मनमानी फीस नहीं वसूल सकेंगे निजी स्कूल, विधेयक 2018 के नये प्रारूप को मिली मंजूरी

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लखनऊ। यूपी में निजी स्कूल अभिभावकों से मनमानी नहीं कर सकेंगे। योगी सरकार ने मंगलवार को कैबिनेट बैठक में नये विधेयक 2018 के प्रारूप पर मोहर लगा दी है। इसके अंतर्गत अवैध फीस वसूली पर 5 लाख रुपये तक जुर्माना और मान्यता खत्म किए जाने तक का प्रावधान किया गया है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री डॉ.दिनेश शर्मा ने बताया कि जिन स्कूलों की सालाना फीस 20 हजार तक है वह भी इसके दायरे में नहीं आएंगे। उन्होंने कहा कि लोगों के सुझाव को समाहित करने के बाद इस बिल को अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि उप्र स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय शुल्क नियंत्रण विधेयक-2018 को बनाने के लिए हमने छात्रों अभिभावकों और स्कूल प्रशासन के साथ ही आम लोगों से भी सुझाव लिए थे। स्कूल केवल विवरण पुस्तिका व रजिस्ट्रेशन, प्रवेश, परीक्षा और वार्षिक शुल्क ले सकेंगे। अन्य मदों में लिए जाने वाले शुल्क वैकल्पिक ही रहेंगे। स्कूल अन्य किसी मद में शुल्क जमा करने का दबाव नहीं बना सेकंगें। सत्र शुरू होने के 60 दिन पहले स्कूल बढ़ाई जाने वाली फीस का हर मद में ब्योरा अपनी वेबसाईट पर डालना होगा।
कैपिटेशन फीस पर रहेगी पूरी तरह से रोक
डॉ. शर्मा ने बताया कि कैपिटेशन फीस पर पूरी तरह रोक रहेगी, हर प्रकार के शुल्क की रसीद देनी होगी। स्कूल 5 साल में केवल एक बार ही ड्रेस में बदलाव कर सकेंगे। इससे पहले किसी भी बदलाव के लिए कमिश्नर की कमिटी फैसला लेगी। इसमें अभिभावक संघ भी प्रतिनिधि रहेगा। फीस त्रैमासिक या छमाही ही ली जा सकेगी। पूरे साल की फीस एक साथ नहीं जमा करवाई जा सकेगी।
हर साल नहीं बढ़ा सकेंगे फीस
डा. शर्मा ने बताया कि अब कोई भी संस्थान फीस हर साल नहीं बढ़ा सकेगा। शिक्षक और कर्मचारियों के वेतन वृद्धि और अन्य मदों में अधिकतम 5 फीसदी से ज्यादा नहीं बढ़ा सकेंगे। स्कूल परिसर में व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाली आय भी स्कूल की आय में जुड़ेगी। इसे खाते में जमा करना होगा। आय अधिक होने पर फीस कम भी करनी पड़ सकेगी।
नियमों का उल्लंघन किया तो ये होगी सजा
डॉ. शर्मा ने बताया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूल पर पहली बार 1 लाख का जुर्माना, दूसरी बार 5 लाख और तीसरी बार मान्यता समाप्ति की कार्रवाई की जा सकेगी। स्कूल केवल एक बार ही प्रवेश शुल्क ले सकेंगे। 20 हजार से अधिक की वार्षिक फीस लेने वाले स्कूलों पर ही यह अधिनियम लागू होगा। अधिनियम शैक्षणिक सत्र 2018-19 से ही लागू होगा, यदि स्कूल ने ज्यादा फीस ली है तो उसे वापस करना होगा।

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