वायु सेना दिवस के मौके पर भारत को मिला पहला राफेल, बढ़ेगी एयरफोर्स की ताकत, जानिए क्या है इसकी मारक क्षमता

India got its first Rafale on the occasion of Air Force Day, the strength of the Airforce will increase, know what is its firepower राफेल विमान मंगलवार को भारत को मिल गया है, वायुसेना दिवस के मौके पर इस विमान के मिलने से भारत के इतिहास में एक दिन और खास हो गया है। अब भारतीय वायुसेना की शक्ति बढ़ जायेगी। सबसे अधिक मारक क्षमता वाले इस विमान की खासियत भी बहुत है। इससे पहले बता दें कि इस विमान की डिलविरी मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फ्रांस के बोर्दो में दसॉल्ट के संयंत्र में पहुंचकर ली है। इस मौके पर राफेल के हैंडओवर समारोह में रक्षा मंत्री ने कहा कि ‘यह एक ऐतिहासिक दिन है। यह भारत और फ्रांस के बीच गहरा संबंध दिखाता है। उन्होंने कहा कि राफेल विमान के शामिल होने से एयरफोर्स की क्षमता अब बढ़ जायेगी। इससे पहले रक्षा मंत्री ने फ्रांस के राष्ट्रपति एमेनुअल मैक्रों से मुलाकात की और दोनों देशों के रक्षा एवं रणनीतिक संबंधों को मजबूत बनाने के बारे में चर्चा की. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहला राफेल भारत को आधिकारिक रूप से सौंपे जाने के कार्यक्रम के सिलसिले में फ्रांस आए हुए हैं।

मई 2020 में आये जायेंगे चार राफेल विमान
भारत में वैसे तो 36 राफेल जेट विमान आयेंगे, मंगलवार को पहली डिलवरी के बाद अब चार विमान भारत को 2020 मई में मिल जायेंगे। सभी 36 राफेल जेट विमान सितंबर, 2022 तक भारत पहुंचने की उम्मीद है। वायुसेना में एक बार फिर से इसके प्रशिक्षण को लेकर तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं।
राफेल रखने वाला चौथा देश बना भारत
बता दें कि राफेल विमान रखने वाला भारत चौथा देश बन गया है। अभी तक इसका इस्तेमाल कतर, फ्रांस और मिस्त्र करते आये हैं। वायु सेना के बेड़े में इस लड़ाकू विमान के शामिल होने पर देश की सामरिक ताकत बढ़ेगी, साथ ही अब पाकिस्तान को भारत के खिलाफ कोई भी कदम आगे बढ़ाने में सोचना पड़ेगा
अभी तीसरी और चौथी पीढ़ी के विमानों का इस्तेमाल करती है सेना
अभी वायुसेना के पास तीसरी और चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमान मौजूद है। जबकि राफेल पांचवी पीढ़ी का विमान है जिसमें राडार से बच निकलने की युक्ति है। इससे भारतीय वायुसेना आमूलचूल बदलाव होगा, क्योंकि वायुसेना के पास अब तक के विमान मिराज-2000 और सुखोई-30 एमकेआई या तो तीसरी पीढ़ी या चौथी पीढ़ी के विमान हैं।
भारत सरकार ने सितंबर 2016 में खरीद के लिए किया था समझौता
भारत सरकार ने इसकी खरीददारी के लिए सितंबर 2016 में पहल की थी, जिसमें फ्रांस के साथ समझौता किया गया था। कुल 36 विमानों की खरीदने के लिए भारत सरकार ने 59 हजार करोड़ रूपए की मूल्य पर तय किया था। हालांकि राफेल मामले में सरकार के इस फैसले पर विपक्ष ने कई सवाल खडे करते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की थी, कई बार सदन में भी मामला उठा था लेकिन विपक्ष कोई तत्थ्यात्मक चीजे नहीं दे सका था, हालांकि विपक्ष ने राफेल खरीद में हुए करार में करोड़ों को घोटाले का आरोप लगाया था।
India got its first Rafale on the occasion of Air Force Day, the strength of the Airforce will increase, know what is its firepower
अन्य लड़ाकू विमानों की अपेक्षा राफेल में ये हैं खास बातें
  • -राफेल एक पांचवी पीढ़ी का विमान है, जिसकी मारक क्षमता सबसे अधिक है।
  • -इसमें दो इंजन है, इसे हर तरह के मिशन पर भेजा जा सकता है।
  • -कई तरह के हथियारों के साथ मिटिओर मिसाइल से भी लैश है ये विमान।
  • -150 किमी की बियोंड विजुअल रेंज मिसाइल और हवा से जमीन पर मार वाली स्कैल्प मिसाइल से भी होगा लैस.
  • -स्कैल्प मिसाइल की रेंज 300 किमी, हथियारों के स्टोरेज के लिए 6 महीने की गारंटी.
  • -अधिकतम स्पीड 2,130 किमीध्घंटा और 3700 किमी. तक मारक क्षमता।
  • -एक मिनट में 60,000 फुट की ऊंचाई और 4.5 जेनरेशन के ट्विन इंजन से लैस.
  • -24,500 किलो भार उठाकर ले जाने में सक्षम और 60 घंटे अतिरिक्त उड़ान की गारंटी.
  • -75ः विमान हमेशा ऑपरेशन के लिए तैयार रह सकते हैं, परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम है.
  • -अफगानिस्तान और लीबिया में अपनी ताकत का प्रदर्शन कर चुका है राफेल
  • -भारतीय वायुसेना के हिसाब से इस विमान में कई फेरबदल किए गए हैं.
  • -राफेल में जितना तगड़ा रडार सिस्टम है उतना एफ-16 में नहीं है।
  • -राफेल का रडार सिस्टम 100 किलोमीटर के दायरे में एक बार में एकसाथ 40 टारगेट की पहचान कर सकता है
  • -जबकि पाकिस्‍तान के एफ-16 का रडार सिस्टम केवल 84 किलोमीटर के दायरे में है।
  • -राफेल का ऑन बोर्ड रडार और सेंसर काफी दूर से दुश्मन के लड़ाकू विमानों को डिटेक्ट कर सकता है।
  • -राफेल में लगे विभिन्‍न सेंसरों से पायलट को फैसला लेने कुछ माइक्रोसेकेंड का समय लगता है।
  • -राफेल मीटिअर और स्‍काल्‍प मिसाइलों के साथ उड़ान भर सकता है।
  • -मीटिअर मिसाइलें 150 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर हवा में गति कर रहे टारगेट पर भी सटीक निशाना लगाने में सक्षम हैं।
  • -राफेल महज एक मिनट में 60 हजार फुट की ऊंचाई तक जा सकता है।
  • -यह 17 हजार किलोग्रार्म इंधन क्षमता से लैस है।
  • -यह हर तरह के मौसम में एक साथ कई काम करने में सक्षम है।
  • – यह परमाणु अटैक, क्लोज एयर सपोर्ट, लेजर डायरेक्ट लॉन्ग रेंज मिसाइल अटैक और ऐंटी शिप अटैक में अचूक है।
लेकिन चीन के जे-20 से पीछे है राफेल
हालांकि चीन के पास जे-20 लड़ाकू विमान है, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस विमान के आगे अभी राफेल नहंी टिकता है। जे-20 विमानों की कॉम्बैट रेडियस 3400 किलोमीटर है, जो कि राफेल से आगे है। चीन का यह विमान पीएल-15 और पीएल-21 मिसाइलों से लैस है जिनकी रेंज क्रमशः 300 और 400 किलोमीटर है। यह 18 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है जबकि राफेल और एफ-16 इस मामले में काफी पीछे हैं।
हर साल आठ अक्टूबर को मनाया जाता है वायुसेना दिवस
बता दें कि हर साल आठ अक्टूबर को वायुसेना दिवस मनाया जाता है, इस बार भारतीय वायुसेना ने अपना 87 वां स्थापना दिवस मंगलवार को मनाया है। हालांकि वायुसेना दिवस क्यो मनाया जाता है इसके लिए हमें 87 साल पहले का इतिहास देखना होगा।
  • -8 अक्टूबर 1932 को वायुसेना की स्थापना हुई थी इसलिए ये दिवस मनाया जाता है।
  • -1 अप्रैल साल 1933 को वायुसेना के पहले दस्ते का गठन हुआ था।
  • -पहले दस्ते में 6 ट्रेंड ऑफिसर और 19 हवाई सिपाहियों शामिल किया गया था।
  • -भारतीय वायुसेना ने द्वितीय विश्वयुद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
ये थे पहले चीफ, एयर मार्शल
आजादी से पहले एयरफोर्स पर आर्मी का नियंत्रण होता था। एयरफोर्स को आर्मी से ‘आजाद‘ करने का श्रेय इंडियन एयरफोर्स के पहले कमांडर इन चीफ, एयर मार्शल सर थॉमस डब्ल्यू एल्महर्स्ट को जाता है। आजादी के बाद सर थॉमस डब्ल्यू एल्महर्स्ट को भारतीय वायुसेना का पहला चीफ, एयर मार्शल बनाया गया था. वह 15 अगस्त 1947 से 22 फरवरी 1950 तक इस पद को संभालते रहे।

Posted By-Ravi Gupta

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