि किसी कुलपति की तैनाती जाती है तो वह उन्हे इस पद से मुक्त किया जायेगा। गौरतलब है कि विश्वविद्यालय के कुलपति रहे प्रो. एसपी सिंह का पहले कार्यकाल बढऩे की चर्चा चल रही थी। लेकिन राज्यपाल की ओर से इस बारे में कोई निर्णय नहीं आया।
विश्वविद्यालय के शिक्षकों की नारजगी पड़ी भारी
कुलपति रहे एसपी सिंह पर विश्वविद्यालय के शिक्षकों की नाराजगी भारी पड़ी। विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ ने कई तरह की गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए एसपी सिंह के खिलाफ राजभवन को पत्र भेजकर उनके हटाये जाने की मांग की थी। शिक्षक संघ ने एसपी सिंह के कार्यकाल में हुई गड़बडिय़ों की जांच सीबीआई से भी कराने की मांग की थी। लूटा ने कुलपति को हटाए जाने का प्रस्ताव भी पारित कर दिया था। लूटा ने कुलपति पर वित्तीय अनिमितता का आरोप लगाया है। हालंाकि इस प्रस्ताव के बाद कुलपति के कुछ खास शिक्षकों की लूटा पदाधिकारियों से झड़प भी हो गई थी।
पक्षपात का भी लगा आरोप
प्रो. एसपी सिंह शिक्षकों की प्रोन्नति की चयन समिति में पक्षपात एवं अनियमितता किए जाने की जमकर आलोचना हुई। कार्य परिषद सदस्य व परशियन विभाग के डॉ तकी अली ने कहा बिना जांच के चयन समिति के लिफाफे नहीं खुलने चाहिए। साथ ही सदन ने विश्वविद्यालय में व्याप्त वित्तीय एवं शैक्षणिक अनियमितता की घोर निंदा की थी। सदन ने कहा कि कुलपति पिछले तीन सालों से मनमाने ढंग से काम किया है। लूटा अध्यक्ष डॉ नीरज जैन व महामंत्री डॉ विनीत ने कहा कि कहा कि कुलपति ने 3 साल में ठेकेदार और इंजीनियर की भूमिका में कार्य किया है। इसी जांच सीबीआई से होनी चाहिए।

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