एसजीपीजीआई में होगी सुपर स्पेशलियटी रोबोटिक सर्जरी, फ्री में होंगे 250 ऑपरेशन, जानिए क्या है फायदे

लखनऊ। राजधानी के एसजीपीजीआई को एक बड़ी सौगात मिली है। अब यहां पर सुपर स्पेशलियटी रोबोटिक सर्जरी फ्री में की जायेगी। लेकिन इसकी संख्या निर्धारित है ऐसे में 250 लोग इसका लाभ पा सकेंगे। ऐसे में एसजीपीजीआई शल्य क्रिया की विश्व की आधुनिकतम तकनीक का इस्तेमाल करने वाला प्रदेश का प्रथम संस्थान बन गया है। वहीं सिर्फ सुपर स्पेशलियटी सर्जरी करने वाला देश का पहला इंस्टीट्यूट बना। एसजीपीजीआइ में गत दस वर्षों से रोबोटिक सर्जरी के लिए प्रयास किया जा रहा था। शनिवार को यहां पहुंचे चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोेष टंडन ने रोबोटिक सर्जरी व लीनियर एक्सीलरेटर मशीन मरीजों को देकर एक बड़ी उपलब्धि कायम की। इसके अलावा लीनियर एक्सीलरेटर से कैंसर मरीजों की रेडियोथेरेपी की वेटिंग घटेगी। इसके अलावा एसजीपीजीआइ के रेजीडेंट अभी तक विदेश में जाकर रोबोटिक सर्जरी का प्रशिक्षण हासिल करते आयें हैं। इसके लिए उन्हें साढ़े तीन से साढ़े छह हजार डॉलर शुल्क देना पड़ेगा। मगर, अब वह संस्थान में ही मुफ्त में ट्रेनिंग प्राप्त कर सकेंगे, ऐसे में देश में रोबोटिक सर्जन बढ़ेंगे।
मरीज को देना होगा हस्पिटल खर्च
मरीजों को आपरेशन के दौरान सिर्फ हास्पिटल खर्च का भुगतान करना पड़ेगा। अभी तक राजधानी में ऐसी कोई सुविधा न होने के कारण मरीजों को बाहर से इलाज कराना पड़ता था लेकिन अब उन्हें इधर उधर नहीं भटकना पड़ेगा। इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए सीएमएस डॉ अमित अग्रवाल ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी का शुल्क डेढ़ लाख रुपये प्रति मरीज तय किया गया है। वहीं शुरुआत के 250 ऑपरेशन रोबोट द्वारा फ्री किए जाएंगे। इस दौरान मरीज को सिर्फ हॉस्पिटल का खर्च ही देना होगा।
देश भर में 60 राबोटिक सर्जरी सेंटर है
सीएमएस ने बताया कि एसजीपीजीआई से पहले देश भर में 60 रोबोटिक सर्जरी सेंटर स्थापित हैं। इनमें जनरल आपरेशन भी रोबोट के माध्यम से किए जाते हैं। वहीं एसजीपीजीआई में 250 में आठ आपरेशन अभी तक फ्री किए जा चुके है।
भर्ती के लिए नहीं करनी होगी सिफारिश
इस मौके पर चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने कहा कि अब मरीजों की भर्ती के लिए किसी की सिफारिश नहीं करनी पड़ेगी। सरकार यहां बेडों की कमी पूरी करने के लिए प्रयासरत है, और यह समयस्या जल्द ही दूर हो जायेगी। वहीं राज्य के अन्य चिकित्सा संस्थानों में भी रोबोटिक सर्जरी को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए बैंक से लोन लेकर संस्थान रोबोट खरीदेंगे। इसकी गारंटी सरकार लेगी। वहीं धन की अदायगी भी सरकार ही करेगी।
किडनी ट्रांसप्लांट पकड़ेगा रफ्तार
निदेशक डॉ. राकेश कपूर ने कहा कि शासन को पीजीआइ का रोड मैप सौंप दिया गया है। इसमें अधूरे प्रोजेक्ट अक्टूबर तक पूरे होने का लक्ष्य है। खासकर 210 बेड की इमरजेंसी मेडिसिन व रीनल ट्रांसप्लांट सेंटर बनकर तैयार हो जाएगा। ऐसे में किडनी ट्रांसप्लांट रफ्तार पकड़ेगा। अभी ट्रांसप्लांट की एक वर्ष की वेटिंग चल रही है। ऐसे में सप्ताह में दो होने वाले ट्रांसप्लांट भविष्य में 10 हो सकेंगे।
रोबोट से तीन सुराख से होगा दिल का ऑपरेशन
पीजीआइ में प्रथम चरण में चार विभागों के डॉक्टरों को रोबोटिक मशीन का प्रशिक्षण दिया गया है। इसमें सीवीटीएस विभाग भी शामिल हैं। ऐसे में अब हार्ट का ऑपरेशन भी आसान हो गया है। वहीं 18 वर्षीय युवती की राज्य में पहली रोबोटिक सर्जरी हुई। पीजीआइ में सीएमएस डॉ.अमित अग्रवाल के मुताबिक इंडोक्राइन, गैस्ट्रो, यूरोलॉजी, सीवीटीएस विभाग के आठ डॉक्टरों का प्रशिक्षण हो गया है। ऐसे में सीवीटीएस विभाग के कार्डियक सर्जन अब वॉल्व रिप्लेसमेंट, जन्मजात दिल में छेद की बीमारी एसएसडी, वीएसडी के लिए मरीजों की छाती की हड्डी (स्टरनम) काटे बगैर ही ऑपरेशन कर सकेंगे। इसमें सिर्फ वह तीन सुराख कर ही रोबोटिक मशीन से हार्ट तक पहुंच सकेंगे। इसके अलावा ऑर्गन ट्रांसप्लांट में डोनर की किडनी भी बिना चीरा लगाए रिमूव की जा सकती है। वहीं संस्थान में शाहजहांपुर निवासी 18 वर्षीय युवती की पहली रोबोटिक सर्जरी की गई। इसमें उसके बगल से थॉयरॉयड ग्लैंड निकाली गई। इससे उसके गले में निशान भी नहीं पड़ा।
अमेरिका की तर्ज पर एडवांस सर्जरी
डॉ. अमित अग्रवाल ने कहा कि 30 करोड़ की लागत का यही रोबोट अमेरिका में भी हैं। इसपर आठ डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिया गया है। यह इंडोक्राइन, कार्डियक, यूरोलॉजी, गाइनी, गैस्ट्रो विभाग हैं। यह चिकित्सक एड्रीनल सर्जरी, थॉयमस ग्लैंड सर्जरी, हार्ट का वॉल्व रिप्लेसमेंट, एएसडी, वीएसडी, लंग सर्जरी, रीनल नेफ्रेक्टॉमी, रेक्टल व बड़ी आंत के कैंसर समेत पेट के अन्य ऑपरेशन करेंगे। दूसरे चरण में अन्य विभागों को शामिल किया जाएगा।
रोबोटिक सर्जरी के फायदे
मरीज में सटीक ऑपरेशन, गलती की गुंजाइश नगण्य, रक्त वाहिका कटने का झंझट खत्म, रक्त स्राव में कमी, बड़े चीरा का झंझट खत्म, अस्पताल में स्टे कम, संक्रमण की गुंजाइश कम, चीरा के निशान नहीं बनेंगे।