अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर पुनर्विचार याचिका की तैयारी, लखनऊ में मुस्लिम पक्ष की हुई बैठक, इकबाल ने कहा कोर्ट का ही निर्णय मान्य

लखनऊ के मुमताज पीजी कॉलेज में रामजन्म भूमि के फैसले को लेकर बैठक करते मुस्लिम पक्षकार
न्यूज डेस्क। अयोध्या में रामजन्म भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद भी तमाम तरह की चर्चाएं हो रही हैं तो मुस्लिम का एक पक्ष फैसले को मानने के तैयार नहीं है, इस संबंध में रविवार को लखनऊ के मुमताज पीजी कॉलेज में एक बैठक हुई। इस कॉलेज में बैठक का निर्णय करीब आधा घंटा पहले लिया गया इससे पहले ये बैठक नदवातुल उलमा में होनी थी, लेकिन प्रशासन ने अनुमति नहीं दी। वहीं मुमताज पीजी कॉलेज में हुई बैठक के दौरान ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनाल बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सही नहीं बताया और पुनर्विचार याचिका डालने की बात कही। बोर्ड ने मस्जिद के लिए पांच एकड़ भूमि इन्कार किया और कहा यह शरीयत के खिलाफ है।
इकबाल अंसारी पर दिया गया बड़ा बयान
बता दें कि अयोध्या फैसले को लेकर मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी अभी भी अपने ही निर्णय पर हैं, इकबाल अंसारी जो बयान फैसला आने के बाद दे रहे थे वही अभी भी दे रहे हैं, इकबाल अंसारी लगातार ये कह रहे हैं सुप्रीम कोर्ट ने जो निर्णय दिया है उसको ही हम मानेंगे, आगे हम किसी भी तरह की पुनर्विचार याचिका नहीं डालेंगे। लेकिन हैरानी की बात ये है कि मुमताज पीजी कॉलेज में आयोजित बैठक के दौरान इकबाल को लेकर यूपी पुलिस इल्जाम भी लगाया गया, हालांकि अन्य मुस्लिम पक्षकारों ने साफ नही कहा लेकिन ये जरूर कहा कि इकबाल अंसारी अयोध्या में हैं वह पुलिस है हो सकता है कि इकबाल अंसारी दबाव में बयान दे रहे हों।
तीन घंटे चली बैठक, कई बिंदुओ पर हुई चर्चा
मुमताज पीजी कॉलेज में ये बैठक करीब तीन घंटे चली, इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर गहन समीक्षा की गयी। इस बैठक में 35 सदस्यों के अतिरिक्त विशेष आमंत्रित मुस्लिम नेता भी शामिल हुए।
बैठक के बाद की मीडिया से बातचीत, जिलानी कहा फैसला मंजूर नहीं
बैठक होने के बाद मुस्लिम पक्ष के नेता और बोर्ड के सचिव और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी मीडिया से भी रूबरू हुए। इस दौरान उन्होंने मीडिया से कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंजूर नहीं है। ऐसा लगता है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में कई बिंदुओं पर न केवल विरोधाभास है, बल्कि प्रथमदृष्टया अनुचित प्रतीत होता है। हालांकि जफरयाब जिलानी का दावा है कि पुनर्विचार याचिका दायर करने के लिए तीन पक्षकारों की सहमति मिल गई है। पक्षकार मौलाना महफुजर्रहमान, मो. उमर और मिसबाहुद्दीन हमारे साथ हैं। पक्षकार जमीयत उलमा हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने भी पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की घोषणा की है।
शरियत के खिलाफ है जमीन लेना
वहीं मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव मौलाना उमरेन महफूज रहमानी ने भी मीडिया से बातचीत की और कहा सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार जो मस्जिद के लिए जमीन देने की बात कही गयी है वह शरियत के खिलाफ है। वहीं बाबरी मुस्लिम एक्शन कमेटी के सह संयोजक कासिम रसूल इलियास ने बताया कि हम फैसले के 30 दिन के अंदर पुनर्विचार याचिका दाखिल कर देंगे।
मदनी ने छोड़ी बिना किसी बात के बैठक
बता दें कि बैठक में शामिल होने के लिए जमीअत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बैठक को बीच में ही छोड़ वापस लौट गए। मीडिया ने उनसे बात की कोशिश की, लेकिन वह चुप रहे।
जिला प्रशासन की हुई निंदा
बैठक की अध्यक्षता करने वाले बोर्ड अध्यक्ष मौलाना राबे हसनी नदवी की मौजूदगी में सचिव एडवोकेट जफरयाब जिलानी व सदस्य डॉ. कासिम रसूल इलियास सहित अन्य लोगों ने प्रेस वार्ता में जिला प्रशासन व पुलिस की निंदा की। जफरयाब जिलानी ने जिला प्रशासन व पुलिस पर दबाव बनाने आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रशासन मुस्लिम पक्ष की फैसले के खिलाफ उठ रही आवाज को दबाने की कोशिश कर रहा है।

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