पुनर्वास विवि ने मनाया छठा दीक्षांत, बोले रामभद्राचार्य ऊं शांति शांति नहीं अब ऊं क्रांति की जरूरत

लखनऊ। दीक्षांत का अर्थ भले ही दीक्षा का अंत है लेकिन असल दीक्षा तो दीक्षांत के बाद ही शुरू होती है, इस लिए अब ऊं शांति-शांति नहीं ऊं क्रांति की जरूरत है। बड़ी खुशी होती है कि दिव्यांगो की प्रतिभा जब सामने देखने को मिलती है। इसलिए शारीरिक रूप से अक्षम छात्रों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी दिव्यांग कहा है, क्योंकि वह जानते हैं दिव्यांगो की प्रतिभा को पहचानने की जरूरत है। मेरा सपना है पूरे देश में दिव्यांग किसी से भी पीछे न रहे। ये बात गुरूवार को डा. शकुुंतला मिश्रा पुनर्वास विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह के मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पद्म विभूषण जगद् गुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्रीरामभद्राचार्य ने कही। उन्होंने मेडल विश्वविद्यालय के सभी छात्रों से कहा कि असली पूजा तो आपकी तब पूरी होगी जब अब कर्म में डूब जाये और मंदिर जाने का ध्यान ही न रहे। उन्होंने कहा कर्म ही पूजा है जब आप निरंतर प्रयास जारी रखेंगे तो सफलता जरूर मिलेगी। इससे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा कृष्ण पाल सिंह ने विश्वविद्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर अपर मुख्य सचिव दिव्यांगजन सशक्तिकरण महेश कुमार गुप्ता, विश्वविद्यालय के कुलसचिव अमित कुमार सिंह, सामान्य परिषद, कार्य परिषद एवं विद्या परिषद के सदस्यगण, शिक्षकगण, अधिकारी एवं कर्मचारी, छात्र-छात्राओं सहित अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित थे।
मेरा सपना तब पूर होगा जब दिव्यांग बने प्रधानमंत्री और राष्टï्रपति
स्वामी श्रीरामभद्राचार्या ने गुरुवार को कहा कि बहुत हो चुका अब दिव्यागों का शोषण नहीं सहूंगा। उन्हें पढ़ाकर इतना सामर्थ्यवान बना देंगे कि सामान्य लोगों के बराबर चलेंगे। उन्होंने दिव्यांगों के लिए एक मेडिकल कॉलेज खोलने का ऐलान भी किया। उन्होंने कहा कि मेरा सपना तब पूरा होगा जब देश का दिव्यांग भी भारत का प्रधानमंत्री और राष्टï्रपति बने। उन्होंने श्रीरामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय का जिक्र करते हुए कहा कि वह दिव्यांगों को इंजीनियर और डाक्टर बनाएंगे। उन्होंने कहा कि दीक्षा का अंत अर्थात विश्राम नहीं हो रहा है। बल्कि यहां से दीक्षा की शुरूआत हो रही है। आज हम इस विश्वविद्यालय के स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध छात्र-छात्राओं को एक यज्ञ विशेष के लिए दीक्षित कर रहे हैं। वह है यज्ञ है राष्ट्र सेवा। उन्होंने कहा कि राष्ट्र को देवता मानकर उसकी सेवा करो। दीक्षांत शब्द से अभिहित किया जाता है।
जिससे राष्टï्र का मंगल होता है, वह राम हैं
जगद् गुरु श्रीरामभद्राचार्य ने सभागार में बैठे लोगों के सामने सवाल किया कि क्या राम साम्प्रदायिक हैं? जिन्हें शिक्षा की एबीसीडी नहीं आती वह भगवान राम के बारे में बोलते हैं। उन्होंने कहा कि राम का अर्थ है राष्ट्र और राम का अर्थ है मंगल अर्थात जिससे राष्ट्र का मंगल होता है वह राम हैं। उन्होंने कहा राम के बारे में बोलने से पहले जान लेना चाहिए उनके जीवन के बार उन्होंने का त्याग और तपस्या का भाव जिसमें है वह राम है। इस दौरान उन्होंने जय श्रीराम का नारा भी लगाया और छात्रों से अपील की कर्म को विशेष महात्व दें।
सिर्फ पढ़ाना ही शिक्षक का काम नहीं
लखनऊ, । चित्रकूट के जगद गुरू रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय के संस्थापक व कुलपति पद्मविभूषण रामभद्राचार्य ने कहा कहा मेरे विश्वविद्यालय के कोई छात्र टेंशन मेेंं नहीं है। मैं दुनिया की हर भाषा को जानता हूं, सिर्फ उर्दू नहीं जानता। सिर्फ पढ़ाना ही शिक्षक का काम नहीं है, क्योंकि यह काम तो अशिक्षित और सुवर भी कर सकता है। अगले वर्ष में अपने चित्रकूट विश्वविद्यालय को मेडिकल विश्वविद्यालय बनाऊंगा। समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने की। कार्यक्रम में छात्राओं को 112 मेडल दिए गए।
दिव्यांग प्रकृति की विशेष संतान
दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि जिस प्रकार से मात-पिता को अपने बच्चों से अपेक्षाएं होती हैं। उसी प्रकार विश्वविद्यालय को भी शिक्षा ग्रहण कर यहां से जा रहे विद्यार्थियों से है। हम उम्मीद करते हैं कि आप हमारी उम्मीद पर खरे उतरेंगे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक दिव्यांग प्रकृति की विशेष संतान हैं। भगवान ने जो शक्ति दी है उसे जागृत करें।
विधि पांडे बनी विवि की सर्वश्रेष्ठ छात्रा
दीक्षांत समारोह में विवि की सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी के खिताब से एमएससी एप्लाइड सांख्यिकी की छात्रा विधि पांडे को नवाजा गया। उन्हें चांसलर गोल्ड मेडल दिया गया। इसी कोर्स की छात्रा वैष्णवी गोपाल को चांसलर सिल्वर और एमएससी आईटी के हरसल कुमार जायसवाल को कांस्य पदक से नवाजा गया। समारोह में 42 स्वर्ण, 35 रजत और 35 कांस्य पदक दिया गया। इसमें 75 मेडल छात्राओं और 37 मेडल छात्रों को मिले। 42 गोल्ड मेडल में 32 छात्राओं और 10 छात्रों के हिस्से में आए। 85 विद्यार्थियों में 58 छात्राएं और 27 छात्रों को मेडल मिले। कुलपति प्रो. राणा कृष्ण पाल सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि विवि में डिजिटल मू्ल्यांकन की व्यवस्था लागू करने जा रहे हैं।
दिव्यांगों के अंदर होती है एक विशिष्टï प्रतिभा-राज्यपाल
दीक्षान्त समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि दिव्यांगों के अन्दर प्रकृति प्रदत्त एक विशिष्ट प्रतिभा और रचनात्मकता होती है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास ऐसे दिव्यांग समूह जो अपनी नैसर्गिक प्रतिभा और दिव्य दृष्टि के बावजूद समाज के हासिये पर छूट गया था, को बाधा रहित, अनुकूल एवं सुगम परिवेश प्रदान करना होना चाहिए। उन्हें शिक्षण-प्रशिक्षण एवं कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराये जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे भीतर उनके प्रति करूणा से ज्यादा कृतज्ञता का भाव होना चाहिए।राज्यपाल ने कहा कि वंचित और अक्षम लोगों को नजरंदाज करके आर्थिक विकास के चाहे जितने रास्ते खुलते हों, वे किसी राष्ट्र के समग्र विकास के रास्ते कतई नहीं हो सकेंगे, क्योंकि सभ्यता और राष्ट्र के उत्थान एवं उन्नयन का रास्ता सही मायने में वंचित और उपेक्षित समुदायों के बीच से होकर ही गुजरता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ शिक्षा ही नहीं, जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी सबके लिए समान अवसरों की उपलब्धता स्वतंत्रता संघर्ष का एक बड़ा ‘विजन’ रहा है। आनंदीबेन पटेल ने डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय दिव्यांग समुदाय को गुणवत्तापरक उच्च शिक्षा, प्रशिक्षण एवं पुनर्वास के माध्यम से समाज और विकास की मुख्य धारा से जोडऩे का अनुकरणीय कार्य कर रहा है।
1001 उपाधि प्रदान की गयी
राज्यपाल ने दीक्षान्त समारोह के अवसर पर 1001 उपाधि एवं पदक प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि आप सभी जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अपने उत्कृष्ट कार्यों द्वारा राष्ट्र-निर्माण एवं मानवता के हित में योगदान दें। उन्होंने कहा कि हम सभी का दायित्व है कि विश्व के मानचित्र पर भारत को एक महत्वपूर्ण, प्रभावशाली एवं श्रेष्ठ राष्ट्र बनाने में स्वयं को तथा अपने संसाधनों को अर्पित करें।
राज्यपाल ने अपने सम्बोधन से पहले विभिन्न विषयों में सर्वोच्च अंक हासिल करने वाले छात्र-छात्राओं को पदक एवं उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया।

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