सरकारी स्कूलों में 30 अक्टूबर से लागू हो जायेगा प्रेरणा ऐप, मंत्री ने बैठक कर अधिकारियों को दिए अहम निर्देश

लखनऊ। प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था सुधरे इसके लिए योगी सरकार हर संभव कदम उठा रही है, वहीं हम सबकी भी जिम्मेदारी है कि विभागीय कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। विभाग में किसीभी प्रकार की लापवाही होती है तो उसके लिए अधिकारी जिम्मेदार होंगे, ये बात बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार डा. सतीश द्विवेदी ने शुक्रवार को बेसिक शिक्षा निदेशालय में अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक में कही। उन्होने अधिकारियों/कर्मचारियों को निर्देशित किया कि वह पूरी मेहनत एवं ईमानदारी से अपने कार्यों एवं दायित्वों का निर्वहन करना सुनिश्चित करें एवं विभागीय कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता एवं लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी।
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि 30 अक्टूबर तक प्रेरणा एप के माध्यम से प्रदेश के सभी विद्यालयों की अवस्थापनात्मक सुविधाओं जैसे-शौचालय, पेयजल, विद्युतीकरण, इत्यादि की प्रमाणिक सूचना प्राप्त कर प्रदेश के सभी विद्यालयों को श्यामपट्ट, शौचालय, पेयजल, विद्युतीकरण से 30 मार्च, 2020 तक संतृप्त कराया जायेगा। उन्होंने कहा कि 30 मार्च, 2021 तक प्रदेश के सभी विद्यालयों को अन्य सभी मूलभूत अवस्थापनात्मक सुविधाओं जैसे-फर्श मरम्मत/टाइल्स का कार्य, बाउण्ड्रीवॉल एवं गेट आदि सुविधाओं से संतृप्त किया जायेगा।
मानव संपदा पोर्टल से होगा शिक्षकों की समस्या का समाधान
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों के प्रांगण में अवस्थित अति-जर्जर एवं निष्प्रयोज्य पुराने भवनों को गिराकर मलबे को हटाये जाने के आदेश शीघ्र ही निर्गत कराये जायेंगें। कस्तूरबा गॉंधी बालिका विद्यालयों में गुणात्मक सुधार के लिए परफार्मेन्स इंडीकेटर्स निर्धारित कर, श्रेणीकरण की व्यवस्था लागू की गई है। समग्र शिक्षा (सर्व शिक्षा अभियान) में पीएफएमएस लागू करने का लक्ष्य जनवरी, 2020 निर्धारित किया गया है। उन्होंने मानव सम्पदा पोर्टल के माध्यम से शिक्षको के अवकाश का ऑनलाइन निस्तारण, देयकों के भुगतान एवं सेवा पुस्तिका का ऑनलाइन रख-रखाव किये जाने के निर्देश दिये गये।
डॉ0 द्विवेदी ने विभागीय क्रियाकलापों, नवाचार, गुणवत्ता आदि के लिये एक मासिक पत्रिका प्रेरणा निकाले जाने का निर्देश दिया। शिक्षा में गुणवत्ता सुधार के दृष्टिगत दीक्षा एप के माध्यम से शिक्षकों की क्षमता वृद्धि की जायेगी एवं लर्निंग आउटकम्स के लिए परीक्षा का आयोजन भी किया जायेगा। बालिका शिक्षा के सशक्तीकरण हेतु मीना मंच को अत्यधिक प्रभावी करने के लिए जनपदीय स्तर पर रैलियों का आयोजन एवं नियमित बैठकें आहूत करने हेतु निर्देशित किया।
हर साल 12 जनवरी को होगा प्रदेश स्तरीय एक बड़ा आयोजन
डा. द्विवेदी ने 13 एवं 14 दिसम्बर, को राष्ट्रीय स्तर का सेमिनार आहूत किये जाने का निर्देश दिया। इस सेमिनार में समस्त प्रदेशों से 5 प्रतिभागी एवं उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जनपद से 5 प्रतिभागियों (जिसमें 1 अधिकारी भी सम्मिलित होगा) द्वारा प्रतिभाग किया जायेगा। सेमिनार में शोध-पत्र प्रस्तुत कर शिक्षा विभाग से संबंधित विभिन्न नवाचारों पर विचार-विमर्श किया जायेगा। इसके अतिरिक्त उन्होंने निर्देशित किया कि स्वामी विवेकानन्द जी की जयन्ती पर, प्रत्येक वर्ष 12 जनवरी को शिक्षकों एवं छात्रों का प्रदेश स्तरीय एक बड़ा आयोजन किया जायेगा। उन्होंने प्रत्येक माह अनिवार्य रूप से शिक्षक एवं अभिभावकों की नियमित बैठक आहूत किये जाने के निर्देश दियेे। इस बैठक में प्रत्येक माह के प्रथम सोमवार (अवकाश की स्थिति में अगले कार्य दिवस में) को आहूत की जायेगी। इसके अतिरिक्त उन्होंने प्रत्येक वर्ष के फरवरी माह में समस्त विद्यालयों में वार्षिकोत्सव आयोजित किये जाने के निर्देश भी दिये।
बच्चों को दिया जाये मेन्यू के अनुसार भोजन
डॉ0 द्विवेदी ने कहा कि मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता के अनुश्रवण हेतु ’मॉं’ समूह का गठन किया गया है। उन्होने अधिकारियों से कहा कि मध्यान्ह भोजन में किसी प्रकार की लापरवाही नही की जाये, इसका ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होने कहा कि बच्चों को अच्छा एवं गुणवत्तायुक्त भोजन निर्धारित मीनू के अनुसार उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित किया जाये तथा प्रत्येक वर्ष समस्त छात्रों का एक बार अनिवार्य रूप से स्वास्थ्य परीक्षण कराये जाने के भी निर्देश प्रदान किये। इस अवसर पर बैठक में अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा, रेणुका कुमार ने विभागीय अधिकारियों से कहा कि आज की बैठक में मंत्री द्वारा जो निर्देश दिये गये हैं, उनका पालन अवश्य किया जाये। राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा अभियान एवं निदेशक मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण,विजय किरन आनन्द ने शिक्षा विभाग द्वारा संचालित प्रमुख योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की। बैठक में निदेशक, बेसिक शिक्षा, डॉ. सर्वेन्द्र विक्रम बहादुर सिंह एवं शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी भी शामिल रहे।

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