लखनऊ विश्वविद्यालय ने मनाया 62वां दीक्षांत समारोह, समिया को मिले 14 मेडल, दुर्गेश ने झटका चांसलर मेडल

लखनऊ। कड़ी सुरक्षा और शिक्षक संघ के विरोध के बीच लखनऊ विश्वविद्यालय का 62वां दीक्षांत समारोह मनाया गया। इस मौके पर 40 हजार &5 डिग्री और 192 मेडल होंगे वितरित किए गये जबकि कोर्ट की रोक के बाद चार मेडलों का वितरण नहीं किया गया। वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ लूटा का विरोध प्रदर्शन का असर दीक्षंात समारोह के मौके पर भी दिखा। समारोह के दौरान मंच पर कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल, उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, कुलपति प्रो. एसपी सिंह, नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार और चंद्रयान 2 मिशन की निदेशक रितु करिधाल श्रीवास्तव की मौजूदगी में मेडल व डिग्री पाने वाले छात्र छात्राओं का उत्साहवर्धन भी किया गया। इसके साथ ही ऐसा पहली बार हुआ जब किसी दीक्षांत समारोह में स्नातक व परास्नातक छात्रों के बीच बेसिक शिक्षा परिषद की ओर संचालित प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों के 19 ब”ाों को भी राज्यपाल के हाथों सम्मानित किया गया।
इस दीक्षांत समारोह में सबसे 14 पदक समिया इकराम को मिले। सामिया ने बातचीत के दौरान बताया कि कि ये उनके जीवन के ऐतिहासिक लम्हें थे। इन्हें वह कभी भूल नहीं पाएंगी। सामिया के साथ लखनऊ विश्वविद्यालय के इस 62वें दीक्षांत में डिग्री पाने वाली 40 हजार &5 होनहारों के लिए ये लम्हों के गवाह बने। दीक्षांत समारोह का आगाज शैक्षिक शोभा यात्रा के साथ किया गया। कुलसचिव एसके शुक्ल की अगुवाई में यह सुबह करीब 11 बजे विश्वविद्यालय में कला संकाय प्रांगण में बने दीक्षांत पंडाल में पहुंची। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति रा’यपाल आनंदीबेन पटेल की अनुमति के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ। कुलपति प्रो. एसपी सिंह ने विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसके साथ ही समारोह में बैठे छात्रों, अभिभावकों का इंतजार खत्म हो गया और उपाधियों का वितरण शुरू किया गया।दो पूर्व छात्रों को मानक उपाधि मंच से कुल 191 पदक बांटे गए।
देश में बहुत ही कम हैं इतने पुराने विश्वविद्यालय-राज्यपाल
लखनऊ विश्वविद्यालय आज शताब्दी की ओर है बहुत ही कम विश्वविद्यालय हैं जो इतने पुराने हैं, लखनऊ विश्वविद्यालय ऐसा विश्वविद्यालय है जिसने अपने आप में एक अनोखा इतिहास भी संभाल कर रखा है। ये बात राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कही। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय ने देश को कितने होनहार नेता दिए हैं, तो कई अधिकारी भी दिए हैं जो देश के अहम पदों पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
मेडल पर रहा बेटियों का दबदबा, राज्यपाल ने दी बधाई
इस बार के दीक्षांत समारोह में 192 मेडल बांटे गये। जिसमें सबसे अधिक मेडल सामिया इकराम को मिले और अन्य में कुल 1&& मेडलों पर बेटियों का दबादबा रहा। इस मौके पर राज्यपाल ने आनंदी बेन पटेल ने सभी छात्राओं का उत्साहवर्धन किया और छात्रों को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि आज बेटियां और महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है। उन्होंने कहा किसी भी क्षेत्र को देख सकते हैं हर जगह बेटियां किसी से पीछे नहीं है।
कुलपति की पुस्तक का हुआ विमोचन
इस मौके पर कुलपति प्रो. एसपी सिंह के कार्यकाल के तीन वर्ष पर लिखी गयी पुस्तक का भी विमोचन कियसा गया। इस पुस्तक के बारे में भी मंच से कुलपति ने बताया कि उनका तीन साल का कार्यकाल कैसा रहा है। कुलपति ने इस दौरान विश्वविद्यालय का शैक्षिक कैलेंडर भी प्रस्तुत किया, साथ ही अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को भी विस्तार से बताया।
दीक्षांत कोई शिक्षांत नहीं आगे भी बुहत कुछ करना है-डिप्टी सीएम
हर छात्र जीवन में दीक्षांत का बहुत बड़ा महात्व होता है। लेकिन दीक्षांत कोई शिक्षांत नहीं है, डिग्री प्राप्त करने के बाद भी बहुत सारे विकल्प होते हैं साथ ही दीक्षांत तक जो शिक्षा मिली है उस शिक्षा के माध्यम से समाज में भी बहुत कुछ करना होता है। ये बात समारोह के मौके पर उपस्थित उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा ने कही। डा. शर्मा ने कहा कि डिग्री प्राप्त करने के बाद सभी मेधावी छात्र अपने ज्ञान के भंडार से समाज में कितना परिवर्तन ला सकते हैं, ये अब उन्हे तय करना है। उन्होंने मेधावी छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि मेहनत का नतीजा है जो आप लोग यहां तक पहुंचे हैं, आगे भी मेहनत करते रहना होगा। उन्होंने कहा कि छात्र हित में प्रदेश सरकार हर संभव कदम उठा रही है। प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो इसके लिए हर संभव कदम आगे भी उठाये जाते रहेंगे।
रितु करिधाल और रजीव कुमार को मिली मानद उपाधि
इस मौके पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मुख्य अतिथि नीति आयोग केे उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार और चन्द्रयान टू की निदेशक रितु करिधाल श्रीवास्तव को मानद उपाधि प्रदान की गई। खास बात यह है कि ये दोनों ही लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र भी रहे हैं।
इनके नाम रहे कुलाधिपति व कुलपति पदक
कुलाधिपति स्वर्ण पदक दुर्गेश कुमार त्रिपाठी को दिया गया जबकि कुलाधिपति कांस्य पदक शाम्भवी पाण्डेय, मुस्कान त्रिपाठी, चारु बजाज, मानसी बाजपेयी, भावना कनौजिया, पलक गुप्ता, राम सुमेर, श्वेता मौर्या, शिवाशीष मिश्रा, प्रगति श्रीवास्तव , चक्रवर्ती स्वर्ण पदक, विभू बनर्जी, कुलपति स्वर्ण पदक, आनंद कुमार यादव कुलाधिपति रजत पदक सामिया इकराम को दिया गया।
4 मेडल पर कोर्ट के आदेश पर लगी रोक
लविवि के दीक्षा समारोह विवाद के चलते चार मेडल नहीं वितरित किए गए। बताया गया कि न्यायालय के निर्देश के बाद सोमवार को यह फैसला लिया गया। अभी तक दीक्षा समारोह में 196 मेडल वितरित करने की घोषणा की गई थी। मगर अब 192 मेडल ही वितरित हुए। दरअसल एम कॉम एप्लाइड इकोनोमिक्स के मेडल को लेकर लविवि की छात्रा रही प्रिया टंडन ने आपत्ति दर्ज कराई है। छात्रा का कहना है कि एम कॉम में पांच मेडल हैं। इनमें से चार मेडल एमकॉम में सर्वाधिक अंक हासिल करने वाले को दिए जाते हैं। जबकि एक अन्य मेडल को एमकॉम एप्लाइड इकोनोमिक्स में सर्वाधिक अंक के लिए दिया जाता है। प्रिया का कहना है कि उसके 75.52 प्रतिशत हैं और उसे एक मेडल दिया जा रहा है। जबकि बाकी चार मेडल उस स्टूडेंट को दिए जा रहे हैं जिसके 75.1& प्रतिशत हैं। प्रिया ने अपने आप को चार मेडल का दावेदार बताया है।
इतने पदकों से नवाजे गये मेधावी
-सामिया इकराम को11 स्वर्ण पदक तीन अन्य
-ऋषभ त्रिपाठी को 8 स्वर्ण पदक।
-विभान्तिका द्विवेदी को 8 स्वर्ण पदक
-सालिहा खातून को 7 स्वर्ण पदक
-अपूर्वा सिंह को 6 स्वर्ण पदक
-तंजीला सिद्धि को 6 स्वर्ण पदक
-निमिषा सिंह को 5 स्वर्ण पदक
-शारर्याति प्रकाश को 5 स्वर्ण पदक।
-मुकेश कुमार को 4 स्वर्ण पदक।
-विकास कुमार को 4 स्वर्ण पदक।
राज्यपाल से सम्मान पाकर खुश हुए ब”ो
दीक्षांत समारोह के मौके पर ऐसा पहली बार हुआ जब स्नातक और परास्नातक छात्र-छात्राओं के साथ बेसिक शिक्षा परिषद की ओर संचालित सरकारी स्कूलों के 20 ब”ाों को राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने अपने हाथों से सम्मानित किया। इस दौरान सभी ब‘चों को राज्यपाल ने बैग और स्टेशनरी देकर सम्मानित किया। सम्मान पाने वालों में दस छात्र व दस छात्राएं शामिल थी। इन सभी को स्कूल बैग किताबों स्टेशनरी का पूरा सामान कुलाधिपति की ओर से वितरित किया गया। ब”ाों के सम्मान के पीछे राज्यपाल ने कारण भी बताया, उन्होंने कहा ये ब”ो छोटे भले ही कोई बात भूल सकते हैं लेकिन जो देखेंगे उसे हमेशा याद रखेंगे। उन्होंने कहा कि जब ब”ो विश्वविद्यालय आये तो हमने एक ब”ो से पूछा भी कि तुम्हे यहां आकर कैसा लग रहा है तो उसने बताया कि मैं सोंच रहा था कि जब मैं प्राइमरी की शिक्षा पूरी कर लूंगा तो मुझे यहां पढऩे का मौका मिलेगा। राज्यपाल ने कहा कि इससे लगता है कहीं न कहीं ब”ो भी बहुत दूर की सोंच रखते हैं, उन्होंने कहा मेरा मकसद भी यही था कि इन ब”ाों को बड़े मंच सम्मान भी मिलना चाहिए। सम्मान पाने वाले ब”ाों में अंमाशु, शिवा, शिवम, मानसी, अंशिका, अनन्या, कल्पना सोनी, प्रियांशी देव, मो. हसनान, मो. झुलमिनल, विशाल, शरिता, अरूषि, शाह आलम शमिल थे।
लूटा के विरोध का दिखा असर, दीक्षांत में शामिल नहीं रहे प्रोफेसर
विश्वविद्यालय शिक्षक संघ लूटा के विरोध का भी असर देखने को मिला। संघ की ओर से दीक्षांत से एक दिन पहले कुलपति का इस्तीफा मांगा ही जा चुका था, लेकिन विरोध में कई प्रोफेसर दीक्षांत के मौके पर भी नहीं शामिल हुए। समारोह में प्रोफेसरों के बैठने का जो स्थान निश्चित किया गया था वहां अधिकांश कुर्सियां खाली ही दिखी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

ten − 3 =