ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती विवि ने मनाया दीक्षांत समारोह , राज्यपाल ने मेधावियों को मेडल देने के साथ कुलपति को दिए कई आदेश

लखनऊ। अपने सिलेबस से अतिरिक्त भी हमें पढ़ते रहना चाहिए, क्योकि बिना पढ़े हमारा कुछ नहीं हो सकता है, शिक्षा और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हमें इतना आगे जाना होगा कि पूरे विश्व से हम आंख मिलाकर कह सकते हैं कि आप अकेले नहीं हैं हम भी हैं, ये बात राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कही। श्रीमती पटेल गुरूवार को ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती उर्दू अरबी फारसी विश्वविद्यालय चौथे दीक्षंात समारोह के मौके पर कुलाधिपति के रूप में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित कर रही थी। इस दौरान उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ हमें फिट इंडिया मूवमेंट के साथ स्वास्थ्य और अच्छे भोजन के लिए भी ध्यान देना होगा। इस मौके पर उन्होंने मेधावियों से अपने शैक्षिक दौर को भी साझा किया और कहा कि एक समय था जब डिग्री ऐसे ही बुलाकर दे दी जाती थी, आज काफी कुछ बदल चुका है, राज्यपाल स्तर के लोग दो-दो घंटे आपके इंतजार में बैठे रहते हैं डिग्री और मेडल देने लिए। इससे पहले विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. माहरुख मिर्जा ने विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत की और कहा कि यह दीक्षांत समारोह न केवल डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की शैक्षणिक यात्रा का बल्कि कुलपति के रूप में मेरी यात्रा का भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। मैंने इस विद्या के मंदिर में अनुशासन और अकादमिक उत्कृष्टता के लिए शैक्षिक संस्कृति का वातावरण विकसित किया है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में यूजीसी और एआईसीटीई के मानकों के अनुरूप शिक्षा प्रदान की जा रही है। उन्होंने बताया कि पांच भारतीय जवानों को अरबी और फारसी पाठ्यक्रम में प्रवेश देने का निर्णय लिया गया है। वहीं विशिष्ट अतिथि डॉ. अम्मार रिजवी ने कहा कि पूरी दुनिया में इस विश्वविद्यालय की पहचान बन चुकी है। उन्होंने डिग्री प्राप्त छात्रों को जीवन के रास्ते पर निरंतर आगे बढऩे और देश एवं समाज को रौशन करने की सीख दी। इस दीक्षांत समारोह में 55 विद्यार्थियों को 65 पदक प्रदान किए गए। जिसमें 29 विद्यार्थियों को स्वर्ण, 18 विद्यार्थियों को रजत और 18 विद्यार्थियों को कांस्य पदक प्रदान किए गए। 386 छात्रों को स्नातक और परास्नातक की उपाधियों प्रदान की गई। इसके साथ ही डॉ. सईदुर्रहमान आजमी, डॉ. इंद्रेश कुमार, मौलाना कल्बे जव्वाद नक्वी और स्वामी सारंग को अपने उत्कृष्ट योगदान के लिए डी.लिट की मानद उपाधि प्रदान की गई। दीक्षांत समारोह के मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा और विशिष्टï तिथि के रूप में पूर्व कार्यकारी अम्मार रिजवी उपस्थित रहे।
विश्वविद्यालय के नाम में होगा परिवर्तन
राज्यपाल ने कहा कुलपति की रिपोर्ट से मुुझे मालूम हुआ की इस विश्वविद्यालय में साइंस टेक्नोलॉजी, कम्प्यूटर और कला के पाठ्यक्रम संचालित हैं जबकी इस विश्वविद्यालय के नाम के कारण मैं यह समझ रही थी कि यहॉ केवल उर्दू, अरबी और फारसी विषयों में ही पाठ्यक्रम संचालित होंगे। उन्होंने उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को सम्बोधित करते हुये कहा कि अच्छा होगा की इसका नाम सिर्फ ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती विश्वविद्यालय कर दिया जाये। उन्होंने कहा कि हमको अपने अध्ययन के स्वरूप को परिवर्तित करना होगा और अपने को सिर्फ पाठ्यक्रम तक सीमित करने के साथ-साथ दूसरी किताबों से भी दोस्ती करनी होगी। डिग्रियों के साथ अपने अन्दर योग्यता भी विकसित करनी होगी ताकि हमारे डिग्री प्राप्त विद्यार्थी अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर आपना नाम करें और किसी भी देश के विद्यार्थी से ऑख में ऑख डालकर बाते कर सकें।
छात्राओं के चेकअप लिए कुलपति को निर्देश
इस दौरान राज्यपाल ने कहा समाज की सोच को बदलने की आवश्यकता को देखते हुये समाज के पढ़े लिखे वर्ग के लोगों को अपने अधिकार के साथ-साथ कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिये। उन्होंने कहा कि हम अपना फर्ज पूरा करेंगे तो अधिकार स्वयं मिल जायेंगे। उन्होंने फिट इंडिया कार्यक्रम एवं योग शिविरों में विश्वविद्यालय से सहभागिता की अपेक्षा की जिससे छात्र स्वस्थ रहें और अच्छे भविष्य का निर्माण हो। उन्होंने कुलपति प्रो. माहरुख मिर्जा से विश्वविद्यालय की छात्राओं के चेकअप एवं स्वास्थ्य चर्चा के लिए हर माह प्रतिष्ठित डाक्टर को बुलाने के लिए कहा। उन्होंने महाभारत में वर्णित अभिमन्यु के चक्रव्यूह तोडऩे की जानकारी देते हुए विश्वविद्यालयों में गर्भ संस्कार शुरु करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव में अनेक बार गलत परिणाम आ जाते हैं।
इन्हे मिली पीएचडी की उपाधि
दीक्षांत समारोह के मौके पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने पीएचडी की मानद उपाधि शिया धर्म गुरू मौलाना कल्वे जव्वाद व स्वामी सारंग को प्रदान की। इस दौरान राज्यपाल ने कहा दोनों लोगों ने आपासी सौहार्द बनाया इसके लिए इनकी जितनी प्रशंसा की जाये कम है। राज्यपाल ने डा. सईदुर्रहमान आजमी, डा. इंद्रेश कुमार को डिलिट की मानद उपाधिक प्रदान की।
विश्वविद्यालयों को लेने होंगे पांच गांव गोद
राज्यपाल ने कहा प्राथमिक शिक्षा और उच्च शिक्षा के अन्तर को कम करने के लिए उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा पांच गांवों को गोद लेने की बात कही और साथ ही यह भी कहा कि इस सन्दर्भ में की गई कार्यवाही की जानकारी राजभवन को प्रेषित की जाए। उन्होंने छात्रों को एक दिन गोद लिए गांव में जाकर बच्चों को पढ़ाने के लिए नसीहत भी दी। उन्होंने समाज में हो रहे अपराधों से द्रवित होकर छात्रों को जीवन में गलत काम न करने और शादी में दहेज न लेने की नसीहत दी। शिक्षा आपको इसके लिए प्रेरित करेगी वाक्य से उन्होंने अपना सम्बोधन समाप्त किया।
छात्रों के सम्मान के लिए होता है दीक्षांत-डा. दिनेश शर्मा
इस मौके पर मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि हम दीक्षांत समारोह इसलिए मनाते की छात्रों को सम्मान दे सकें। उन्होंने कहा कि दीक्षांत का अर्थ दीक्षा का अंत नहीं बल्कि छात्रों को समाज को कुछ देने की यात्रा का आरंभ है। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि विश्वविद्यालय में राज्य सरकार द्वारा स्थापित पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ के अंतर्गत अनेक संगोष्ठियों का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार की यह इच्छा है कि इस विश्वविद्यालय की पहचान उत्कृष्ट विश्वविद्यालय में हो। उन्होंने विश्वविद्यालय की उन्नति के लिए शुभकामनाएं दीं।
स्कूल बैग और स्वेटर पाकर खुश हुए सरकारी स्कूलों के बच्चे
दीक्षांत समारोह के मौके पर प्राथमिक विद्यालय बढ़ौली और तरइया के 50 विद्यार्थी भी शामिल हुए। जिनको राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की ओर से पठन-पाठन की सामग्री देकर विद्यार्थियों का उत्साह वर्धन किया। बच्चों ने भी राज्यपाल को थैक्यू कहा और उनसे हाथ भी मिलाया। इस अवसर पर कुलसचिव अशोक कुमार अरविंद साथ विश्वविद्यालय के समस्त शिक्षक और कर्मचारी मौजूद रहे।

              परिवर्तन का एक मात्र विकल्प है शिक्षा, बोले मेडलिस्ट

मसूद अहमद
1-ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती मेडल से सम्मानित अरेबिक विभाग के छात्र रहे मसूद अहमद ने बताया कि वह 93.4 प्रतिशत अंको से पास हुए। मसूद ने बताया कि उनके पिता अब्दुल कुद्दूस बेसिक शिक्षा परिषद में टीचर हैं रेगुलर तीन घंटे कॉलेज के अतिरिक्त पढ़ाई करके इस प्रतिशत के साथ पास हुए, मसूद ने एकेडमिक फील्ड में जाने का लल्य रखा है।
अभिषेक  वर्मा
2-चांसलर मेडल से सम्मानित छात्र अभिषेक  वर्मा ने बताया कि बीएसए में उसने 87.50 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं, पिता सतीश कुमार फ्रेबीकेशन का कार्य करते हैं अभिषेक इसके अतिरिक्त भी दो मेडल मिले हैं, वह देश सेवा के लिए कुछ आगे करना चाहते हैं अभी उनमे मन में आगे बढऩे के लिए कई सारे विकल्प हैं।
अभिजीत कुमार सिंह
3-वाइस चांसलर मेडल से सम्मानित अभिजीत कुमार सिंह ने BCA  86.77 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं, उनके पिता अखिलेश कुमार पेशे से किसान हैं जौनपुर निवासी अभिषेक किसानी में जो आमदनी होती है उसी से पढ़ाई करते हैं, अभिषेक ने बताया कि वह साफ्टवेयर इंजीनियर बनकर देश का नाम रोशन करना चाहते हैं।
मोहम्मद शाकिर
4-बीए आनर्स में प्रथम स्थान पर रहे मोहम्मद शाकिर ने बताया कि उन्होंने 85.27 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। पिता शेख बशीर सीएम आफिस में कार्यरत हैं। लखनऊ के दुबग्गा के रहने वाले शाकिर ने बताया कि अरबी भाषा से प्रोफेसर बनकर अपने पिता का नाम रोशन करना चाहते हैं, उन्होंने बताया कि उनके पिता का भी सपना है कि मैं प्रोफेसर बन सकूं।
बदरे आलम
5-एमए में प्रथम स्थान पाने वाले छात्र बदरे आलम ने बताया कि 91.71 प्रतिशत अंको के साथ वह पास हुए हैं। महराजगंज निवासी बदरे आलम के पिता जैश मोहम्मद पेशे से किसान हैं। बदरे आलम ने बताया कि यदि कोई बदलाव ला सकता है तो वह शिक्षा है। शिक्षा के बिना हम कोई भी परिवर्तन नहीं कर सकत हैं। इसलिए हमें पढ़ाई जारी रखना होगा।
गुलाम जिलानी
6-बीए उर्दू में 81.19 प्रतिशत अंको के साथ पहले स्थान पर रहे गुलाम जिलानी ने बताया कि वह बलराम पुर के रहने वाले हैं, पिता असगर अली मदरसे में शिक्षक हैं वह जबकि वह खुद कोचिंग पढ़ाकर अपनी पढ़ाई का खर्चा निकालते हैं, गुलाम जिलानी ने कहा कि वह एक दिन शिक्षक बनकर गरीब छात्र-छात्राओं को पढ़ाना चाहते हैं।
फातिमा जेहरा
7-बीए अंग्रेजी की छात्रा रही फातिमा जेहरा ने बताया कि उन्होंने 80.50 प्रतिशत अंको साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया है। जेहरा ने बताया कि उनके पिता मुस्ताक अली अब इस दुनिया में नहीं है उनकी मां ग्रहणी हैं जिसके चलते आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी इस स्थिति में परिवार के सभी लोगों ने मिलजुलकर जेहरा की पढ़ाई में मदद की।
मोहम्मद आरिफ
8-बीए इकनामिक्स में प्रथम स्थान पर रहे मोहम्मद आरिफ ने बताया कि उन्होंने 82.83 प्रतिशत अंको के साथ पास किया है। पिता मो. याकूब का उनकी पढ़ाई के पीछे बड़ा सहयोग रहा है। ऐसे में वह पिता को धन्यवाद भी देते हैं। आरिफ ने बताया उन्होंने आईएएस बनने का लक्ष्य रखा है, इसके लिए वह बहुत मेहनत भी करना चाहते हैं।

Posted By-Ravi Gupta

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