Lucknow Zoo हुआ 98 साल का, जानिए क्यो हुई थी इसकी स्थापना, पहले ये था नाम

नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान
न्यूज डेस्क। लखनऊ प्राणि उद्यान आज नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान के नाम से जाना जाता है। हजरतगंज से चंद कदम की दूरी पर स्थित इस प्राणि उद्यान के आज 98 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इसकी स्थापना से लेकर अबतक बड़ा रोचक इतिहास रहा है, इसकी स्थापना के पीछे जो उद्देश्य था और उस समय जो लागत आयी थी उसमें आज दो कमरे भी बन पाना मुश्किल होगा। ऐसे में प्राणि उद्यान प्रशासन इसका स्थपना दिवस समारोह शुक्रवार को मनाने जा रहा है। इस संबंध में आपको विस्तृत जानकारी दे रही हैं
Manisha Srivastava writer
मनीषा श्रीवास्तव
98 साल के सफर में मिले हैं तीन आईएसओ सार्टिफिकेट
प्राणिा उद्यान के 98 साल के सफर में अभी तक तीन बार इसको आईएसओ की ओर से सार्टिफिकेट दिया जा चुका है। खास बात यह भी है कि देश का ये पहला प्राणि उद्यान है जो तीन-तीन बार आईएसओ से से सार्टिफिकेट प्राप्त कर चुका है।, जो अपने में एक बड़ा रिकार्ड है। यहां हर साल करोड़ों लोग आते हैं जिससे राजस्व को काफी मुनाफ होता है। इस प्राणि उद्यान में जानवरों के इलाज की बेहतर व्यवस्था है। सबसे बड़ी बात ये भी है कि प्रदेश के बाहरी प्राणि उद्यानों से जानवरों को यहां इलाज के लिए भी लाया जाता है।
1921 में नवाब नसीरूद्दीन हैदर इसलिए की थी स्थापना
बता दे कि इस प्राणि उद्यान की स्थापना 29 नवम्बर, 1921 को प्रिन्स आफ वेल्स के लखनऊ आगमन के उपलक्ष्य में की गयी थी। इस परिसर की स्थापना 18वीं सदी में आमों के बाग के रूप में अवध के तत्कालीन नवाब, नवाब नसीरूद्दीन हैदर द्वारा की गयी थी। उस समय इसे बनारसी बाग के रूप में जाना जाता था। आज भी बोलचाल की भाषा में स्थानीय लोग इसको बनारसी बाग ही कहते हैं। नवाबों द्वारा शाम के वक्त, जैसा कि अवध की शाम प्रसिद्ध हुआ करती थी, यहाँ पर बैठने के लिए एक बारादरी का निर्माण कराया गया जो कि प्राणि उद्यान के बीचो-बीच आज भी अपनी पूरी भव्यता एवं गरिमा के साथ स्थित है।
दो लाख 8 हजार 800 रूपए आयी थी लागत
निदेशक प्राणि उद्यान आरके सिंह ने बताया कि एआर न्यूज टाइम्स डॉट इन से बातचीत में बताया कि सन 1921 से सन 1926 तक इसमें 26 भवनों का निर्माण किया गया। उस समय इसकी लागत 2,08,800 रूपये थी। मुख्य गेट का निर्माण सन 1936 में किया गया तथा उस समय इसका नाम ’’सर लुडोविक पोर्टर गेट’’ रखा गया था। इसके प्रबन्धन के लिए एक कमेटी बनायी गयी थी तथा कमिश्नर, लखनऊ इस कमेटी के अध्यक्ष थे एवं ’’शेख मकबूल हुसैन’’ इस कमेटी के पहले सचिव बनाये गये। सन 1950 में उपरोक्त कमेटी के स्थान पर एडवाइजरी कमेटी, लोक स्वास्थ्य विभाग के अन्तर्गत बनायी गयी। निदेशक, चिकित्सा और स्वास्थ्य को इसका प्रशासक बनाया गया।
खूब लुभाता है दर्शकों को ये तितली पार्क
प्राणि उद्यान में एक तितली पार्क भी स्थापित है, इस पार्क में तितलियों की कई प्रजातियां हैं, जो दर्शकों को खुल लुभाती हैं। एक बार यहां पर दर्शक आता है तो रंगबिरंगी तितलियां देखकर मंत्रमुग्ध हो जाता है।
चाचा नेहरू का प्लेन भी है आकर्षण का केन्द्र
बता दें प्राणि उद्यान में रखा चाचा नेहरू का प्लेन भी दर्शकों के लिए आकर्षण केन्द्र बना रहता है। लोग इसे दूर-दूर से आज भी देखने आते हैं। यहां के पुराने कर्मचारियेां का कहना है इसे ट्रक के माध्यम से पार्टों में लगाया गया था, बाद में फिर इसे यहां पर तैयार किया गया था। बताया जा रहा है ये प्लेन उस समय समय ठीक कंडीशन में था इंजन भी स्टार्ट होता था लेकिन लैडिंग की व्यवस्था न होने के कारण उसके टुकड़ो में लाकर यहां रखा गया था। इस प्लेन का नाम राजहंस है।
प्रिन्स ऑफ वेल्स जूलोजिकल गार्डेन्स ट्रस्ट था पहला नाम
सन 1966 में इसका प्रशासनिक नियंत्रण वन विभाग को दिया गया और एडवाइजरी पुनर्गठित की गयी। इस प्राणि उद्यान का नाम ’’प्रिन्स ऑफ वेल्स जूलोजिकल गार्डेन्स ट्रस्ट’’ था , जिसका तत्कालीन सपा सरकार ने परिवर्तित करके लखनऊ प्राणि उद्यान कर दिया था। वर्ष 2015 में प्राणि उद्यान का नाम ’’लखनऊ प्राणि उद्यान’’ से परिवर्तित करके ’’नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान, लखनऊ’’ रखा गया।
1969 में चलायी यहां चलायी गयी बाल ट्रेन
14 नवम्बर, 1969 को यहाँ पर बालरेल चलायी गयी तथा उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री चन्द्रभानु गुप्ता द्वारा इस बालरेल का शुभारम्भ किया गया और इस स्टेशन का नाम चन्द्रपुरी स्टेशन रखा गया। फरवरी 2014 में नई बालरेल एवं रेलवे ट्रैक का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा किया गया। इस समय रेलवे ट्रैक की कुल लम्बाई 1.4 किमी है।
1012 वन्य जीव और 104 हैं प्रजातियां
निदेशक प्राणि उद्यान ने बताया कि इस पूरे प्राणि उद्यान का क्षेत्रफल लगभग 29 हैक्टेयर है। इस 29 हैक्टेयर में कुल 152 बाड़े हैं जिसमें मछलीघर के इनक्लोजर सम्मिलित नहीं हैं। प्राणि उद्यान में कुल 1012 वन्यजीव एवं उनकी 104 प्रजातियां हैं। इसमें मछलियों की लगभग 65 प्रजातियां अतिरिक्त हैं। प्राणि उद्यान को अप्रैल, 2018 में तीन आई0एस0ओ0 सर्टिफिकेट प्राप्त हुए हैं। एक साथ तीन-तीन आई0एस0ओ0 सर्टिफिकेट प्राप्त करने वाला यह देश का एकमात्र प्राणि उद्यान है।

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