New education policy: ​सरकारी और प्रावइेट यूनिवर्सिटी के एक होंगे नियम, अंडर ग्रेजुएट कोर्स अब 4 साल का

नई शिक्षा नीति (New education policy) को मोदी सरकार की कैबिनेट से मंजूरी मिल गयी है। लेकिन इस नीति के बाद क्या—क्या बदलाव होंगे इसे समझना बेहद जरूरी है। करीब 35 साल बाद शिक्षा नीति में बदलाव किया है। शिक्षा नीति को मंजूरी देने से पहले चार साल इस पर गहन अध्ययन किया गया है उसके बाद इसे मंजूरी दी गयी है। बता दें कि केन्द्र सरकार इसे इसी साल से अमल में भी लाने की तैयारी कर रही है, उससे पहले कई अहम बिंदुओ को भी समझना जरूरी है। नई शिक्षा नीति के तहत अब अंडर ग्रेजुएट कोर्स को चार साल का कर दिया गया है। वहीं छात्र अभी भी 3 साल बाद डिग्री प्राप्त कर सकेंगे। लेकिन 4 साल का कोर्स करने पर, सिर्फ 1 साल में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल कर पाएंगे। 3 साल की डिग्री उन छात्रों के लिए, जिन्हें हायर एजुकेशन नहीं करना है। हायर एजुकेशन करने वाले छात्रों को 4 साल पढ़ाई पूरी करने के बाद ही डिग्री मिल सकेगी। (New education policy) के तहत ग्रेजुएशन के तीनों साल को लेकर भी बदलाव किया गया है। जिसमें 1 साल बाद सर्टिफिकेट, 2 साल बाद डिप्लोमा और 3 साल बाद डिग्री हासिल हो जाएगी।

एमए के बाद कर पायेंगे पीएचडी
नई शिक्षा नीति (New education policy) के मुताबिक एमए के बाद पीएचडी कर पायेंगे लेकिन Phil को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। इससे छात्रों को राहत मिलेगी साथ ही पीएचडी की गुणवत्ता भी बढ़ेगी।

एक ही होगी सरकारी और प्राइवेट यूनवर्सिटी की पॉलिसी
नाई शिक्षा नीति (New education policy) के मुताबिक प्राइवेट यूनिवर्सिटी और सरकारी यूनिवर्सिटी के नियम अब एक होंगे। अब किसी भी डीम्ड यूनिवर्सिटी और सरकारी यूनिवर्सिटी के नियम अलग अलग नहीं होंगे। इससे पहल प्राइवेट यूनिवर्सिटी के अलग नियम हुआ करते थे। इस ​नियम के बाद माना जा रहा है कि प्राइवेट यूनिवर्सिटी की मनमानी पर जहां विराम लगेगा वहीं छात्रों को राहत भी मिल जायेगी। वहीं नई नीति स्कूलों और एचईएस दोनों में बहुभाषावाद को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही राष्ट्रीय पाली संस्थान, फारसी और प्राकृत, भारतीय अनुवाद संस्थान और व्याख्या की स्थापना करने में अब आसानी होगी।

अपना रिपोर्ट कार्ड तैयार करने में खुद भूमिका निभायेगा बच्चा
वहीं कक्षा एक से लेकर 5 वीं तक बच्चा स्कूली शिक्षा के दौरान अपनी रिपोर्ट कार्ड तैयार करने में अपना भी योगदान देगा। अब सिर्फ अध्यापक ही रिपोर्ट कार्ड नहीं तैयार कर पायेंगे। लेकिन नई शिक्षा नीति (New education policy) में तीन हिस्से होंगे। पहला बच्चा अपने बारे में खुद मूल्यांकन करेगा, दूसरा उसके सहपाठियों से होगा और तीसरा अध्यापक के माध्यम से किया जायेगा। इतना ही नहीं, अब कक्षा छठीं से ही छात्रों को कोडिंग भी पढ़ाई जाएगी, जो कि स्कूली शिक्षा पूरी करने तक उनके कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) में मदद करेगी।

टेन प्लस टू की पॉलिसी होगी समाप्त
नई शिक्षा नीति (New education policy) के तहत कम से कम पांचवी कक्षा तक और संभव हो तो आठवीं और उसके आगे भी स्थानीय भाषा या मातृभाषा पढ़ने का मौका मिलेगा। जिसमें हिंदी, अंग्रेजी जैसे विषय भाषा के पाठ्यक्रम के तौर पर तो होंगे,लेकिन बाकी पाठ्यक्रम स्थानीय भाषा या मातृभाषा में होंगे। वहीं देश में 10+2 के आधार पर चलने वाली प्रक्रिया में अब बदलाव किया जायेगा। अब ये 5+3+3+4 के हिसाब से पाठ्यक्रम होगा। ऐसे में प्राइमरी से दूसरी कक्षा तक एक हिस्सा, फिर तीसरी से पांचवी तक दूसरा हिस्सा, छठी से आठवीं तक तीसरा हिस्सा और नौंवी से 12वीं तक आखिरी हिस्सा होगा।

रटने की प्रक्रिया कम की जायेगी
नई शिक्षा नीति (New education policy) के तहत अब रटने की प्रक्रिया पर जोर कम दिया जायेगा। बच्चों की परीक्षाएं इस आधार पर होंगी कि उनके ज्ञान की क्षमता को बढ़ाया जा सके। नई शिक्षा नीति में बोर्ड परीक्षाओं को तो बरकरार रखा गया है।

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