चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के दीक्षांत में बेटियों को मिले अधिक मेडल राज्यपाल ने कहा कि परिवर्तन के लिए हिम्मत जरूरी

– छात्राओं को मिले अधिक स्वर्ण पदक छात्र रहे पीछे
लखनऊ। समाज में परिवर्तन लाना है तो हमें हिम्मत से आगे बढऩा होगा, जब हम हिम्मत के साथ आगे बढ़ते हैं तो परिणाम निश्चित ही दिखायी पड़ते हैं। ये बात राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कही। राज्यपाल सोमवार को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के 31वें दीक्षान्त समारोह में बातौर कुलाधिपति छात्रों और प्रोफेसरों को संबोधित कर रही थी। उन्होंने कहा कि हम सब प्रयास व स्पर्धा कर तथा तकनीक का उपयोग कर आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि भारत एक युवा देष है तथा समाज में परिवर्तन लाने के लिए हिम्मत से आगे बढना होता है। उन्होंने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय खरखौदा की छात्राओं को फल व पुस्तक भेंट की। उपाधि प्राप्तकृर्ता छात्र-छात्राओं ने एक स्वर में कहा कि हम प्रतिज्ञा करते है कि हम आजीवन इस उपाधि के योग्य सिद्ध होंगे। कुलाधिपति ने 1188 छात्र-छात्राओं को विभिन्न उपाधियां तथा 224 छात्र-छात्राओं को स्वर्ण रजत पदक एवं पदक/विशिष्ट योग्यता प्रमाण पत्र प्रदान किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी गुजरात राज्य के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने यह प्रण लिया था कि उनको जो भी गिफ्ट मिलेगा उसकी नीलामी कर प्राप्त धनराशि से लड़कियों की फीस व उनको कम्प्यूटर आदि देने की व्यवस्था की जाएंगी। उन्होंने कहा कि आज के दीक्षान्त समारोह में स्वर्ण पदक पाने वालों में छात्राएं अधिक है और छात्र कम है। छात्रों को भी अच्छी पढ़ाई करके आगे बढऩा चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत एक युवा देश है तथा देश की जनसंख्या का 65 प्रतिशत युवा है। इसलिए यहा तरक्की की संभावनाएं अपार है।
बेटी बचाओ और स्वच्छता अभियान के लिए लेना होगा संकल्प
राज्यपाल ने कहा कि आगामी गांधी जयन्ती पर सभी को स्वच्छता की संकल्प लेकर स्वच्छता को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने पूर्व में सेल्फी विद डाटर्स लेकर उसको सोशल साईटस पर अपलोड करने का आहवान किया, जिसको लोगों ने गम्भीरता से लेते हुए किया। उन्होंने कहा कि सभी बेटियां का घर, समाज में सम्मान हो इस बात पर जोर दिया जा रहा है। इसलिए हमें नारी चाहे वह अध्यापक, किसान, डाक्टर, इंजीनियर आदि किसी भी क्षेत्र में हो, उसको सम्मानित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने सती प्रथा, बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं को मिटाया है लेकिन फिर भी समाज में कुरीतियां व्यापत है। उन्होंने कहा कि सोनोग्राफी का आविष्कार मां के गर्भ में पल रहे बच्चे के स्वास्थय की जांच के लिए किया गया लेकिन लोगो ने इसका गलत उपयोग कर लिंग निर्धारण कराना शुरू कर दिया और लडकियों का गर्भपात कराना शुरू कर दिया। इसलिए गर्भपात का प्रदूषण बढ़ गया, जिसको कम करने के लिए प्रधानमंत्री जी ने बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं अभियान प्रारम्भ किया। उन्होंने कहा कि हम सभी संकल्प लें कि हम हमारे घरों में बेटी का सम्मान जरूर करेंगे। उन्होंने कहा कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है।
अधिकारियों को दी नसीहत
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय या कोई भी संस्था या प्रशासनिक अधिकारी जब कोई गांव गोद ले तो वहां चार बातों पर विशेष ध्यान दिया जाएं, जिसमें पहली कक्षा में गांव के सभी बच्चे प्रवेश लें, आठवीं की कक्षा के बाद छात्र-छात्राएं नवीं की कक्षा में अवश्य प्रवेश लें, गांव की हर महिला के बच्चे की डिलीवरी अस्पतालों में हो। उन्होंने कहा कि हम सभी को प्लास्टिक मुक्त भारत बनाने के लिए संकल्प लेना होगा तभी यह कार्य मूर्त रूप में परिलक्षित होगा। उन्होंने कहा पीएम मोदी ने भारत को वर्ष 2025 तक टीबी रोग से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए मिलकर प्रयास करने होंगे। उन्होंने जनपद में टीबी रोग से प्रभावित 18 वर्ष से कम आयु के 345 बच्चों को एनजीओ व अधिकारियों द्वारा गोद लिए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की।
समाज में बदलाव लाना ही सच्चा दीक्षांत
राज्यपाल ने कहा कि बाल विवाह नहीं होना चाहिए। 21 से कम आयु के कम लडक़े का व 18 से कम आयु की लडक़ी का विवाह कराना कानूनन अपराध है। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं आगे आकर उनके भाई के यहां हो रहे बाल विवाह को रूकवाया था। उन्होंने कहा कि समाज में परिवर्तन लाने के लिए हिम्मत से आगे बढना होता है। उन्होंने कहा कि दहेज प्रथा भी समाज की एक कुरीति है, जिसको भी रोका जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में जनचेतना व बदलाव लाना भी इस दीक्षान्त समारोह का एक उद्देष्य होना चाहिए और यहीं मेरा सच्चा दीक्षान्त है। उन्होंने कहा कि हम सब संकल्प लें कि हम हमारे देश के लिए काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि विष्वविद्यालय के सभी अध्यापक जिसमें कार्यालयाध्यक्ष भी शामिल है, सभी को कक्षाएं लेनी चाहिए। राज्यपाल को कुलपति विष्वविद्यालय ने शॉल भेंट की व किताबों का एक पैकेट भेंट किया।
डीलिट उपाधि से नवाजे गये डा. शशि शर्मा
दीक्षांत के मौके पर कुलाधिपति/राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने वर्ष 2019 के लिए कला संकाय में डाक्टर आफ लेटर्स (डीलिट) की उपाधि डा. शशि शर्मा को प्रदान की। उन्होंने कला संकाय में 63 को पीएचडी, 40 को एमफिल, 124 को कला निष्णात, 33 को स्नातक की, कृषि संकाय में 2 को पीएचडी, 9 को एमफिल, 69 को कृषि निष्णात तथा वाणिज्य एवं व्यवसायिक प्रशासन संकाय में 3 को पीएचडी, 60 को स्नाातकोत्तर की उपाधि तथा शिक्षा संकाय में 16 को पीएचडी, 13 को एमएड व 26 को बीपीएड की उपाधि, अभियांत्रिकी एवं तकनीकी संकाय में 163 को तथा विधि संकाय में 1 को एलएलएम 10 को बीएएलएलबी तथा चिकित्सा संकाय में 1 की डीएम, 33 को एमडी, 13 को एमएस, 138 को एमडीएस, 114 को एमबीबीएस व 14 को डिप्लोमा प्रदान किया तथा विज्ञान संकाय में 17 को पीएचडी, 204 को विज्ञान निष्णात, 21 को स्नातक की उपाधि प्रदान की।
्रइन्हे मिला रजत पदक
राज्यपाल ने वर्ष 2019 के लिए कुलाधिपति रजत पदक एमकॉम की छात्रा कु. दिव्या तेवतिया को तथा डा. शंकर दयाल शर्मा स्वर्ण पदक, एमफिल रसायन की छात्रा पूजा को तथा किसान ट्रस्ट नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित पुरस्कारों में चौधरी चरण सिंह स्मृति प्रतिभा पुरस्कार में बीएससी कृषि में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली शिवा चौधरी को 8000 रूपये पुरस्कार प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिन्ह तथा बीएससी कृषि में द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली शिवानी अहलावत को 6000 रूपये पुरस्कार प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिन्ह प्रदान किए। उन्होंने प्रायोजित स्वर्ण पदक एवं पदक प्रमाण पत्र में विभिन्न संकायों में शैक्षणिक स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्षन करने वाले 50 छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किए तथा कुलपति स्वर्ण पदक एवं पदक प्रमाण पत्र तथा विषिष्ट योग्यता प्रमाण पत्र में 164 छात्र-छात्राओं को प्रदान किए तथा वर्ष 2018 के लिए 1 छात्रा को प्रायोजित स्वर्ण पदक तथा 5 छात्र-छात्राओं को कुलपति स्वर्ण पदक/पदक प्रमाण पत्र प्रदान किए।

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