अभी नहीं चेते तो 21 वीं सदी का सबसे बड़ा सकंट होगा जल संकट, एकेटीयू के दीक्षांत में बोले जल पुरूष राजेन्द्र सिंह, मेडल पाकर खुश हुए मेधावी

-जल पुरूष ने दीक्षांत का मतलब दीक्षा का अंत नहीं, बल्कि और बढ़ जाती है जिम्मेदारी
-बीटेक कम्प्यूटर सांइस में दीक्षा सिंह को मिले सबसे अधिक अंक, कलाधिपति स्वर्ण पदक से सम्मानित
-मेडल और डिग्री पाकर खिले मेधावियों के चेहरे
लखनऊ। दीक्षांत का अर्थ दीक्षा का अंत होता है, जबकि मैै इस बात से सहमत नहीं हूं, ये तो एक प्राप्त शिक्षा के प्रयोग की शुरूआत होती है। प्राविधिक शिक्षा समाज के सकारात्मक विकास में अहम भूमिका रखती है। ये बात बुधवार को डा. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के 17 वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जल पुरूष राजेन्द्र सिंह ने कही। दीक्षांत के मौके पर जल पुरूष को राज्यपाल व कुलाधिपति की ओर से डिलिट की मानद उपाधि भी प्रदान की गयी। इस मौके पर राजेंद्र सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड इलाके के एकेटीयू से जुड़े संस्थानों को जल्दी ही जल संकट के दिशा में पहल करना चाहिए. इस यूनिवर्सिटी के ढ़ाई लाख छात्रों और शिक्षकों से अपील है कि जल बचा रहे हैं वह बहुत बड़ा परिवर्तन है. उन्होंने कहा कि प्रदेश का नेतृत्व राज्यपाल के हाथों में है उन्होंने अपने गुजरात में नदियों के प्रबंधन के क्षेत्र में बेहतर कार्य किया है वैसे ही शुरुआत यूपी में भी होगी. उन्होंने कहा कि वर्ष 1984 में अपने राजस्थान से जिस कार्यक्रम शुरू किया था. जल जंगल जमीन मुझे खुशी है कि अब वह पानीदार हो करके लोग खेती कर रहे है. 12 छोटी नदियों को पिछले 36 साल में अपने कार्य से पुनर्जीवित किया है. मैंने 108 तरीके के बाघ नदियां तालाब डिजाइन किए हैं. हम लोगों को सारे यूनिवर्सिटीं ने धरती से पानी निकालना सिखाया। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि एक मंच पर एकत्रित इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट दोनो ही उपाधिधारक के संवाद करने का मौका मिला। उन्होंने कहा देश दुनिया में हो रहे जल संकट पर भी बात करना बेहद जरूरी है, क्योकि युवा पीढ़ी में वह ताकत है जो इस संकट से निपटने की तकनीक प्रबंधन कर सकती है। उन्होंने कहा कि जल जी जीवन है यह सब कहने से ही काम नहीं चलेगा हमें जल सरंक्षण जैसे विषयों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखना होगा। इसी के साथ इस 17 दीक्षांत समारोह के मौके पर राज्यपाल आनंदी पटेल, प्राविधिक शिक्षा मंत्री कमलरानी भी विशिष्टï अतिथि के रूप में उपस्थित हुई। इस मौके पर दीक्षांत समरोह में 62 पीएचडी छात्र-छात्राओं को उपाधि प्रदान की गयी वहीं 66 मेधावियों को स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक प्रदान किये गये। जबकि बीटेक कंप्यूटर साइंस की दीक्षा सिंह, जिन्होंने सबसे अधिक अंक प्राप्त किये हैं को कुलाधिपति स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। इस दौरान प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने 58699 छात्र-छात्राओं को विभिन्न पाठ्यक्रमों में उपाधि प्रदान की गयी। इससे पहले विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय पाठक ने प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत की।
प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों ने ली प्रेरणा
इस मौके पर साथ ही साथ प्राथमिक विद्यालय, माध्यमिक विद्यालय एवं परमार्थ के 30 बालक-बालिकाओं को सम्मानित किया गया। बच्चों को सम्मानित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि मैं भी सरकारी विद्यालय से ही पढ़ी हूं उस दौर में बहुत बड़ी बात थी कि किसी बड़े शिक्षण संस्थान में सरकारी स्कूलों के बच्चे जा पाते थे। उन्होंने कहा कि यहां इन बच्चों को बुलाने का मकसद है कि ये भी बच्चे देंखेगें और पे्ररणा लेंगे कि मन से पढ़ाई करने पर वह भी डिग्री और मेडल प्राप्त कर सकते हैं। राज्यापाल ने सभी बच्चों को बैग देकर सम्मानित किया। राज्यपाल ने कहा कि ग्रामीण विकास के लिए विश्वविद्यालय द्वारा गांव गोद लेने की योजना एक सराहनीय कदम है, परमार्थ के माध्यम से समाज के पिछड़े जनों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोडऩे का प्रयास अनूठा है।
पिता मेरा पानी और धरती है मां दोनो का सरंक्षण जरूरी
लखनऊ। हमारे जीवन के लिए जल और धरती दोनो का ही बचा रहना बेहद जरूरी है। क्योंकि जल मेरा पिता है धरती हमारी मां है, एकेटीयू में आयोजित दीक्षांत समारोह के मौके पर छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए जल पुरूष राजेन्द्र सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि भारत आज सूखा और बाढ़ व अकाल से ग्रस्त है। आजादी के बाद10 गुना सूखा बढ़ गया है इसका जो मुख्य कारण है छोटी नदियों का मर जाना है। उन्होंने बताया की भूजल की स्थिति इतनी खराब होती जा रही है कि आज हमारी नदियां गंगा, गोमती जैसी कर्ई पवित्र नदियां नाले का रूप ले चुकी हैं। उन्होंने कहा छात्रों से कहा कि आप इंजीनियरों को यह कम करना है कि ऐसी सस्ती और और टिकाऊ तकनीक विकसित करनी होगी जो गांव से लेकर गरीब, मलिन बस्तियों तक के लोगों की मदद करने में कामयाब हो। हमें अपने देश को बाढ़ और सूखा से बचाना होगा तभी जल सरंक्षण, जल वायु परिवर्तन की सार्थक बात हो सकेगी।
विश्वविद्यालय दे रहा प्रोडक्ट बेस्ड लर्निंग को बढ़ावा
राज्यपाल ने कहा कहा कि विश्वविद्यालय के घटक संस्थान आईईटी, लखनऊ के छात्र-छात्राओं द्वारा ऐसे वंचितों के लिए परमार्थ नाम से सायंकालीन कक्षाएं संचालित की जा रही हैं, उन्होंने कहा कि वर्तमान में टीचिंग-लर्निंग में बडा पैराडाइम शिफ्ट हुआ है7 स्किल ओरिएंटेड और प्रोडक्ट बेस्ड लर्निंग की अवधारणा मूर्तरूप ले रही है। इनोवेशन और इन्क्युबेशन इंटरप्रन्योरशिप (स्वरोजगार) का मुख्य उपकरण बन गये हैं। मुझे प्रसन्नता हुई कि विश्वविद्यालय के द्वारा प्रोडक्ट बेस्ड लर्निंग को ब?ावा देने के लिए डॉ कलाम सेंटर ऑफ इनोवेशन, इनक्युबेशन ऑफ स्टार्टअप के माध्यम से बेहतर आईडिया को प्रोटोटाइप में तब्दील करने के लिए प्रत्येक आइडिया को 12 हजार रूपये की सहायता राशि प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि डॉ कलाम स्टार्टअप परिक्रमा परियोजना के अंतर्गत विभिन्न सम्बद्ध संस्थानों में कार्यक्रम आयोजित कर आईडिया को बिजनेस प्लान में तब्दील करने का कार्य किया जा रहा है। अब तक दो हजार से ज्यादा इनोवेटिव आईडिया को बिजनेस प्लान के लिए तैयार किया जा चुका है। डिजिटल प्लेटफॉर्म कार्य में तेजी लाने के साथ ही पारदर्शिता को भी प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि यह एक हर्ष का विषय है कि विश्वविद्यालय स्वयं को डिजिटल करने की प्रतिबद्धता पर खरा उतरा है। विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा फार्म, पेपर डिलिवरी, मूल्यांकन, परिणाम, टेंडर, सम्बद्धता, से लेकर बिल पेमेंट तक सभी कार्य डिजिटल और ऑनलाइन कर दिए गये हैं। साथ ही एक नवम्बर से विश्वविद्यालय ई-ऑफिस के माध्यम से पूर्ण कार्यप्रणाली संचालित करने जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई कि गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा को सुनिश्चित करवाने हेतु नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रीडिटेशन से विश्वविद्यालय के सम्बद्ध संस्थानों के पाठ्यक्रमों के एक्रीडिटेशन करवाने के लिए प्रयत्न किये जा रहे हैं।
गरीब और असहाय छात्रों को मुख्य धारा में लाने की जरूरत-कमल रानी
इस मौके पर उपस्थित प्राविधिक शिक्षा मंत्री कमल रानी ने कहा कि विवि परिसर में वन टाइम यूजेबल प्लास्टिक के प्रयोग को निषेध किया गया है। उन्होंने कहा कि विवि की समस्त प्रयोगशालों का आधुनिकरण कर सराहनीय कार्य किया गया है, साथ ही उन्होंने विवि के कुलपति प्रो पाठक द्वारा किये जा रहे विकास कार्यों की सराहना की, उन्होंने उपाधि प्राप्त कर रहे छात्र-छात्राओं से आवाहन किया कि गरीब और असहाय बालक-बालिकाओं को शिक्षा की मुख्यधारा में लाने के लिए अपने स्तर से प्रयास करें।
एकेटीयू प्रदेश का पहला डिजिटल विश्वविद्यालय बना
विवि के कुलपति प्रो विनय कुमार पाठक ने विवि की प्रगति आख्या प्रस्तुत की उन्होंने कहा कि विवि ने मूक्स बेस्ड लर्निंग को बढ़ावा देने के लिए दो ऑडियो – विजुअल स्टूडियो की स्थापना गयी है। उन्होंने कहा कि वैल्यू एजुकेशन को क्रेडिट कोर्स के रूप में लागू करने वाला देश का पहला प्राविधिक विवि बना है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती पर गांव गोद लेकर ग्रामीण अंचलों में कार्य करने वाले 20 सम्बद्ध संस्थानों को सम्मानित किया गया है। उन्होंने कहा विवि प्रदेश का पहला विवि है जो पूरी तरह से डिजिटल है। उन्होंने उपाधि प्राप्त कर रहे छात्रों को शपथ भी दिलाई कि वे दहेज का बहिस्कार कर समाज में कुरीतियों के अंत के लिए प्रयत्न करेंगे।
राज्यपाल ने भावी इंजीनियरों को दी नसीहत
डिग्री व मेडल प्राप्त कर चुके छात्रों से अपील करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आप लोग चाहे सरकारी इंजीनियर बने या प्राइवेट इंजीनियर लेकिन इस बात का ध्यान रखे यदि उनकी निगरानी में किसी स्कूल का निर्माण होता है तो बच्चें के हिसाब से ही मूलभूत सुविधाएं भी तैयार करायें ताकि बच्चों को कोई दिक्कत न हो, साथ ही खिडक़ी दरवाजे में कुंडी बच्चों के हिसास लगाना चाहिए, टॉयलेट ऐसे बनाये जाने चाहिए जहां बच्चे आसानी से पहुंच सके।
इन्हें मिली पीएचडी की उपाधि
पीएचडी की उपाधि पाने वाले मेधावियों में श्रीधर, दीपक कुमार वर्मा, मनोज पाण्डेय, दिग्विजय सिंह चौहान, शिल्पी सोनकर, नैनतारा जैन, सुप्रिया सिंह, नेल्सन जार्ज, दिव्य बीके, ज्योत्सना अस्थाना, मेबलमिषा सिंह, आरती शर्मा, अखिला विश्वान, नैंसी जयसवाल, रतिकांत मलिक, पल्लवी कोहली, सौम्या राठौर, श्रुति पाण्डेय, दीप्ति यादव, अंकुर राय, चिराग अरोड़ा, शिल्पी पाटिल, तृप्ति मिश्रा, हरिमोहन सक्सेना, प्रियंका खरे, मोहनीश कुमार, कलिकापत राय, अंशुल श्रीवास्तव, अनुराधा सिंह, सिदार्थ शंकर भट्टï, मंयक माहेश्वरी, अनुपम कुमार सचान, सुषमा वर्मा, शिव कुमार यादव, सचिन कुमार, अरूण कुमार, राहुल कौशिक, सीमा साहू, कायनात खान, गरिमा प्रकाश, शिल्पी लावनियां, किशन पाल सिंह, गरिमा मिश्रा, पुनीत गुप्ता, अनंत सक्सेना, समीक्षा त्रिपाठी, मोनिका अरोड़ा, ऋचा गुप्ता, नेहा अग्रवाल, कौशल किसोर, गुजन, पुष्पा, स्मृति ओझा, भावना सेठी, नीरज मसंद,, एल नवीन कुमार एस राव, रवीश कटियार, सुचिता शुक्ला, अभिषेक शर्मा अक्षय सिंह,सुधाशु सिंह, सुधांशु कनौजिया, अजय कुमार महतो।
किसान के बेटे सौरभ को मिला स्वर्ण पदक
दीक्षांत समारोह के मौके पर बीटेक सिविल इंजीनियरिंग ग्रुप में प्रथम स्थान पाने वाले सौरभ वर्मा को स्पर्ण पदक के साथ सम्मानित किया गया। बाराबंकी रहने वाले सौरभ के पिता पेशे से किसान हैं, सौरभ ने बताया कि उन्होंने राम स्वरूप मेमोरियल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट से पढ़ाई की है। पिता का सपना था कि मैं इंजीनियर बनूं
बीटेक कम्प्यूटर सांइस में पहले स्थान पर रही दीक्षा
बीटेक कम्प्यूटर सांइस की परीक्षा पास करने वाली छात्रा दीक्षा सिंह पहले स्थान पर रही हैं। दीक्षा ने सबसे अधिक अंक प्राप्त किए हैं। दीक्षा ने बातचीत में बताया कि वह अजय कुमार गर्ग इंजीनियरिंग कॉलेज गाजियाबाद की छात्रा हैं, उन्होंने बताया कि पिता का सपना था कि मैं कम्प्यूटर सांइस से इजीनियरिंग करूं जो की पूरा हुआ।
बीटेक के इन मेधावियों को मिला गोल्ड मेडल
अकाश गोयल, कृति रस्तोगी, दीक्षा तिवारी, वैभव अग्निहोत्री, आदिति कुशवाहा, अमित कुमार, सुजाता मल्ल, दीपिका, कृतिक श्रीवास्तव, प्रज्ञा चतुर्वेदी, शिवम कुमार, चारूल विश्नोई, शिवांगी पाल, नेहा पटेल, अमन द्विवेदी, दुश्यंत सिंह, केशव वर्मा, आयुषि, क्षितिज कक्कड़, अनम फातिमा, नितेश कुमार
इन्हे मिला रजत पदक
आशीष प्रजापति, अनुराग तिवारी, आदर्श प्रताप, मनीष कुमार, आकांक्षा मिश्रा हिमांशु पाण्डेय, सोनिया चौधरी, अंशु सक्सेना, छवि अग्रवाल, आयुषी द्विवेदी, कमल चौधरी, आदित्य प्रताप सिंह, प्रियांशी बरनवाल, मानसी अग्रवाल, जिया शदाब, तैबा हसन, रिमझिम निगम, सपना सक्सेना, राशि वर्मा, राघव अग्रवाल, नीलिमा सिंह
इन्हे मिला कांस्य पदक
अकिंत कुमार वर्धन, इशिता गोयल, शुभम शर्मा, शिवानी, आयुषी गुप्ता, प्रशांत गुप्ता, गौरव सुनेजा, शुभम कुमार, अनुश्री पंत, सुतष्णा सेन, दिविता, रौशन रवि, अभिषेक वैद्य, शिवानी कपूर, श्वेता मलिक, मिताली शर्मा, ईशा जैन, सत्य विक्रम ङ्क्षसह, अतिकी सिंघल, अनुज शर्मा, आशी कंसल।

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