पेड खबरे छप रहीं हैं, मीडिया हाउस बढ़ रहे हैं और पत्रकारिता का स्तर गिर रहा है

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लखनऊ। जैसे जैसे मीडिया संस्थानों की संख्या बढ़ रही वैसे-वैसे आज पत्रकारिता का स्तर भी गिरता जा रहा है। एक आम आदमी की आवाज कहे जाने वाले मीडिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती विश्वनीयता की बढ़ती जा रही है। मीडिया का स्तर गिर रहा है इस बात को प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी स्वीकार किया है। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने कहा कि अब पत्रकारिता में सबसे बड़ी चुनौती उसकी विश्वसनीयता है जिसे हमें हर हाल में बरकरार रखना होगा। इस बारे में शनिवार को प्रेस काउंसिल आफ इण्डिया के चेयरमैन न्यायमूर्ति चन्द्र मौलि प्रसाद ने कहा कि पत्रकारिता की सबसे बड़ी चुनौती उसकी विश्वसनीयता है जिसे हमें हर हाल में बरकरार रखना होगा। आज समाचारों में पेड खबरे छप रही है, मीडिया घराने बढ़ रहे हैं और पत्रकारिता का स्तर दिन प्रतिदिन गिरता जा रहा है। ये बहुत ही गम्भीर स्थिति है, हमें इस चुनौती से उबरना होगा, मीडिया की खोई विश्वसनीयता हमें पुन: स्थापित करनी होगी।
न्यायमूर्ति श्री मौलि दैनिक अखबार के स्थापना दिवस के मौके पर लखनऊ में उपस्थित थे । स्थापना दिवस के अवसर पर हिन्दी मीडिया सेन्टर गोमतीनगर में आयोजित पत्रकारिता की नई चुनौतियो विषयक संगोष्ठी की अध्यक्षता न्यायमूर्ति डीजी सिह कर रहे थे। इस दौरान संगोष्ठी में श्री मौलि बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे। संगोष्ठी में विविध पत्रकारों ने भी पत्रकारिता पर अपने विचार व्यक्त किये।
स्वास्थ्य पत्रकारिता के लिए होना चाहिए चिंतन
वरिष्ठ पत्रकार शीतला बख्स सिह ने कहा कि पत्रकारिता का उपयोग व्यक्ति व्यवसाय एवं सार्वजनिक जीवन की उपयोगिता के लिये होना चाहिये जो कि स्वार्थ से परे हो। स्वच्छ पत्रकारिता के लिये हमारो क्या योगदान हो सकता है। इस पर गम्भीर चिन्तन किया जाना चाहिए।

अभी तक पत्रकारिता के क्षेत्र मे नियमावली नही बनी
वरिष्ठ पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी ने कहा कि किसी भी प्रजातांत्रिक देश में सेसद महत्वपूर्ण है उसे सभी क्षेत्रों में स्वस्थ परम्परा बनाये रखने के लिए कानून बनाने का हक है। सामूहिक समस्याओं पर चिन्तन मनन और सार्वभौमिक रास्ता निकालना उसका दायित्व है अभी तक पत्रकारिता के क्षेत्र में कोई नियमावली नहीं बनी है इस दिशा में भी कार्य किया जाना चाहिए।

संपादक नहीं मालिक के नाम से पहचाना जाता है समाचार पत्र
रामदत्त त्रिपाठी ने कहा कि पहले समाचार पत्र मालिक से नही सम्पादक से जाना जाता था पर अब मालिक ही सम्पादक बन गये है, अब पत्रकारों को कार्य करने की स्वतंत्रता लगभग समाप्त हो गयी है, खबरे व्यावसायिक हो गयी है। अत: मीडिया सोशल सर्विस के लिये जागरूकता जरूरी है।

मीडिया पर हावी हुआ बाजारवाद
प्रांशु मिश्रा ने कहा कि जर्नलिस्ट सेफ्टी एक्ट बनाये जाने की वकालत करते हुए कहा कि बाजारवाद मीडिया पर हावी हो गया है। उन्होंने प्रदेश सरकार द्बारा मान्यता समिति गठित किये जाने पर संतोष जताया।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार विक्रम राव, रजा रिज़वी, सुमन गुप्ता, नवनी जोशी, हेमन्त तिवारी तथा समाज सेवी कमल रावरी सहित बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद थे।

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