फांसी से बचने का आखिरी दांव भी फेल, निर्भया के दोषियों की दया याचिका खारिज अब ये है एक मात्र विकल्प

न्यूज डेस्क। दिल्ली निर्भया रेप और हत्या के मामले में चारो आरोपियों दया याचिका को खारिज कर दिया गया है। सभी दोषियों में एक पवन कुमार गुप्ता की भी दया याचिका राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने खारिज किया है।
बता दें कि इसी के साथ राष्ट्रपति की ओर से निर्भया के सभी दोषियों (पवन कुमार गुप्ता, विनय कुमार शर्मा, मुकेश सिंह और अक्षय कुमार) की दया खारिज की जा चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट में अभी भी विकल्प
आरोपियों के पास अब सिर्फ सुप्रीम कोर्ट का विकल्प बचा है। जानकारो के मुताबिक अब आरोपी दया याचिका खारिज को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं।
दिल्ली सरकार ने सोमवार को खारिज की थी याचिका
इससे पहले दिल्ली सरकार ने सोमवार को सभी आरोपियों को दया याचिका पर अपनी सहमति से इनकार करते हुए फाइल पर साइन नहीं किया था। मतलब दिल्ली सरकार की मंशा नहीं थी कि आरोपियों की फांसी को टाला जाये। इसके बाद पवन गुप्ता की यह दया याचिका राष्ट्रपति के पास भेजी गई थी। इसके बाद राष्ट्रपति भवन से इसे उचित राय के लिए दिल्ली सरकार के पास भेजा गया था। दिल्ली सरकार ने इस बारे में तिहाड़ जेल प्रशासन से मिली जानकारी पर विमर्श के बाद याचिका खारिज कर दी थी। वहीं राष्टपति भवन से भी याचिका खारिज हो गयी है।
16 दिसंबर 2012 को हुई थी घटना
चारो आरोपियों ने बीते 16 दिसंबर, 2012 को दिल्ली के वसंत विहार इलाके में पैरामेडिकल की छात्रा निर्भया के साथ चलती बस में दरिंदगी हुई थी।राम सिंह, एक नाबालिग, विनय, पवन, मुकेश और अक्षय ने निर्भया को इस कदर शारीरिक प्रताड़ना दी कि उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।पूरे देश में हड़कंप मचने के बाद दिल्ली पुलिस सभी 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था, तिहाड़ जेल में वर्ष 2013 में आरोपित राम सिंह ने आत्म हत्या कर ली थी। हालंाकि अब इस मामले में आरोपियों के वकील एपी सिंह पर आरोप लग रहा है कि वह लगातार फांसी टालने का प्रयास कर रहे हैं वह आरोपियो ंको बचाना चाहते हैं
उम्रकैद में बदली जानी चाहिए फांसी
वहीं वकील एपी सिंह का कहना है निर्भया मामले में सभी आरोपी 18 से 20 साल के नौजवान थे उनको एक बार क्षमा किया जाना चाहिए। ये बात कई बार आरोपियों के वकील एपी सिंह मीडिया न्यूज चैनलों में डिबेट और इंटरव्यू के दौरान भी कह चुके हैं। एपी सिंह ने ये भी कहा है कि वह इन आरोपियों की फांसी होना मतलब लोक तंत्र की हत्या है। हालांकि इस बार एपी सिंह पर सुप्रीम कोर्ट ने भी टिपण्णी करते हुए करते हुए कहा कि आप आग से खेल रहे हैं।

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