मदरसों से न डॉक्टर बने न आईएएस, अब सामान्य शिक्षा नीति बनाने की जरूरत

लखनऊ। देश में चल रहे इन मदरसों से आज कितने डॉक्टर बन गये या फिर कितने इंजीनियर और आईएएस बन गये हैं? ऐसे में अब मदरसों को खत्म कर एक सामान्य शिक्षा की नीति बनाये जाने की जरूरत है। क्योंकि इनमें दी जाने वाली शिक्षा का वह स्तर नहीं है जिससे आज के बच्चे कोई बड़े ओहदे पर पहुंच सके। ये विचार शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी के हैं।
श्री रिजवी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर ये मांग की है कि मदरसों को समाप्त कर शिक्षा की एक नीति बनायी जाये। साथ ही उन्होंने मदरसों की शिक्षा पर सवाल भी खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि मदरसों से आज तक कितने आईएएस और डॉक्टर व इंजीनियर बन गये हैं ये कोई बता सकता है? उन्होंने कहा कि मदरसों की शिक्षा का वह स्तर ही नहीं है कि लोग इस मुकाम पर पहुंच सके। उन्होंने ये भी कहा कि उन्होंने कहा कि देश में मदरसे कट्टरपंथियों द्बारा प्रेरित और संचालित हैं। जिन्हें खुद धर्मशास्त्र का ज्ञान नहीं है, वह अपने गलत विचारों से बच्चों के दिमाग पर गलत प्रभाव डालते हैं। उन्होंने ये भी कहा कि कट्टरपंथी मुल्ला मुस्लिम बच्चों को सिर्फ धर्म की शिक्षा देकर उन्हें सामान्य शिक्षा से दूर कर रहे हैं। वसीम रिजवी ने पत्र में करीब 27 बिदुओं के जरिए मदरसा शिक्षा पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए उसे खत्म करने की अपील की है उन्होंने कहा कि देश के ज्यादातर मदरसे जकात के पैसे से चल रहे हैं, जोकि पाकिस्तान, बांग्लादेश से आ रहा है।

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