पिता जी नहीं रहे, खबर मिलने के बाद भी कर्तव्य से पीछे नहीं हटे सीएम योगी

न्यूज डेस्क। वक्त करीब 10 बजकर 44 मिनट और दिन सोमवार मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ की मीटिंग के बीच बल्लू नाम के व्यक्ति का आना हुआ, मुख्यमंत्री के बेहद करीबी कहे जाने वाले बल्लू राय के चेहरे पर दुख का भाव था मुख्यमंत्री ने सिर उठाया और बल्लू को देखा तो बल्लू ने उन्हें एक पर्ची दी, जिसमें लिखा था कि अब आपके  पिता जी (आनंद सिंह विष्ट) इस दुनिया में नही रहे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जैसे ही वह पर्ची पढ़ी तो उनकी आंखे भर आयी और फिर भी वह मीटिंग करते रहे, मुख्यमंत्री सोमवार को लोकभवन नहीं बल्कि 5 कालीदास आवास पर अधिकारियों के साथ कोविड—19 की समस्या से कैसे छुटकारा मिले इसको लेकर टीम 11 के साथ मीटिंग कर रहे थे। एक तरफ पिता की मौत की खबर दूसरी ओर फर्ज की कर्सी पर बैठे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विचलित नहीं हुए। लेकिन ​मुख्यमंत्री की नम आंखे साफ बयां कर रही थी कि आज उन्होंने अपने परम पूज्य पिता को खो दिया है और इसका उन्हें कितना दुखा है, मुख्यमंत्री ने मीटिंग पूरी की और रोजाना की तरह से जो डिसीजन लेने थे वह भी लिए।

                             ” कल्पना की​जिए कि इस संकट की घड़ी में उस व्यक्ति के अंदर कैसा भाव होगा जिसके पिता के मरने की खबर उसे मिल चुकी हो और वह फिर भी अपने कर्म से पीछे न हटा हो। मोह को किनारे रखकर इतनी हिम्मत और सहनशक्ति कोई योगी ही दिखा सकता है। ऐसे ही कोई  योगी नहीं बन जाता ये बात भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ ने साबित कर दी। ,,

बता दें कि मुख्यमंत्री ने समयनुसार मीटिंग की शुरूआत की थी, लेकिन उनके चेहरे की उदासी बयां कर रही थी कि सबकुछ ठीक नहीं है। लेकिन जैसे ही उनके पिता के स्वर्गवास की खबर मिली वह पहले ही तरह अधिकारियों के साथ विचार विमर्श करते रहे। कोरोना के संकट के दौरान वह मीटिंग में जब भी मास्क लगाकर आते तो उस समय वह मास्क ​नीचे रख देते थे लेकिन आज उन्होंने मास्क नीचे नहीं रखा था।

​अंतिम संस्कार में भी नहीं जा रहे सीएम, दिया बड़ा संदेश
मीटिंग के समाप्त होने के बाद पिता याद करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ अपने आंसू रोक नहीं पाये और उन्होंने एक बड़ा संदेश देते हुए अपने घर के लोगों के नाम पत्र भी लिखा

                                      “ पूज्य पिताजी के कैलाशवासी होने पर मुझे भारी दुख एवं शोक है। वे मेरे पूर्वाश्रम के जन्मदाता है। जीवन में ईमानदारी, कठोर परिश्रम एवं निस्वार्थ भाव से लोक मंगल के लिए समर्पित भाव के साथ कार्य करने का संस्कार बचपन में उन्होंने मुझे दिया। अंतिम क्षणों में उनके दर्शन की हार्दिक इच्छा थी, परन्तु वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के खिलाफ देश की लड़ाई को उत्तर प्रदेश की 23 करोड़ जनता के हित में आगे बढ़ाने का कर्तव्यबोध के कारण मैं न कर सका। कल 21 अप्रैल को अंतिम संस्कार के कार्यक्रम में लॉकडाउन की सफलता और महामारी कोरोना को परास्त करने की रणनीति के कारण भाग नहीं ले पा रहा हूं। पूजनीया मां, पूर्वाश्रम से जुड़े सभी सदस्यों से भी अपील है कि वे लॉकडाउन का पालन करते हुए कम से कम लोग तिम संस्कार के कार्यक्रम में रहें। पूज्य पिताजी की स्मृतियों को कोटि-कोटि नमन करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा हूं। लॉकडाउन के बाद दर्शनार्थ आऊंगा।

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