यूपी में धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश के मसौदे को राज्यपाल ने दी मंजूरी, लागू हुआ कानून, जानिए क्या होगी सजा

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न्यूज डेस्क। यूपी में धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश के मसौदे को राज्यपाल ने शनिवार को मंजूरी देदी है। ऐसे में अब ये कानून लागू हो चुका है। सीएम योगी की मंत्रिपरिषद की बैठक में मंगलवार को धर्मांतरण कानून के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी थी, इस प्रस्ताव को उसके बाद राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के पास भेजा गया था। जिसके बाद ​शनिवार को राज्यपाल ने मंजूरी दे दी है। राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही यह कानून प्रभावी हो गया है और अब ऐसा अपराध गैर जमानती माना जाएगा।

नये कानून के में ये है प्रावधान
मंजूर हुए अध्यादेश के अनुसार किसी एक धर्म से अन्य धर्म में लड़की का धर्म परिवर्तन सिर्फ एकमात्र प्रयोजन शादी के लिए किया जाता है तो ऐसा विवाह अमान्य माना जायेगा। राज्यपाल के मंजूरी मिलने के बाद अब इस अध्यादेश को छह माह के भीतर विधानमंडल के दोनों सदनों में पास कराना होगा।

धर्म परिवर्तन कराने वालों को दस साल की सजा
नये कानून के मुताबिक धर्म परिवर्तन कराने वालों को दस वर्ष तक जेल की सजा होगी। साथ ही यह अपराध गैर जमानती माना जायेगा। दोष सिद्ध हुआ तो दोषी को कम से कम एक वर्ष और अधिकतम पांच वर्ष की सजा भुगतनी होगी। इसके साथ ही न्यूनतम 15,000 रुपए का जुर्माना भी भरना होगा। इस प्रकार के मामलों में अगर मामला अवयस्क महिला, अनूसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की महिला के सम्बन्ध में हुआ तो दोषी को तीन वर्ष से दस वर्ष तक कारावास की सजा और न्यूनतम 25,000 रुपये जुर्माना अदा करना पड़ेगा।

योगी सरकार इसलिए लायी अध्यादेश
सरकार सरकार की नजर में कई ऐसे मामले सामने आये थे जिसमें झूठ बोलकर विवाह करना या फिर धर्म जबरन धर्म परिवर्तन , फिर महिलाओं को प्रताड़ित किया जाता था। सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए ऐसा कानून पास किया और अब झूठ बोलकर या झांसा देकर अथवा छल-प्रपंच कर धर्म परिवर्तन का जो भी दोषी पाया जायेगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी।

क्या कहता है अध्यादेश
अध्यादेश के अनुसार एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन के लिए संबंधित पक्षों को विहित प्राधिकारी के समक्ष उद्घोषणा करनी होगी कि यह धर्म परिवर्तन पूरी तरह स्वेच्छा से है। संबंधित लोगों को यह बताना होगा कि उन पर कहीं भी, किसी भी तरह का कोई प्रलोभन या दबाव नहीं है। अध्यादेश में धर्म परिवर्तन के सभी पहलुओं पर प्रावधान तय हैं। इसके अनुसार धर्म परिवर्तन का इच्छुक होने पर संबंधित पक्षों को तय प्रारूप पर जिला मजिस्ट्रेट को दो माह पहले सूचना देनी होगी। इसका उल्लंघन करने पर छह माह से तीन वर्ष तक की सजा हो सकती है।